X

सेक्स है या रेप, एक ‘हां’ से होगा फैसला

स्पेन में इस कानून का आधार बना 2016 का एक मामला, जिसमें पांच लोगों को एक लड़की के गैंगरेप के आरोपों से बरी कर दिया गया और शायद उसकी वजह थी रेप के दौरान उस लड़की की चुप्पी।

नहीं। और नहीं का मतलब सिर्फ नहीं। लेकिन यूरोप में रेप और यौन हिंसा को लेकर छिड़ी बहस में अब “नहीं” से ज्यादा अहम “हां” होता जा रहा है। स्पेन में एक नया बलात्कार विरोधी कानून बनाया जा रहा है, जिसमें सेक्स में नहीं से ज्यादा तवज्जो हां को दी गई है। नए कानून के बारे में स्पेन के प्रधानमंत्री पेद्रो सांचेज ने संसद में कहा, “अगर वह ‘नहीं’ कहती है तो इसका मतलब है ‘नहीं’। और अगर वह ‘हां’ नहीं कहती है तो इसका मतलब भी ‘नहीं’ होगा।” यानी कोई लड़की या महिला अगर सेक्स के लिए स्पष्ट तौर पर ‘हां’ नहीं कहती है या फिर चुप रहती है तो इस स्थिति में उसके साथ सेक्स को रेप माना जाएगा। किसी भी यौन संपर्क को उसी स्थिति में रेप नहीं माना जाएगा जब महिला ने उसके लिए स्पष्ट तौर पर सहमति दी हो।

स्पेन में इस कानून का आधार बना 2016 का एक मामला, जिसमें पांच लोगों को एक लड़की के गैंगरेप के आरोपों से बरी कर दिया गया और शायद उसकी वजह थी रेप के दौरान उस लड़की की चुप्पी। अदालत ने पांचों लोगों को बलात्कार की बजाय कम गंभीर समझे जाने वाले अपराध यौन उत्पीड़न का दोषी पाया था। लेकिन इस फैसले के खिलाफ स्पेन में भारी प्रदर्शन हुए। सवाल उठे कि ऐसी घटना को बलात्कार के सिवाय और भला क्या कहा जा सकता है कि जिसमें पांच लोग एक महिला के साथ जबरदस्ती सेक्स कर रहे हैं। यही नहीं, उन्होंने मोबाइल से इस घटना का वीडियो भी बनाया। पुलिस का कहना है कि पूरी घटना के दौरान लड़की शांत खड़ी रही और उसने अपनी आंखें बंद की हुई थीं।

अदालत की सुनवाई के दौरान जिस तरह का ब्योरा सामने आया, उसने स्पेन की जनता को झकझोर दिया। घटना के दौरान लड़की की चुप्पी के कारण गैंग रेप का यह मामला सेक्स के लिए सहमति और असहमति के पेचों में फंस गया। यहीं से रेप को लेकर स्पेन के कानून में बदलाव की मांग उठी, जिसके मुताबिक यौन संपर्क के दौरान हिंसा या धमकी देने पर ही किसी को बलात्कार का दोषी करार दिया जा सकता है। इस तरह अब स्पेन भी जर्मनी, ब्रिटेन और कनाडा जैसे उन चंद देशों में शामिल होने जा रहा है जहां सहमति के बिना सेक्स को अपराध माना जाता है, भले ही उस दौरान शारीरिक हिंसा या धमकी साबित हो या ना हो। स्वीडन में भी पिछले दिनों इसी तरह का कानून पास किया गया गया है। एक जुलाई से लागू हुए स्वीडिश कानून के तहत असहमति से किया गया सेक्स रेप माना जाएगा और इसके लिए अभियोजन पक्ष को सेक्स के दौरान हिंसा या फिर जोर जबरदस्ती को साबित करने की जरूरत नहीं है।

स्पेन में नए बलात्कार कानून से मानवाधिकार संगठन खुश हैं। उन्हें उम्मीद है कि नए कानून से स्पेन में यौन अपराधों को कम करने में मदद मिलेगी, जहां स्थिति अभी खासी चिंताजनक है। 2017 के आंकड़े बताते हैं कि 1.58 लाख महिलाएं पुरूषों के हाथों हिंसा का शिकार हुईं। पिछले साल 33 हजार से ज्यादा लोगों को महिलाओं पर शारीरिक हिंसा और छेड़छाड़ के लिए सजाएं हुईं। सरकार ने लैंगिक हिंसा पर काबू पाने के लिए 1 अरब यूरो का फंड भी बनाया है। मानवाधिकार कार्यकर्ता कहते हैं कि ना सिर्फ यौन हिंसा को रोकने की जरूरत है, बल्कि इसके पीड़ितों को सामाजिक और कानूनी स्तर पर भी मदद मुहैया कराए जाने की जरूरत है।

यौन अपराध और महिलाओं के खिलाफ हिंसा पर पूरी दुनिया में बहस छिड़ी है। #MeToo के जरिए दुनिया भर की बहुत महिलाओं ने यौन उत्पीड़न के अपने अनुभवों को सोशल मीडिया पर सामने रखा है। लेकिन असल चुनौती ऐसे अपराधों को रोकने की है। भारत में भी बलात्कार से जुड़े कानून को सख्त बनाया गया है। बावजूद इसके बलात्कार और यौन हिंसा की खबरें आए दिन सुर्खियां बन रही हैं। अपराधों पर नियंत्रण करने में कानूनों की भूमिका से इनकार नहीं किया जा सकता, लेकिन यौन हिंसा और महिलाओं के खिलाफ हिंसा को रोकने में समाज की बड़ी भूमिका है। भारत जैसे पारंपरिक समाजों में भी स्पेन की ही तरह सहमति और असहमति पर बहस की जरूरत है। स्पेन का प्रस्तावित कानून इसी बहस को आगे बढ़ा रहा है।

  • Tags: International News,
  • Outbrain
    Show comments