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डोकलाम पर चीन का अड़ियल रवैया, कहा-पहले सेना हटाओ फिर होगी बातचीत

विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता लु कांग ने कहा, "इस मुद्दे का समाधान, जैसा विदेश मंत्री ने सुझाया है, यही है कि भारत अपने सैनिकों को बिना शर्त वापस बुलाए और दोनों देशों के बीच किसी सार्थक वार्ता के लिए यह पूर्व शर्त है।

भारत और चीन के बीच 3,488 किलोमीटर लंबी सीमा है। (Source: PTI)

बीजिंग में ब्रिक्स देशों के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकारों (एनएसए) की बैठक में भाग लेने के लिए भारतीय एनएसए अजीत डोभाल के यहां पहुंचने से पहले चीन ने बुधवार को स्पष्ट किया कि सीमा गतिरोध मुद्दे पर बातचीत की यह ‘पूर्वशर्त’ है कि भारत अपने सैनिकों को डोकलाम से वापस बुला ले। विदेश मंत्रालय ने कहा है कि विदेश मंत्री वांग यी की टिप्पणी ‘आधिकारिक’ है। वांग यी ने मंगलवार को सीमा विवाद के लिए भारत को जिम्मेदार ठहराया था और उसे अपने सैनिकों को वापस बुलाने के लिए कहा था।विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता लु कांग ने कहा, “इस मुद्दे का समाधान, जैसा विदेश मंत्री ने सुझाया है, यही है कि भारत अपने सैनिकों को बिना शर्त वापस बुलाए और दोनों देशों के बीच किसी सार्थक वार्ता के लिए यह पूर्व शर्त है।”डोभाल बीजिंग में आयोजित दो दिवसीय ब्रिक्स एनएसएस बैठक में गुरुवार को शिरकत करेंगे।भारत तथा चीन के बीच सीमा विवाद के बीच यह बैठक बेहद अहम मानी जा रही है।यह हालांकि स्पष्ट नहीं हुआ है कि डोभाल बैठक से इतर चीन के शीर्ष राजनयिक यांग जेची से मुलाकात करेंगे या नहीं।

सोमवार को एक संपादकीय में कहा गया कि भारत को डोभाल के दौरे से यह उम्मीद नहीं लगानी चाहिए कि सीमा गतिरोध का समाधान निकल आएगा। चीन ने बार-बार भारत से डोकलाम से अपने सैनिकों को वापस बुलाने के लिए कहा है। डोकलाम को चीन अपना भूभाग मानता है। भारत ने कहा है कि दोनों देशों के सैनिकों को उस जगह से हटना चाहिए, क्योंकि यह उसके सहयोगी देश भूटान का हिस्सा है।भूटान का चीन के साथ कोई कूटनीतिक संबंध नहीं है और उसने डोकलाम में चीन द्वारा सड़क निर्माण का विरोध भी किया है। डोकलाम में चीन, भारत तथा भूटान तीनों देशों की सीमाएं आकर मिलती है और इसका तीनों देशों के लिए रणनीतिक महत्व है। भारतीय सेना ने जून में चीनी सैनिकों द्वारा इस इलाके में सड़क निर्माण पर रोक लगा दी थी, जिसके कारण दोनों देशों के सैनिकों के बीच ठन गई थी। डोकलाम में दोनों देशों के सैनिकों के बीच गतिरोध का यह दूसरा महीना है।

हालांकि जब चीन के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता लु कांग से ये पूछा गया कि क्या दोनों देशों ने डोकलाम में विवादास्पद जगह पर 3 हजार से ज्यादा सैनिक तैनात कर रखा है तो उन्होंने इस सवाल का जवाब देने से इनकार कर दिया। लु कांग ने पत्रकारों से कहा कि ये सवाल चीन के रक्षा मंत्रालय से पूछी जानी चाहिए।

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