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मौत से जूझती बच्ची, बगल में रोता नाना, दुनिया भर में वायरल हुई यह PHOTO

6 दिसंबर को ही ब्रायलीन के परिजनों को इस बात का पता चला कि उनकी नन्हीं परी ब्रैन कैंसर के सबसे खतरनाक फॉर्म डिफ्यूज इंट्रिन्सिक पेन्टीन ग्लिओमा (डीआईपीजी) से जूझ रही है। दुर्भाग्य से इस बीमारी का कोई इलाज नहीं है।

फ्लोरिडा की रहने वाली एली पार्कर ने अपनी बेटी ब्रायलीन की फोटो फेसबुक पर शेयर की।

कैंसर किस तरह से लोगों को तोड़कर रख देता है उसकी कहानी बयां करती हुई एक तस्वीर इस वक्त सोशल मीडिया पर काफी वायरल हो रही है। एक मां ने कैंसर से जूझती अपनी पांच साल की बेटी की एक ऐसी तस्वीर फेसबुक पर शेयर की है, जिसे देखकर हर किसी की आंखें नम हो जाएंगी। इस तस्वीर में बच्ची अस्पताल के बिस्तर पर है और कैंसर से जूझ रही है, वहीं पास में ही उसके ग्रैंडफादर भी बैठे हैं, जो दुख के कारण रो रहे हैं। पेंसाकोला, फ्लोरिडा की रहने वाली एली पार्कर ने आठ जनवरी को अपनी बेटी ब्रायलीन की फोटो फेसबुक पर शेयर की। ब्रायलीन ब्रेन ट्यूमर से जंग लड़ रही है। 6 दिसंबर को ही ब्रायलीन के परिजनों को इस बात का पता चला कि उनकी नन्हीं परी ब्रैन कैंसर के सबसे खतरनाक फॉर्म डिफ्यूज इंट्रिन्सिक पेन्टीन ग्लिओमा (डीआईपीजी) से जूझ रही है। दुर्भाग्य से इस बीमारी का कोई इलाज नहीं है।

एली पार्कर के पिता सीन पीटरसन भी इस तस्वीर में दिख रहे हैं। दुर्भाग्य से पीटरसन भी मोटर न्यूरॉन डिसीज (एमएनडी) से पीड़ित हैं और कुछ बोल नहीं सकते। इस डीसीज से पीड़ित व्यक्ति की मसल्स कमजोर पड़ जाती हैं और शरीर ठीक से काम नहीं करता है। ब्रायलीन और उसके ग्रैंडफादर की यह तस्वीर इस वक्त काफी वायरल हो रही है। दोनों की एक अन्य तस्वीर भी एली ने 9 जनवरी को फेसबुक पर शेयर की है। इसमें उन्होंने अपनी बेटी और पिता को दुनिया के सबसे मजबूत लोग कहा है। उन्होंने लिखा है, ‘आज तक मैंने जितने लोगों को देखा है उनमें से ये दोनों सबसे मजबूत इंसान हैं। हमें जानने वाला हर व्यक्ति यही बात कहेगा। हर कोई यही सोचता था कि ये दोनों हम सबसे ज्यादा दिनों तक रहेंगे, लेकिन मैंने कभी नहीं सोचा था कि मेरी नन्हीं परी सबसे पहले हमें छोड़कर जाएगी।’

आपको बता दें कि एली लगातार ही फेसबुक के माध्यम से अपनी बेटी की तस्वीरें शेयर कर रही हैं और कैंसर को लेकर जागरुकता फैलाने का काम कर रही हैं। अभी तक करीब 22,000 डॉलर इंटरनेट के माध्यम से ब्रायलीन के इलाज के लिए जुटा लिए गए हैं। पार्कर का कहना है कि उनकी बेटी का इलाज कीमोथेरेपी के जरिए भी संभव नहीं है, केवल रेडिएशन का इस्तेमाल करके कुछ हद तक इलाज किया जा सकता है, लेकिन ब्रायलीन ज्यादा से ज्यादा एक साल तक और जिंदा रहेगी।

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