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वायु प्रदूषण से हर साल दुनिया में मरते हैं 55 लाख लोग

अध्ययन में 1990 से 2013 के बीच 188 देशों में स्वास्थ्य और वायु प्रदूषण जैसे खतरनाक कारकों का विश्लेषण किया गया। इसमें कहा गया कि दुनिया के सबसे ज्यादा आबादी वाले देश चीन और भारत में वायु सबसे ज्यादा दूषित है।

Author वाशिंगटन | February 13, 2016 9:38 PM
एएएएस में अपना अध्ययन पेश किया, जिसमें कहा गया कि वायु प्रदूषण जनित बीमारियों के कारण 2013 में चीन में 16 लाख, जबकि भारत में 14 लाख लोगों की मौत हुई। (फाइल फोटो)

वायु प्रदूषण के कारण हर साल दुनिया भर में 55 लाख लोग मारे जाते हैं। इनमें से आधी से ज्यादा मौतें दुनिया में सबसे तेजी से विकास कर रही अर्थव्यवस्थाओं वाले देश चीन और भारत में होती हैं। एक नए अध्ययन में यह बात सामने आई है। अमेरिका, कनाडा, चीन और भारत के वैज्ञानिकों ने अमेरिकन एसोसिएशन फॉर दि एडवांसमेंट आॅफ साइंस (एएएएस) में अपना अध्ययन पेश किया, जिसमें कहा गया कि वायु प्रदूषण जनित बीमारियों के कारण 2013 में चीन में 16 लाख, जबकि भारत में 14 लाख लोगों की मौत हुई।

यूनिवर्सिटी ऑफ ब्रिटिश कोलंबिया के शोधकर्ता माइकल ब्राउर ने कहा, ‘वायु प्रदूषण दुनिया भर में मौत का चौथा सबसे बड़ा खतरनाक कारक है और इस समय बीमारियों को पर्यावरण संबंधी सबसे बड़ा खतरा है।’ केवल उच्च रक्तचाप, खराब खानपान और धूम्रपान के कारण वायु प्रदूषण की तुलना में ज्यादा मौतें होती हैं। उन्होंने संवाददाता सम्मेलन में अध्ययन की जानकारी देते हुए कहा, ‘दुनिया की 85 प्रतिशत से ज्यादा आबादी उन इलाकों में रहती है, जहां वायु प्रदूषण के विश्व स्वास्थ्य संगठन के सुरक्षित स्तर से ज्यादा वायु प्रदूषण है।’

अध्ययन में 1990 से 2013 के बीच 188 देशों में स्वास्थ्य और वायु प्रदूषण जैसे खतरनाक कारकों का विश्लेषण किया गया। इसमें कहा गया कि दुनिया के सबसे ज्यादा आबादी वाले देश चीन और भारत में वायु सबसे ज्यादा दूषित है। चीन में वायु प्रदूषण का सबसे बड़ा कारण कोयला जलने से उत्सर्जित होने वाले कण हैं। इसके कारण वहां हर साल 3,60,000 मौतें होती हैं। भारत में इसका कारण खाना पकाने और गर्मी पैदा करने के लिए लकड़ी, गोबर, खूंट और दूसरी चीजें जलाना है।

अध्ययन के अनुसार घरों के भीतर इस तरह पैदा होने वाला प्रदूषण बाहरी प्रदूषण से कहीं ज्यादा जानलेवा है। अध्ययन दल ने भारत के व्यापक आर्थिक रुझान को देखते हुए कहा कि देश में भविष्य में वायु गुणवत्ता और खराब होने का खतरा है। वैज्ञानिकों ने आगाह किया कि समस्या से निपटने के लिए दुनिया भर में और ज्यादा उपाय न किए गए तो अगले 20 सालों में मौत का आंकड़ा और बढ़ सकता है। ब्राउर ने कहा, ‘एशिया में बड़ी आबादी वाले देश हैं, जहां भीषण प्रदूषण है। आप भारत, बांग्लादेश और पाकिस्तान में रुझान देखें, जहां वायु गुणवत्ता खराब होती जा रही है। चीन में भले ही चीजें स्थिर हो गई हों, लेकिन वायु प्रदूषण काफी ज्यादा है।’ उन्होंने कहा, ‘साथ ही इन देशों में लोगों की उम्र बढ़ रही है, इसलिए दिल और फेफड़े की बीमारी, कैंसर जैसी वायु प्रदूषण से प्रभावित होने वाली गंभीर बीमारियों की व्यापकता है।’

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