ईरान से करीब 6 लाख बैरल कच्चा तेल लेकर आ रहा Eswatini-फ्लैग वाला टैंकर ‘Ping Shun’ गुजरात के वाडीनार पोर्ट पहुंचने से पहले ही अपना रास्ता बदल गया। कमोडिटी डेटा कंपनी Kpler के आंकड़ों के मुताबिक, टैंकर ने अंतिम समय पर अपना रूट बदल लिया। माना जा रहा है कि इसके पीछे पेमेंट से जुड़ी कुछ दिक्कतें हो सकती हैं।
यह टैंकर पहले गुरुवार दोपहर तक वाडीनार पोर्ट पहुंचने का संकेत दे रहा था, लेकिन बाद में इसने अचानक दक्षिण दिशा की ओर मोड़ ले लिया और अपना गंतव्य बदल दिया।
आखिर क्यों बदला गया रूट?
आमतौर पर, प्रतिबंधित तेल ले जाने वाले टैंकर कई बार अपनी असली मंजिल छिपाने के लिए रास्ता बदलते हैं, ताकि निगरानी से बचा जा सके। हालांकि, इस मामले में स्थिति थोड़ी अलग है। पश्चिम एशिया में जारी युद्ध के बीच अमेरिका ने 21 मार्च को एक अहम फैसला लिया था। अमेरिका ने उन टैंकरों पर लगे प्रतिबंधों को अस्थायी तौर पर हटा दिया था, जिनमें पहले से ईरानी तेल लोड था। इसका उद्देश्य वैश्विक बाजार में तेल की आपूर्ति बढ़ाना और बढ़ती कीमतों पर काबू पाना था। ऐसा ही कदम अमेरिका रूस के तेल के मामले में भी उठा चुका है।
इस मामले में यह भी कहा जा रहा है कि अगर टैंकर को चीन ही जाना होता, तो वह शुरुआत से ही अलग रास्ता अपनाता। लेकिन आखिरी समय पर रूट बदलने से कई सवाल खड़े हो गए हैं। जानकारी के मुताबिक, ‘Ping Shun’ टैंकर पर 4 मार्च को ईरान के खार्ग आइलैंड से कच्चा तेल लोड किया गया था। इसका मतलब है कि यह तेल अमेरिकी प्रतिबंधों के दायरे में नहीं आता।
एक्सपर्ट्स को क्या लगता है?
Kpler में मॉडलिंग और रिफाइनिंग के मैनेजर सुमित रितोलिया के मुताबिक, टैंकर का रास्ता बदलने की वजह पेमेंट से जुड़ी समस्या हो सकती है। उन्होंने कहा कि अब सप्लायर्स पहले की तरह 30–60 दिन का क्रेडिट नहीं देते, बल्कि एडवांस या तुरंत भुगतान की शर्तें रखते हैं।
उन्होंने यह भी कहा कि ईरानी तेल के मामलों में बीच रास्ते में टैंकर का गंतव्य बदलना असामान्य नहीं है। लेकिन यह घटना दिखाती है कि अब इस व्यापार में फाइनेंशियल शर्तें और जोखिम पहले से ज्यादा अहम हो गए हैं। अगर पेमेंट से जुड़ी समस्या समय रहते सुलझ जाती है, तो यह तेल भारत की किसी रिफाइनरी तक भी पहुंच सकता है।
हालांकि, ईरान के साथ व्यापार में एक बड़ी चुनौती उसकी बैंकिंग व्यवस्था भी है। ईरान और उसके बैंक अभी भी SWIFT (सोसाइटी फॉर वर्ल्डवाइड इंटरबैंक फाइनेंशियल टेलीकम्युनिकेशन) सिस्टम से बाहर हैं। यह वही नेटवर्क है, जिसके जरिए अंतरराष्ट्रीय भुगतान किए जाते हैं। ऐसे में दुनिया के ज्यादातर बैंक और वित्तीय संस्थान ईरान के साथ लेन-देन करने से बचते हैं।
ईरान और चीन का व्यापार
वहीं, चीन की ओर ईरानी तेल का जाना कोई नई बात नहीं है। पिछले कई वर्षों से ईरान के 90% से ज्यादा तेल निर्यात चीन को ही जा रहे हैं। जब अमेरिका ने ईरान पर प्रतिबंधों में ढील दी थी, तब ईरान ने दावा किया था कि उसके पास अतिरिक्त तेल उपलब्ध नहीं है। हालांकि, इंडस्ट्री एक्सपर्ट्स के मुताबिक, उस समय भी करीब 140 से 170 मिलियन बैरल ईरानी तेल समुद्र में मौजूद था, जिसमें कुछ बिक चुका था और कुछ बिक्री के लिए तैयार था।
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