Turkey Coup: तख्तापलट नाकाम होने के बाद 3,000 सैनिक लिए गए हिरासत में, 2,745 जजों को हटाया गया - Jansatta
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Turkey Coup: तख्तापलट नाकाम होने के बाद 3,000 सैनिक लिए गए हिरासत में, 2,745 जजों को हटाया गया

तुर्की की सेना को उस धर्मनिरपेक्ष राष्ट्र का रक्षक माना जाता है जिसकी स्थापना वर्ष 1923 में मुस्तफा कमाल अतातुर्क ने की थी।

Author अंकारा | July 16, 2016 7:41 PM
सेना के उस गुट ने सरेंडर कर दिया जिसने तख्तापलट की कोशिश की थी।

तुर्की की सेना के अंसतुष्ट सैनिकों के एक गुट की ओर से तख्तापलट की कोशिश को सरकार के वफादार सैनिकों के नाकाम करने के बाद राष्ट्रपति रेसेप तैयप एर्दोगन ने तुर्क नागरिकों से कहा कि वे सड़कों पर जमे रहें। कई घंटों की अफरातफरी और हिंसा के बाद राष्ट्रपति ने इसके बारे में अनश्चितता खत्म की कि वह कहाँ हैं। वह सुबह के समय विमान से इस्तांबुल हवाईअड्डे पहुंचे और सैकड़ों समर्थकों ने उनका स्वागत किया । प्रधानमंत्री बिनाली यिलदीरिम ने कहा कि हालात अब पूरी तरह नियंत्रण में है।  एर्दोगन ने ट्वीट कर आगाह किया कि नए सिरे से कोई हरकत हो सकती है और लोगों से आग्रह किया कि लोग सड़कों पर उतरें।

उन्होंने कहा, ‘‘हमें आज रात सड़कों पर बने रहना चाहिए चाहे कोई भी स्थिति :तख्तापलट की स्थिति: हो क्योंकि नया प्रयास किसी भी समय हो सकता है।’’ कल देर रात सैनिक और टैंक सड़कों पर उतर आए तथा आठ करोड़ की आबादी वाले इस देश के दो सबसे बड़े शहरों अंकारा और इस्तांबुल में सारी रात धमाके होते रहे । तुर्की नाटो का सदस्य है ।
तुर्की के प्रधानमंत्री यिलदीरिम ने देश में तख्तापलट के प्रयास को लोकतंत्र के लिए ‘काला धब्बा’ करार देते हुए कहा कि 161 लोग मारे गए हैं और करीब 3,000 सैनिकों को हिरासत में लिया गया है। उन्होंने कहा कि इसमें 1,440 लोग घायल हुए हैं। वहीं तुर्की के मीडिया के अनुसार देश के करीब 2,745 जजों के उनके काम से हटा दिया गया है।

तख्तापलट की स्थिति को लेकर अनिश्चिततता खत्म होने के साथ ही एर्दोगन की जस्टिस एंड डेवलपमेंट पार्टी :एकेपी: के समर्थकों में उत्साह भर गया। लोग सड़कों में हाथों में झंडा लिए हुए तख्तापलट की कोशिश को पूरी तरह नाकाम करने के लिए सड़कों पर उतर गए।  एर्दोगन ने तख्तापलट के प्रयास की निन्दा की और इसे ‘‘विश्वासघात’’ बताया । उन्होंने कहा कि वह काम कर रहे हैं और ‘‘अंत तक’’ काम करना जारी रखेंगे । उन्होंने हवाईअड्डे पर कहा, ‘‘जो भी साजिश रची जा रही है, वह देशद्रोह और विद्रोह है । उन लोगों को देशद्रोह के इस कृत्य की भारी कीमत चुकानी होगी ।’’ उन्होंने कहा, ‘‘हम अपने देश को उस पर कब्जे की कोशिश कर रहे लोगों के हाथों में नहीं जाने देंगे।’’

वहीं एर्दोगन के आलोचक ने उन पर आरोप लगाया था कि उन्होंने तुर्की की धर्मनिरपेक्ष जड़ों को कमजोर किया है और देश को अधिनायकवाद की ओर ले जा रहे हैं, लेकिन राष्ट्रपति सेना के बीच अपने विरोधियों को मनाने और सेना पर काफी हद तक नियंत्रण रखने में सफल रहे थे। एर्दोगन ने तत्काल इसके लिए ‘समानांतर सरकार’ और ‘पेंसिलवानिया’ को जिम्मेदार ठहराया। उनका इशारा पेंसिलवानिया आधारित फतहुल्ला गुलेन की ओर था। गुलने उनके धुर विरोधी हैं तथा एर्दोगन ने उन पर हमेशा सत्ता से बेदखल का प्रयास करने का आरोप लगाया।
परंतु राष्ट्रपति के पूर्व सहयोगी गुलेन ने इससे इंकार करते हुए कहा कि उनका तख्तापलट की इस कोशिश से कोई लेना देना नहीं है और उन पर आरोप लगाना अपमानजनक है।
यिलदीरिम ने भी तख्तापलट के प्रयास के लिए अमेरिका आधारित तुर्क धर्मगुरू गुलेन को जिम्मेदार ठहराते हुए कहा, ‘‘फतहुल्ला गुलेन एक आतंकवादी संगठन का नेता है। उसके पीछे जो भी देश है वह तुर्की का मित्र नहीं है और उसने तुर्की के खिलाफ गंभीर युद्ध छेड़ रखा है।’’
तुर्की की संसद को भी निशाना बनाया गया और इसमें उसे क्षति भी पहुंची। वहां विशेष सत्र बुलाया गया और जिसका सीधा प्रसारण किया गया। विशेष सुरक्षा बल सैन्य प्रमुख के मुख्यालय की सुरक्षा कर रहे हैं।

तख्तापलट का समर्थन कर रहे बहुत सारे सैनिकों ने इस्तांबुल में बोसफोरस पुल पर आत्मसमर्पण कर दिया । यह पुल सारी रात इन सैनिकों के कब्जे में रहा ।इस्तांबुल में अफरा-तफरी मची रही। बड़ी संख्या में लोग इसका विरोध करते हुए सड़कों पर उतर गए, हालांकि कुछ लोग सैनिकों का स्वागत करते देखे गए। शहर के प्रसिद्ध तकसीम स्क्वायर पर भी सैनिकों ने प्रदर्शनकारियों पर गोली चलाई जिससे अनेक लोग घायल हो गए । ये लोग तख्तापलट के प्रयास का विरोध कर रहे थे । तकसीमा स्क्वायर पर ही तीन साल पहले एर्दोगन के खिलाफ भारी विरोध प्रदर्शन हुआ था।

तकसीम स्क्वायर के ऊपर एक हेलीकॉप्टर उड़ा तो लोगों ने उसका विरोध करते हुए नारेबाजी की। बाद में सैनिकों ने इसे मार गिराया। एक व्यक्ति ने समाचार एजेंसी एएफपी को बताया, ‘‘लोग संभावित सैन्य सरकार से डरे हुए हैं। हममें से ज्यादा लोग सेना में सेवा दे चुके हैं और वे जानते हैं कि सैन्य सरकार का मतलब क्या होगा।’’ राजधानी अंकारा के ऊपर उड़ रहे एफ-16 लड़ाकू विमानों की आवाज से शुक्रवार को देर रात उथल-पुथल मचने का संकेत मिला ।

तुर्की की सेना के एफ-16 लड़ाकू विमानों ने अंकारा में राष्ट्रपति महल के बाहर खड़े विद्रोहियों के टैंकों को निशाना बनाया । संसद पर भी बमबारी की गई । विश्व नेताओं ने शांति का आह्वान किया है । अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा और अन्य पश्चिमी देशों ने सरकार के समर्थन का आग्रह किया जिसके बारे में उन्होंने कहा कि वह लोकतांत्रिक तरीके से चुनी गई है ।पाकिस्तानी प्रधानमंत्री नवाज शरीफ ने तुर्की में तख्तापलट के प्रयास की निंदा करते हुए कहा कि लोकतांत्रिक, शांतिपूर्ण और स्थिर तुर्की में पाकिस्तान का हित है।
तुर्की के निकट सहयोगियों ने एर्दोगन के प्रति अपना समर्थन जताया। ईरान और इस्राइल दोनों के एर्दोगन की सरकार से बहुत अच्छे संबंध नहीं है, लेकिन उन्होंने कल रात के घटनाक्रम की निंदा की है। तुर्की के हालात की वजह से इस्तांबुल हो रही यूनेस्को की विश्व धरोहर बैठक को स्थगित कर दिया गया है।

ब्रिटेन ने तुर्की में मौजूद अपने नागरिकों से कहा है कि वे बाहर नहीं निकलें। ब्रिटिश विदेश मंत्री बोरिस जॉनसन ने कहा कि वह तुर्की के घटनाक्रम से बहुत चिंतित हैं और ब्रिटेन का दूतावास स्थिति पर नजर बनाए हुए है।तुर्की के इस घटनाक्रम से पश्चिम एशियाई क्षेत्र में नयी अस्थिरता पैदा हो गई है । तुर्की सीरिया संघर्ष में एक प्रमुख पक्ष है । तुर्की के सुरक्षा बलों ने शीर्ष सैन्य कमांडर हुलुसी अकार को मुक्त करा लिया है जिनके बंधक बनाए जाने की खबर आई थी। इस्तांबुल के प्रशासन ने अतातुर्क अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे तथा यातायात को खोलने के साथ शहर में स्थिति सामान्य बनाने की कोशिश की।

शुरूआती नाटकीय सैन्य गतिविधियों के बाद तुर्की के सरकारी प्रसारक टीआरटी ने कहा कि उथल-पुथल मचाने वाले सैनिकों ने मॉर्शल लॉ और कर्फ्यू की घोषणा कर दी है । खुद को ‘‘काउंसिल फॉर पीस इन होमलैंड’’ कहने वाले समूह ने इस संबंध में बयान जारी किया । इस समूह ने कहा कि ‘संवैधानिक व्यवस्था, लोकतंत्र, मानवाधिकार और स्वतंत्रता को बहाल करने के लिए तख्तापलट की शुरूआत की गई है तथा देश में कानून की सर्वोच्चता बराकर रहने दें।’

तुर्की में सेना के किसी अधिकारी ने तख्तापलट की कोशिश की जिम्मेदारी नहीं ली है, हालांकि प्रधानमंत्री बिन अली यिलदिरीम ने दावा किया कि तख्तापलट समर्थक एक प्रमुख जनरल मारा गया है। तुर्की की सेना को उस धर्मनिरपेक्ष राष्ट्र का रक्षक माना जाता है जिसकी स्थापना वर्ष 1923 में मुस्तफा कमाल अतातुर्क ने की थी।  सेना ने वर्ष 1960 के बाद से तुर्की में तीन बार तख्तापलट की कोशिश की और वर्ष 1997 में इस्लामी सरकार को बेदखल कर दिया था। तुर्की कुछ लोग तख्तापलट की इस कोशिश का स्वागत कर रहे हैं। तकसीम स्क्वायर पर 27 साल के एक युवक फतह ने कहा, ‘‘तुर्की के लोग आक्रोशित हैं। अब हमें उम्मीद हैं। तुर्की 15 वर्षों से बहुत धु्रवीकरण वाला देश हो गया है। यह सभी के आक्रोश की अभिव्यक्ति है।’’

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