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अफगानिस्तान संसदीय चुनाव: आतंकी हमले में 67 लोगों की मौत, 126 घायल

तालिबान का कहना था कि जो लोग चुनाव में शामिल होंगे वे जान से हाथ धो बैठेंगे। बावजूद आतंकी धमकियों के लोगों ने बढ़चढ़कर मतदान में हिस्सा लिया। तालिबान ने सुरक्षाबलों और मतदान केंद्रों के खिलाफ 193 हमलों को अंजाम दिया, जिसमें कम से कम 67 लोग मारे गए। मारे गए लोगों में 27 आम नागरिक, 9 सुरक्षाबलों के जवान और 31 विद्रोही थे।

शनिवार (20 अक्टूबर) को अफगानिस्तान के संसदीय चुनाव में आतंकियों के द्वारा अंजाम दी गई हिंसा से बेखौफ रहकर लोगों ने मतदान में बढ़चढ़कर हिस्सा लिया। (Image Source: REUTERS)

अफगानिस्तान में तीन वर्षों की देरी से हुए संसदीय चुनाव में 67 लोग हिंसा की बलि चढ़ गए और कम से कम 126 लोग घायल बताए जा रहे हैं। मतदान शनिवार (20 अक्टूबर) को हुआ। आतंकवादी संगठन तालिबान लगातार लोगों को मतदान में शामिल न होने की धमकी दे रहा था। तालिबान का कहना था कि जो लोग चुनाव में शामिल होंगे वे जान से हाथ धो बैठेंगे। बावजूद आतंकी धमकियों के लोगों ने बढ़चढ़कर मतदान में हिस्सा लिया। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक तालिबान ने सुरक्षाबलों और मतदान केंद्रों के खिलाफ 193 हमलों को अंजाम दिया, जिसमें कम से कम 67 लोग मारे गए। मारे गए लोगों में 27 आम नागरिक, 9 सुरक्षाबलों के जवान और 31 विद्रोही थे। अफगानिस्तान के डिप्टी इंटीरियर मिनिस्टर अख्तर मोहम्मद इब्राहिमी ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में बताया कि शनिवार को सुबह 7 बजे से शाम को 6 बजे तक चलने वाले संसदीय मतदान को निशाना बनाने की तालिबान ने धमकी दी थी। हमलों में काबुल में अंजाम दिया गया आत्मघाती हमला भी शामिल है।

मतदान केंद्रों पर तालिबान ने छापेमारी की और उनके पास दर्जनों बम धमाके किए। तालिबानी आतंकियों और अफगान सुरक्षाबलों के बीच सशस्त्र लड़ाई भी हुई। इब्राहिमी ने बताया कि हमलों में 27 नागरिक मारे गए और 100 के करीब घायल हो गए, जबकि सुरक्षाबलों के कम से कम 9 जवान मारे गए और 25 घायल हो गए। इब्राहिमी के मुताबिक जवाब में 31 तालिबानी मारे गए और 18 गिरफ्तार किए गए हैं। डिप्टी इंटीरियर मिनिस्टर ने बताया कि शनिवार को हुए हमले 2014 में कराए हुए राष्ट्रपति चुनाव में हुए हमलों की संख्या से आधे थे। राष्ट्रपति के प्रवक्ता हारुन चखनसोरी ने बताया कि हिंसा के बावजूद मतदान सफल रहा और यह आतंकवादियों की हार है। अफगानिस्तान के इंटीरियर मिनिस्टर के मुताबिक शनिवार के चुनाव के लिए 70 हजार सैनिकों और पुलिस के जवानों को तैनात किया गया था।

तालबान ने धमकी दी थी कि सभी मतदान केंद्रों को निशाना बनाया जाएगा। तालिबान के प्रवक्ता जबीहुल्ला मुजाहिद ने एक बयान में कहा, ”देश भर में दुश्मनों के मतदान केंद्र मुजाहिदीन के द्वारा किए जाने वाले हमलों की जद में हैं, देशवासियों को इस फर्जी प्रक्रिया में शामिल होने से बचना चाहिए और दुश्मन की बुरी योजनाओं को लागू होने में उसकी कठपुतली नहीं बनना चाहिए।” एक और तालिबानी प्रवक्ता कारी अहमदी यूसुफ ने दावा किया कि 400 हमले किए गए, जिनमें दर्जनों सैनिक और पुलिवाले मारे गए और चुनाव असफल रहा। बता दें कि पहले संसदीय चुनाव 2015 में कराए जाने की योजना थी लेकिन सुरक्षा चुनौतियों और राजनीतिक और आर्थिक अस्थिरता के कारण इसमें तीन साल की देरी हुई।

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