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Chinese Apps Ban के बाद लोग पूछ रहे सवाल- 40 फीसदी चीनी हिस्सेदारी वाली पेटीएम जैसी कंपनियों का क्या

वरिष्ठ पत्रकार बरखा दत्त ने कहा कि हम 70 फीसदी दवा थोक में चीन से आयात करते हैं। ये वास्तविकता है कि हमने किस तरह से चीन को घुसपैठ करनी दी। पाकिस्तान आतंकियों को भेजकर ऐसा करता है।

Chinese Apps, tiktokटिकटॉक को भारत में बैन कर दिया गया है। (Express photo: Sneha Saha)

केंद्र सरकार ने अलग अलग तरीके के 59 मोबाइल एप को देश की संप्रभुता, अखंडता और राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए पूर्वाग्रह रखने वाला बताते हुए उन पर प्रतिबंध लगा दिया, जिसमें चीन के एप टिकटॉक, शेयरइट और वीचैट जैसे एप भी शामिल हैं। एप पर प्रतिबंध लगने पर लोग अलग-अलग तरह से प्रतिक्रिया दे रहे हैं। इसी कड़ी में कांग्रेस प्रवक्ता पद से हटाए गए संजय झा ने प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने ट्वीट कर पूछा कि क्या केंद्र सरकार पेटीएम पर भी बैन लगाएगी? उन्होंने कहा, ‘पेटीएम में चालीस फीसदी हिस्सेदारी चीनी कंपनी अलीबाबा की है। पेटीएम के 15 करोड़ यूजर हैं।’

वरिष्ठ पत्रकार बरखा दत्त ने कहा कि हम 70 फीसदी दवा थोक में चीन से आयात करते हैं। ये वास्तविकता है कि हमने किस तरह से चीन को घुसपैठ करनी दी। पाकिस्तान आतंकियों को भेजकर ऐसा करता है। बता दें कि चीन के 59 एप्स पर प्रतिबंध लगाने के सरकार के फैसले को व्यापारियों के संगठन कैट और घरेलू सोशल मीडिया एप शेयरचैट सहित विभिन्न क्षेत्रों से समर्थन भी मिला है। कन्फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स (कैट) ने कहा कि 59 मोबाइल ऐप पर प्रतिबंध लगाने का फैसला उसके ‘चीन के सामान का बहिष्कार’ अभियान के लिए एक बड़ा समर्थन है।

Chinese Apps Banned in India Live Updates

कैट के महासचिव प्रवीण खंडेलवाल ने एक बयान में कहा, ‘‘इस अभूतपूर्व कदम से कैट के ‘चीन का बहिष्कार’अभियान को मजबूत करने में काफी मदद मिलेगी। चीन का बहिष्कार आंदोलन अब वास्तव में एक राष्ट्रीय वास्तविकता है और भारत के सात करोड़ व्यापारी केंद्र सरकार के साथ एकजुटता से खड़े हैं।’’ शेयरचैट के निदेशक (सार्वजनिक नीति) बर्जेस मालू ने भी इस कदम का स्वागत किया। उन्होंने कहा, ‘‘गोपनीयता, साइबर सुरक्षा और राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए गंभीर जोखिम बन चुके प्लेटफार्मों के खिलाफ सरकार का यह फैसला स्वागत योग्य है। हमें उम्मीद है कि सरकार भारतीय स्टार्टअप पारिस्थितिकी तंत्र को अपना समर्थन जारी रखेगी।’’

उल्लेखनीय है कि आईटी मंत्रालय ने सोमवार (29 जून, 2020) को जारी एक आधिकारिक बयान में कहा कि उसे विभिन्न स्रोतों से कई शिकायतें मिली हैं, जिनमें एंड्रॉइड और आईओएस प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध कुछ मोबाइल एप के दुरुपयोग के बारे में कई रिपोर्ट शामिल हैं। इन रिपोर्ट में कहा गया है कि ये एप ‘‘उपयोगकर्ताओं के डेटा को चुराकर, उन्हें भारत के बाहर स्थित सर्वर को अनधिकृत तरीके से भेजते हैं।’’ बयान में कहा गया, ‘‘भारत की राष्ट्रीय सुरक्षा के प्रति शत्रुता रखने वाले तत्वों द्वारा इन आंकड़ों का संकलन, इसकी जांच-पड़ताल और प्रोफाइलिंग, आखिरकार भारत की संप्रभुता और अखंडता पर आधात है, यह बहुत अधिक चिंता का विषय है, जिसके लिए आपातकालीन उपायों की जरूरत है।’’

गृह मंत्रालय के तहत आने वाले भारतीय साइबर अपराध समन्वय केंद्र ने इन दुर्भावनापूर्ण एप्स पर व्यापक प्रतिबंध लगाने की सिफारिश भी की थी। बयान में कहा गया है, ‘‘इनके आधार पर और हाल ही में विश्वसनीय सूचनाएं मिलने पर कि ऐसे ऐप भारत की संप्रभुता और अखंडता के लिए खतरा हैं, भारत सरकार ने मोबाइल और गैर-मोबाइल इंटरनेट सक्षम उपकरणों में उपयोग किए जाने वाले कुछ एप के इस्तेमाल को बंद करने का निर्णय लिया है।’’ बयान में कहा गया है कि यह कदम ‘‘करोड़ों भारतीय मोबाइल और इंटरनेट उपयोगकर्ताओं के हितों की रक्षा करेगा। यह निर्णय भारतीय साइबरस्पेस की सुरक्षा और संप्रभुता सुनिश्चित करने की दिशा में एक कदम है।’’ (एजेंसी इनपुट)

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