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VIDEO: बेटी के साथ रोज कब्र में सोता है ये पिता, कहा- उसको मौत से डरते हुए नहीं देख सकता

चीन में एक शख्स अपनी बेटी के साथ कब्र में सोने को लेकर इन दिनों चर्चा का विषय बना हुआ है।
कब्र में दो साल की बेटी झांग जिनली के साथ सोते हुए पिता झां लीयोंग। (फोटो सोर्स वीडियो स्क्रीन शॉट)

चीन में एक शख्स अपनी बेटी के साथ कब्र में सोने को लेकर इन दिनों चर्चा का विषय बना हुआ है। दरअसल दक्षिणी चीन के नेजीजांग प्रांत में रहने वाले झां लीयोंग और उनकी पत्नी डेंग की बेटी एक बेटी है, जिसकी उम्र महज दो साल है। दो साल की मासूम झांग जिनली किसी गंभीर बीमारी से ग्रस्त है। इलाज कराने में असमर्थ माता-पिता को ये बात अंदर ही अंदर खाए जा रही है। माता-पिता को डर है कि जब बड़ी होकर उनकी बेटी को इस गंभीर बीमारी के बारे में पता चलेगा तो शायद उसके मन में मौत का डर सताने लगे। वह अपनी बेटी को मौत से डरते हुए नहीं देखना चाहते। बच्ची के माता-पिता का मानना है कि आप जिसे सबसे ज्यादा प्यार करते हैं उसे दुख और दर्द में नहीं देख सकते। खासतौर पर किसी बाप के लिए यह सबसे बुरा वक्त होता है। चाइना गेट न्यूज के अनुसार 24 साल के पिता झां लीयोंग ने अपनी बेटी के मन से इसी डर को निकालने के लिए अनोखा तरीका निकाला है। इसके लिए उन्होंने अपने घर के आंगन में एक कब्र खोदी है और पिता रोज इस कब्र में बेटी के साथ सोते हैं। कभी-कभी दिन में समय मिलने पर भी वो ऐसा ही करते हैं। इस दौरान झांग बेटी को समझाने की कोशिश करते हैं कि जिंदगी में कभी ऐसा भी वक्त आ सकता है जब उसे यहां अकेला रहना पड़े। इसलिए वो घबराए नहीं।

दूसरी तरफ डॉक्टरों की सलाह पर झांग लीयोंग और उनकी पत्नी एक और बच्ची को जन्म देने की तैयारी में है। बताया जा रहा है कि आने वाले बच्चे के कोर्ड ब्लड से जिनली का इलाज किया जाएगा। बता दें कि अभी तक कोर्ड ब्लड को बेकार कहकर फेंक दिया जाता था। जबकि हाल में हुए शोध में ये बात सामने आई है कि इससे गंभीर बीमारियों का इलाज किया जा सकता है। बच्चे के गर्भनाल से निकलने वाले ब्लड को कोर्ड ब्लड कहते हैं। कोर्ड ब्लड में मौजूद स्टेम सेल का उपयोग गंभीर रोगों में किया जा सकता है। वहीं जिनली के माता पिता का कहना है कि वो अपने बच्ची को बचाने के लिए कहीं जाने के लिए तैयार हैं। वह दुनिया के हर उस डॉक्टर से मिलने की कोशिश करेंगे जो उनकी बच्ची की जान बचा सके। सूत्रों के अनुसार बच्ची के माता-पिता की आर्थिक स्थिति भी ठीक नहीं है। इसी लिए वो किसी बड़े में शहर में बच्ची का इलाज कराने के लिए नहीं जा पा रहे।

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