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रिसर्च में दावा, आने वाले दिनों में खतरनाक हो सकती है हवाई यात्रा

जानकारों के अनुसार आधुनिक यात्री विमान 10 से 12 किलोमीटर की ऊंचाई पर उड़ते हैं। विशेषज्ञ मानते हैं कि इस ऊंचाई पर कार्बन डाय ऑक्साइड की अधिकता का तापमान पर गहरा असर पड़ता है।

तस्वीर का इस्तेमाल प्रतीकात्मक तौर पर किया गया है।

दुनिया भर के वैज्ञानिकों के मुताबिक आने वाले दिनों में हवाई सफर करने में खतरा बढ़ सकता है। अपने इस दावे के पीछे उनका तर्क है कि अब जलवायु परिवर्तन का असर 12 हजार मीटर की ऊंचाई पर भी दिखने लगा है। हाल के दिनों में इसके संकेत भी दिखने लगे हैं। कुछ वक्त पहले की ही बात है जब यूनाइटेड एयरलाइंस की फ्लाइट 880 लंदन पहुंचने ही वाली थी कि हवा के तेज झटकों ने विमान के अंदर अफरा तफरी मचा दी। लोग थोड़ा संभल पाते तभी झटके अतने तेज हो गए कि कुछ लोग तो विमान की छत से टकरा कर घायल भी हो गए।

एक्सपर्ट्स का मानना है कि आने वाले समय में इस तरह के हादसों की संखया में बहुत तेजी से इजाफा हो सकता है। जानी मानी शोध संस्था रॉयल सोसाइटी के रिसर्चर्स की मानें तो साफ आसमान के बावजूद ताकतवर एयर टरब्यूलेंस के वाकये बढ़ेंगे, ऐसा टरब्यूलेंस बिना किसी चेतावनी के आता है। इन रिसर्चर्स का मानना है कि स्ट्रोसोफीयर पर जलवायु परिवर्तन के असर की वजह से ऐसा होगा। बताया जा रहा है कि वातावरण में कार्बन डाय ऑक्साइड बढ़ रही है और इसके चलते झटके भी बढ़ रहे हैं।

जानकारों के अनुसार आधुनिक यात्री विमान 10 से 12 किलोमीटर की ऊंचाई पर आराम से उड़ते हैं। विशेषज्ञ मानते हैं कि इस ऊंचाई पर CO2 की अधिकता का तापमान पर गहरा असर पड़ता है। इस असर के कारण हवा में ना दिखने वाली कई परतें बन जाती हैं। इन अलग अलग परतों में हवा अलग- अलग रफ्तार से बहती है। विमान के पायलटों को ये परतें नजर नहीं आती हैं। जैसे ही विमान इन अलग अलग परतों से गुजरती है उसे झटके लगने शुरू हो जाते हैं।

पिछले 10 सालों में इस तरह के मामलों में घायल होने वासे यात्रियों की संख्या में काफी इजाफा हुआ है। कई शोधों में इस बात की पुष्टी भी हो चुकी है कि पावरफुल टरब्युलेंस के ऐसे मामले लगातार बढ़ते जा रहे हैं और अगर जल्द ही इसपर कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया तो हालात बेहद खतरनाक भी हो सकते हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर हमें इस खतरे से बचना है तो कार्बन डाय ऑक्साइड के उत्सर्जन को किसी भी हाल में कम करना ही होगा।

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