ईरान और इज़रायल के बीच जारी जंग थमने का नाम नहीं ले रही है। पिछले 14 दिनों से लगातार ताबड़तोड़ हमले हो रहे हैं। इस बीच ईरान के नए सुप्रीम लीडर मोजतबा खामेनेई ने एक बार फिर सख्त तेवर दिखाए हैं। उन्होंने लोगों से एकता बनाए रखने का आग्रह किया है और यहां तक कहा है कि मिडिल ईस्ट में मौजूद जितने भी अमेरिकी बेस हैं, उन्हें तत्काल प्रभाव से बंद होना होगा।
मोजतबा खामेनेई की दो टूक
एक टेलीविजन संबोधन में प्रेजेंटर ने ईरानी सुप्रीम लीडर का संदेश बढ़ते हुए कहा कि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज़ आगे भी बंद रहेगा और इसके जरिए ईरान अपने दुश्मनों पर दबाव बनाएगा। उन्होंने यह भी कहा कि तेहरान किसी न किसी तरीके से अपने दुश्मनों से मुआवजा वसूलेगा। इसके अलावा अपने संबोधन के दौरान मोजतबा खामेनेई ने उन बहादुर जवानों का भी शुक्रिया अदा किया, जिन्होंने देश की रक्षा के लिए अपनी जान तक दांव पर लगा दी।
नेतन्याहू की वॉर्निंग
वहीं दूसरी ओर, इज़रायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने भी कड़ा रुख अपनाते हुए ईरान के नए सुप्रीम लीडर को खुली चेतावनी दी है। एक बयान में उन्होंने दो टूक कहा कि ईरान के नए सुप्रीम लीडर के लिए कोई “लाइफ इंश्योरेंस” नहीं है। उन्होंने यह भी साफ कर दिया कि इज़रायल के जितने भी दुश्मन हैं,चाहे वे किसी भी आतंकी संगठन से जुड़े हों,उन्हें किसी तरह की सुरक्षा की गारंटी नहीं दी जाएगी। उनके इस बयान का साफ मतलब है कि आगे भी इस तरह के हमले जारी रह सकते हैं।
मिडिल ईस्ट में तनाव
जानकारी के लिए बता दें कि इस युद्ध की वजह से पूरे मिडिल ईस्ट में भारी तबाही देखने को मिली है। यूएन ने बताया है कि इस युद्ध की वजह से ईरान में अब ततक 32 लाख से ज्यादा लोगों को विस्थापित होना पड़ा है। लेबनान से भी भारी संख्या में लोगों का पलायन हुआ है। इसी युद्ध की वजह से तेल संकट भी गहरा गया है। ब्रेंट क्रूड की कीमत करीब 9 प्रतिशत बढ़कर 100 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर पहुंच गई् है।
जानकार मानते हैं कि आने वाले दिनों में भी जंग ऐसे ही जारी रहने वाली है। यहां समझने की कोशिश करते हैं कि ईरान-अमेरिका और इजरायल की सेना कितनी ताकतवर है। जनसत्ता ने आपके लिए आसान इंफोग्राफिक बना दिए हैं जिससे सबकुछ समझा जा सकता है-
कितनी है ईरान की सैन्य ताकत | कितनी है इजरायल की सैन्य ताकत | कितनी है अमेरिका की सैन्य ताकत
