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मलेशिया में फंसे झारखंड के 35 मजदूर

मलेशिया में भारतीय हाई कमिशन को भी मामले की जानकारी दी गई है। मजदूरों को मलेशिया भेजने वाले एजंट और कंपनी के बारे में जानकारी जुटाई जा रही है। करार के मुताबिक, मजदूरी एजंट को मिलेगी।

भारतीय विदेश मंत्री सुषमा स्वराज (फाइल फोटो)

झारखंड के गिरिडीह, बोकारो, सिमडेगा और हजारीबाग समेत कई जिलों के 35 मजदूर महीनों से मलेशिया में फंसे हुए हैं। मजदूरों और उनके परिजनों ने भारत सरकार से वतन वापसी की गुहार लगाई है। वहां काम पर गए लोगों को न तो समय पर वेतन दिया जा रहा है और न लौटने दिया जा रहा है। मलेशिया में उनके कागजात जब्त कर लिए गए हैं। विदेश मंत्रालय ने झारखंड सरकार से इन सभी का ब्योरा मंगाया है। इन मजदूरों में से कुछ के परिजनों ने विदेश मंत्रालय को अपनी व्यथा लिख भेजी है। मलेशिया में भारतीय हाई कमिशन को भी मामले की जानकारी दी गई है। मजदूरों को मलेशिया भेजने वाले एजंट और कंपनी के बारे में जानकारी जुटाई जा रही है। करार के मुताबिक, मजदूरी एजंट को मिलेगी। फिर एजंट मजदूरों को पैसा देंगे। एजंट तय मजदूरी से कम दे रहा था। दूसरी ओर, मजदूरों के दस्तावेज कंपनी ने जब्त कर लिए।

मलेशिया में फंसे मजदूरों में गिरिडीह जिले के मधुबन थाना क्षेत्र के धावाटांड़ अंतर्गत बरियारपुर निवासी विनोद कुमार महतो, बोकारो जिले के चिलगो निवासी राजेन्द्र महतो, विजय कुमार, लोकनाथ रविदास, छोटेलाल सोरेन, गणेश किस्कू, सत्यदेव करमाली, बोकारो के बरकी सिद्धवारा निवासी महेन्द्र महतो, कौलेश्वर रविदास, भीम महतो व सिमडेगा के कैलाश प्रधान शामिल हैं।

सभी मजदूरों के दस माह पहले झारखंड से मलेशिया दलालों के जरिए नौकरी मिली थी। विदेश मंत्रालय को भेजे गए आवेदन में कहा गया कि उन्हें लीड मास्टर इंजीनियरिंग व कंस्ट्रक्शन एसडीएन डॉट बीएचडी कंपनी में काम दिया गया। कंपनी के साइट मैनेजर से जब मजदूरी भुगतान करने की मांग की जाती है तो वे बार-बार पैसे की मांग करने से मना करते हैं और मारपीट की धमकी देते हैं।

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