अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप 15 मई को अपने चीन दौरे से वापस लौट चुके हैं, अब रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन चीन के दौरे पर बीजिंग पहुंचेंगे। रूस और चीन ने इसकी पुष्टि कर दी है। साउथ चाइना मॉर्निंग पोस्ट के मुताबिक, रूस के राष्ट्रपति 19 और 20 मई के बीच चीनी दौरे पर रहेंगे। चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने व्लादिमीर पुतिन को निमंत्रण भेजा था।
इस साल यह पुतिन की पहली विदेश यात्रा होगी। इस यात्रा के दौरान पुतिन और शी जिनपिंग यूक्रेन से युद्ध खत्म करने और परमाणु हथियार नियंत्रण समझौते को लेकर चर्चा कर सकते हैं। पुतिन यहां प्रधानमंत्री ली कियांग से भी अलग से मिलेंगे। इस मुलाकात में व्यापार और आर्थिक सहयोग पर चर्चा होगी।
पुतिन का दौरा ट्रंप से कहीं अधिक अहम- चीनी मीडिया
यह दौरा चीनी मीडिया चर्चा का केंद्र बना हुआ है, मीडिया ने इस दौरे को ट्रंप के दौरे से अधिक महत्वपूर्ण बताया है। साउथ चाइना मॉर्निंग पोस्ट ने कहा कि ट्रंप का दौरा ज्यादा औपचारिक था जबकि रूसी राष्ट्रपति पुतिन का दौरा इससे कहीं अधिक गंभीर और रणनीतिक मुद्दों पर केंद्रित रहेगा।
रूसी राष्ट्रपति भवन क्रेमलिन ने एक बयान में कहा, “इस यात्रा के दौरान व्लादिमीर पुतिन और शी जिनपिंग इस बात पर चर्चा करेंगे कि रूस और चीन के बीच कैसे व्यापक साझेदारी और रणनीतिक सहयोग को और मजबूत किया जाए।”
बयान में यह भी कहा गया कि दोनो नेताओं से प्रमुख अंतरराष्ट्रीय और क्षेत्रीय मुद्दों पर विचारों का आदान-प्रदान करने और वार्ता के समापन पर एक साझा घोषणापत्र पर साइन करने की उम्मीद है। क्रेमलिन ने शुक्रवार को कहा कि पुतिन की इस साल की पहली विदेश यात्रा की तैयारियां पूरी हो चुकी हैं।
फरवरी में शी जिनपिंग ने दिया था निमंत्रण
क्रेमलिन के अनुसार, दोनों देशों के नेता सिर्फ औपचारिक कूटनीति नहीं, बल्कि लगातार निजी बातचीत भी करते रहते हैं। फरवरी 2026 में हुई वीडियो कॉन्फ्रेंसिग में शी जिनपिंग ने पुतिन को चीन आने का निमंत्रण दिया था, जिसे पुतिन ने तुरंत स्वीकार कर लिया।
पुतिन अपने कार्यकाल में अब तक चीन की 20 से अधिक यात्राएं कर चुके हैं और शी जिनपिंग से 40 से अधिक बार मिल चुके हैं। इधर 2013 में चीन का राष्ट्रपति बनने के बाद शी जिनपिंग ने अपनी पहली विदेश यात्रा रूस की ही की थी।
पुतिन की यह यात्रा अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की चीन यात्रा के तीन दिन बाद ही हो रही है। अमेरिका और रूस के इन दौरों को लेकर जानकारों का मानना है कि चीन एक साथ अमेरिका और रूस को लेकर चलने की कोशिश कर रहा है।
दोनों देशों के बीच कारोबार बढ़ा
अमेरिका को लेकर साझा चिंता के कारण रूस और चीन ने पिछले कुछ सालों में अपने रिश्ते काफी बेहतर किए हैं। दोनों देशों के बीच रक्षा, विदेश नीति, कानून व्यवस्था और आर्थिक विकास जैसे मुद्दों पर लगातार उच्च स्तरीय बैठकें होती रही हैं।
यूक्रेन के साथ रूस की जंग शुरू होने के बाद चीन और रूस के बीच कारोबार तेजी से बढ़ा है। चीन ने रूस से तेल, कोयला और गैस की खरीद बढ़ाई है। वहीं, चीन रूस को कार, इलेक्ट्रॉनिक्स और दूसरी बड़ी वस्तुएं भी निर्यात कर रही है।
आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, पिछले साल दोनों देश के बीच व्यापार 228.1 अरब अमेरिकी डॉलर तक पहुंच गया। रूस को इसमें 21.49 अरब डॉलर का ट्रेड सरप्लस मिला, जो 2024 के मुकाबले 55 फीसदी अधिक है।
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अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप चीन के दौरे से वापस लौट गए, लेकिन जाते-जाते उन्होंने वह काम किया जिसकी चर्चा अब पूरे सोशल मीडिया पर हो रही है। दरअसल ट्रंप इस उम्मीद से आए थे कि चीन के साथ व्यापार और वहां से दुर्लभ खनिजों पर कोई ठोस समझौता हासिल कर लेंगे। पूरी खबर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें
