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VIDEO: जब संसद में प्रधानमंत्री पर फेंके गए अंडे, देखते रह गए सुरक्षाकर्मी

पूर्व राष्ट्रपति और वर्तमान में विपक्षी सांसद सली बेरिशा ने फेसबुक पर लिखा कि अंडे विपक्ष के द्वारा पीएम इडी रामा को क्रिस्मस और नए साल की छुट्टियों के लिए भेजे ग्रीटिंग कार्ड थे। सोशलिस्ट पीएम रामा ने ट्विटर पर लिखा, ''बायकॉट के महीनों के दौरान उनके प्रतिनिधियों को मुर्गी घरों में चिकन का रेप करने और अंडे लूटने में समय बर्बाद करना पड़ा।''

पीएम इडी रामा जब पोडियम से सांसदों को संबोधित कर रहे थे तभी उन पर अंडे से हमला कर दिया गया। (Image Source: Twitter/@urimgjata1)

अल्बानिया में विपक्ष के एक सांसद ने प्रधानमंत्री इडी रामा पर अंडे फेंककर छात्रों के विरोध प्रदर्शन का समर्थन किया। गुरुवार (20 दिसंबर) को प्रधानमंत्री रामा संसद में जब छात्रों के मुद्दे पर सांसदों को संबोधित कर रहे थे तभी कंजर्वेटिव डेमोक्रेट पार्टी के सांसद एंडरी हासा ने प्रधानमंत्री पर अंडे फेंकना शुरू कर दिया। आनन-फानन में सुरक्षाकर्मियों ने हासा को दबोच लिया। सांसद की इस हरकत पर संसद ने उन्हें 10 दिन के लिए बैन कर दिया है। अपने ऊपर हुए अंडा हमले के खिलाफ पीएम इडी रामा सोशल मीडिया पर जमकर बरसे। बता दें कि अल्बानिया में विश्वविद्यालयों में फीस बढ़ाए जाने के खिलाफ छात्र लगातार विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक विपक्षी गठबंधन ने छात्रों के विरोध को जायज ठहराया है और उन्हें अपना समर्थन दिया है। हाल में छात्रों ने भी शिक्षा मंत्रालय के बाहर अंडे फेंककर प्रदर्शन किया था। विपक्ष का कहना है कि उसने छात्र प्रदर्शनकारियों के साथ एकजुटता दिखाते हुए पीएम पर अंडे फेंके।

पूर्व राष्ट्रपति और वर्तमान में विपक्षी सांसद सली बेरिशा ने फेसबुक पर लिखा कि अंडे विपक्ष के द्वारा पीएम इडी रामा को क्रिस्मस और नए साल की छुट्टियों के लिए भेजे ग्रीटिंग कार्ड थे। सोशलिस्ट पीएम रामा ने ट्विटर पर लिखा, ”बायकॉट के महीनों के दौरान उनके प्रतिनिधियों को मुर्गी घरों में चिकन का रेप करने और अंडे लूटने में समय बर्बाद करना पड़ा।” उन्होंने आगे लिखा, ”विपक्ष को छात्रों की मांगों के बारे में चर्चा करनी चाहिए थी लेकिन वास्तव में यह संसदीय सत्र एक संघर्ष में बदल गया।”

छात्र बेहतर परिसर सुविधाओं, कम शिक्षण शुल्क और सार्वजनिक विश्वविद्यालय प्रणाली की मांग करते हुए हफ्तों से तिराना में इकट्ठा होते रहे हैं। रामा की सरकार ने कहा है कि वह पहले छात्र प्रदर्शनकारियों से बात करना चाहती है, उसके बाद उनकी मांगे स्वीकार करने के लिए तैयार है।

बता दें कि अल्बानिया में छात्रों ने सरकार के सामने अपनी आठ सूत्री मांग रखी है। इसमें शिक्षा का बजट बढ़ाकर सकल घरेलू उत्पाद का पांच फीसदी करना शामिल है। छात्र चाहते हैं कि विश्वविद्यालयों और शिक्षण प्रणाली में बुनियाादी सुधार किए जाएं, यूरोपीय मानकों के अनुसार पुस्तकालय बनाए जाएं, किताबें ऑनलाइन की जाएं और अल्बानिया की भाषा में छात्रों को मुफ्त शिक्षा मुहैया कराई जाए।

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