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अमेरिका ने पाकिस्‍तान को दिया एक और झटका, मिलिट्री ट्रेनिंग प्रोग्राम में की बड़ी कटौती

मिलिट्री ट्रेनिंग प्रोग्राम में कटौती करने के अमेरिका के इस फैसले पर पाकिस्तान और पेंटागन के अधिकारियों के द्वारा सीधे तौर पर तो कोई टिप्पणी नहीं की गई है, लेकिन दोनों देशों के कुछ अधिकारी इस फैसले की गुप्त रूप से आलोचना कर रहे हैं।

अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (फोटो सोर्स- REUTERS)

पाकिस्तान के ऊपर अमेरिका की सख्ती लगातार बढ़ती जा रही है। आतंकी संगठनों पर कार्रवाई करने में असफल रहे पाकिस्तान के सैन्य अधिकारियों को मिलने वाले प्रशिक्षण और शैक्षणिक कार्यक्रमों में यूएस प्रशासन ने कटौती करना शुरू कर दिया है। रॉयटर्स के मुताबिक इस साल की शुरुआत में अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने पाकिस्तान को मिलने वाले सुरक्षा सहयोग को सस्पेंड करने का फैसला लिया था, अब मिलिट्री ट्रेनिंग प्रोग्राम में कटौती करते हुए अमेरिका ने इस फैसले के तहत कदम उठाने भी शुरू कर दिए हैं। पाकिस्तानी सैन्य अधिकारियों का प्रशिक्षण और शैक्षणिक कार्यक्रम दोनों देशों के द्विपक्षीय संबंधों के प्रतीक के तौर पर काफी अहम माना जाता था।

इस माह में अमेरिका ने पाकिस्तान को दूसरा बड़ा झटका दिया है। इससे पहले अमेरिका कांग्रेस ने पाकिस्तान को दी जाने वाली रक्षा मदद में जबरदस्त कटौती करने का फैसला किया था। पहले रक्षा मदद और अब मिलिट्री ट्रेनिंग प्रोग्राम में कटौती करने के फैसले के कारण पाकिस्तान को जबरदस्त झटका लगा है।

मिलिट्री ट्रेनिंग प्रोग्राम में कटौती करने के अमेरिका के इस फैसले पर पाकिस्तान और पेंटागन के अधिकारियों के द्वारा सीधे तौर पर तो कोई टिप्पणी नहीं की गई है, लेकिन दोनों देशों के कुछ अधिकारी इस फैसले की गुप्त रूप से आलोचना कर रहे हैं। यूएस के अधिकारियों का कहना है कि यह फैसला विश्वास बहाली की प्रक्रिया को कमजोर बना सकता है। वहीं पाकिस्तान के अधिकारियों ने चेताया है कि अमेरिका के इस फैसले के कारण मजबूर होकर कहीं उनकी मिलिट्री चीन और रूस की तरफ लीडरशिप ट्रेनिंग के लिए रुख न कर ले।

अफगानिस्तान और पाकिस्तान के लिए एक पूर्व अमेरिकी विशेष प्रतिनिधि डेन फेल्डमैन ने इस ट्रंप प्रशासन के इस कदम को दूरदृष्टि रहित बताया है। अमेरिका के एक विभाग के प्रवक्ता का कहना है कि अमेरिकी सरकार के इंटरनैशनल मिलिटरी एजुकेशन और ट्रेनिंग प्रोग्राम (IMET) से पाकिस्तान के निलंबन के कारण पाकिस्तान के 66 अधिकारियों को मौका नहीं मिलेगा, ऐसे में इन जगहों को या तो खाली रखा जाएगा या फिर किसी और देश के अधिकारियों से भरा जाएगा।

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