अफगानिस्तानः तालिबान की नई सरकार का ऐलान, मुल्ला हसन अखुंद होंगे पीएम

चीफ ऑफ आर्मी स्टाफ का जिम्मा कारी फसीहउद्दीन को मिला है। इनके नेतृत्व में ही तालिबान ने पंजशीर की लड़ाई लड़ी और जीती। उन्हें एक बेहतरीन कमांडर के तौर पर शुमार किया जाता है। पंजशीर जैसी कठिन लड़ाई को जीतने पर उन्हें ये जिम्मा दिया गया है।

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मुल्ला मोहम्मद हसन अखुंद के नेतृत्व में बनी अफगानिस्तान सरकार। (फोटोः ट्विटर@DailyRahnuma)

तालिबान ने अपनी सरकार का ऐलान कर दिया है। मुल्ला मोहम्मद हसन अखुंद को मंत्रि परिषद का प्रमुख यानी नई सरकार का मुखिया बनाया गया है। तालिबान का कहना है कि अभी एक केयरटेकर कैबिनेट सरकार चलाएगी। सरकार गठन ता समारोह बुधवार को होने की उम्मीद है। इस सरकार में दो डिप्टी पीएम बनाए गए हैं। मुल्ला बरादर और अब्दुल सलाम हनाफी ये जिम्मेदारी संभालेंगे। सिराजुद्दीन हक्कानी गृह मंत्री होंगे। जबकि रक्षा मंत्री मोहम्मद याकूब मुजाहिद होंगे।

नई सरकार के वित्त मंत्री मुल्ला हिदायतुल्ला बदरी, विदेश मंत्री मौलवी आमिर खान मुतक्की, शिक्षा मंत्री शेख मौलवी नूरुल्ला मुनीर, शरणार्थी मामलों के मंत्री खलीलउर्रहमान हक्कनी, उप विदेश मंत्री शेर मोहम्मद स्टेनेकजई, संस्कृति मंत्रालय के उप मंत्री जबीउल्लाह मुजाहिद होंगे। चीफ ऑफ आर्मी स्टाफ का जिम्मा कारी फसीहउद्दीन को मिला है। इनके नेतृत्व में ही तालिबान ने पंजशीर की लड़ाई लड़ी और जीती। ये ताजिक मूल के तालिबान कमांडर हैं। सेना प्रमुख मुल्ला फजल अखुंद होंगे। डिप्टी चीफ ऑफ इंटेलिजेंस मुल्ला ताज मीर जवाद होंगे।

नेशनल डायरेक्टोरेट ऑफ सिक्यूरिटी (NDS) का चीफ मुल्ला अब्दुल हक वासिक को बनाया गया है। उधर, अफगानिस्तान में तालिबान की सरकार बनने से ठीक पहले तुर्की के विदेश मंत्री यूसुफ एरिम ने कहा- हमारी दुनिया को यही सलाह है कि वो तालिबान की सरकार को मान्यता देने में किसी तरह की जल्दबाजी न करें।

हक्कानी नेटवर्क के डिप्टी लीडर सिराजुद्दीन हक्कानी और उसके छोटे भाई अनस हक्कानी हैबतुल्लाह अखुंदजादा की उम्मीदवारी के विरोध में थे। दोनों मुल्ला अब्दुल गनी बरादर को भी काबुल में तालिबान सरकार का मुखिया मानने को तैयार नहीं थे। तालिबान के सुप्रीम लीडर को चुनने में देर इसी वजह से हुई। हक्कानी को पाकिस्तान का समर्थन मिल रहा था। सूत्रों का कहना है कि मुल्ला हसन अखुंद कंधार में रहेंगे और काबुल में तालिबान की सरकार के मुखिया के तौर पर मुल्ला अब्दुल ग़नी बरादर और मुल्ला अब्दुल सलाम काम करेंगे।

धार्मिक नेता पर यूएन की टेरर लिस्ट में शामिल

मुल्ला हसन अखुंद का नाम यूएन की एक टेरर लिस्ट में शामिल है। 2010 में उन्हें बंदी भी बनाया गया था। यूएन के मुताबिक मुल्ला हसन अखुंद तालिबान के 30 ओरिजिनल सदस्यों में हैं। अखुंद अफगानिस्तान की पिछली सरकारों में बड़े पदों पर रहे हैं। जब मुल्ला मोहम्मद रब्बानी अखुंद मुल्क के प्रधानमंत्री थे, उस समय मुल्ला हसन अखुंद पहले विदेश मंत्री और उसके बाद उप प्रधानमंत्री की ज़िम्मेदारी संभाल चुके हैं। वह कंधार के गवर्नर और 2001 में मंत्री परिषद के उप-प्रधान भी थे।

अखुंद पख्तून मूल के हैं और इनकी रिहाइश कंधार की है। वह तालिबान के फाउंडर मेंबर हैं। एक फौजी कमांडर से ज़्यादा इनका नाम एक धार्मिक नेता के रूप में है। पाकिस्तान के मदरसों में पढ़ाई करने वाले अखुंद को लो-प्रोफाइल नेता के रूप में देखा जाता है। अखुंद पश्चिमी सभ्यता और कई मुजाहिद धड़ों को पसंद नहीं करते। तालिबान और क्वेटा शूरा के बाहर इन्हें बहुत ज़्यादा लोग नहीं जानते।

फसीहउद्दीन को मिला पंजशीर जीतने का इनाम

चीफ ऑफ आर्मी स्टाफ का जिम्मा कारी फसीहउद्दीन को मिला है। इनके नेतृत्व में ही तालिबान ने पंजशीर की लड़ाई लड़ी और जीती। ये ताजिक मूल के तालिबान कमांडर हैं। उन्हें एक बेहतरीन कमांडर के तौर पर शुमार किया जाता है। पंजशीर जैसी कठिन लड़ाई को जीतने पर उन्हें ये जिम्मा दिया गया है। तालिबान का मानना है कि सेना की अगुवाई उनसे बेहतर कोई और नहीं कर सकता।

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