अफगानिस्तान और पाकिस्तान के बीच छिड़े युद्ध से दोनों देशों को भारी नुकसान हुआ है। अफगानिस्तान ने दावा किया है कि उसने पाकिस्तान के 55 सैनिकों को मार गिराया, वहीं पाकिस्तान की ओर से भी जवाबी कार्रवाई में बड़े नुकसान के दावे सामने आए हैं।
इन दावों के बीच एक बड़ा सवाल उठ रहा है- आखिर सैन्य रूप से ज्यादा मजबूत कौन है? पाकिस्तान या अफगानिस्तान? किसकी सेना, हथियार और रणनीतिक स्थिति ज्यादा प्रभावशाली है?
सैन्य ताकत: संख्या में कौन आगे?
आंकड़ों के अनुसार, पाकिस्तान के पास लगभग 6,70,000 सक्रिय सैनिक हैं। इनमें करीब 5,60,000 से अधिक थलसेना में, लगभग 70,000 वायुसेना में और 30000 नौसेना में तैनात हैं। वहीं, तालिबान शासित अफगानिस्तान की सशस्त्र सेनाओं की अनुमानित संख्या लगभग 1,72,000 के करीब मानी जाती है। प्रशिक्षण और औपचारिक सैन्य अनुभव के मामले में पाकिस्तान की सेना को बढ़त हासिल है। हालांकि, अफगानिस्तान के लड़ाकों को दशकों से जारी संघर्षों का अनुभव है, जिससे वे जमीनी लड़ाई में दक्ष माने जाते हैं।
पाकिस्तान VS अफगानिस्तान
टैंक और जमीनी हथियार
पाकिस्तान के पास लगभग 6,000 से अधिक टैंक और बख्तरबंद वाहन बताए जाते हैं। इसके मुकाबले अफगानिस्तान के पास मुख्य रूप से सोवियत दौर के पुराने टैंक और सीमित बख्तरबंद वाहन हैं।
वायुसेना में बड़ा अंतर
पाकिस्तान की वायुसेना अपेक्षाकृत मजबूत मानी जाती है। उसके पास लगभग 465 लड़ाकू विमान और 260 से अधिक हेलीकॉप्टर हैं। इसके विपरीत, अफगानिस्तान के पास वर्तमान में कोई संगठित और सक्रिय वायुसेना नहीं है। तालिबान के पास सीमित संख्या में, लगभग 20–25 हेलीकॉप्टर होने की जानकारी सामने आती है, लेकिन उनकी परिचालन क्षमता सीमित मानी जाती है।
परमाणु शक्ति
परमाणु क्षमता के मामले में पाकिस्तान को स्पष्ट बढ़त प्राप्त है। पाकिस्तान एक परमाणु शक्ति संपन्न देश है और उसके पास अनुमानित रूप से करीब 170 परमाणु हथियार हैं। अफगानिस्तान के पास कोई परमाणु हथियार नहीं है।
रक्षा बजट
पाकिस्तान का रक्षा बजट वर्ष 2025–26 के लिए लगभग 9 अरब डॉलर बताया गया है, जो पिछले वित्त वर्ष की तुलना में करीब 20 प्रतिशत अधिक है। अफगानिस्तान का रक्षा बजट इससे काफी कम है और उसकी सैन्य संरचना मुख्य रूप से सीमित संसाधनों पर निर्भर है।
तालिबान की रणनीतिक बढ़त
हालांकि पारंपरिक सैन्य ताकत में पाकिस्तान आगे दिखता है, लेकिन एक महत्वपूर्ण पहलू ऐसा है जहां तालिबान को बढ़त मिलती है। अफगानिस्तान का भौगोलिक क्षेत्र पहाड़ी और दुर्गम है। तालिबान लड़ाके इन पहाड़ों और स्थानीय परिस्थितियों से भली-भांति परिचित हैं। वे गुरिल्ला युद्ध में माहिर माने जाते हैं और सीमित संसाधनों के बावजूद जमीनी स्तर पर कड़ी चुनौती दे सकते हैं। ऐसे में किसी भी संभावित संघर्ष में भौगोलिक परिस्थितियां और युद्ध की शैली महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती हैं।
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