2016 United nations: paris Climate Change Big achievement, Syria massacre problem for world - Jansatta
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2016 में संयुक्त राष्ट्र: पेरिस जलवायु समझौता प्रमुख कामयाबी, सीरिया नरसंहार से दहली दुनिया

अरब जगत में विवाद, शरणार्थी संकट और आतंकवाद का खतरा विश्व निकाय के समक्ष चुनौती बना रहा।

Author संयुक्त राष्ट्र | December 28, 2016 10:03 PM
सीरिया में विद्रोहियों के कब्जे वाले उत्तरपश्चिमी शहर इदलिब के एक बाजार में हवाईहमले के बाद निरीक्षण करते स्थानीय निवासी।(REUTERS/Ammar Abdullah/10 सितंबर, 2016)

भारत ने वर्ष 2016 में पेरिस जलवायु समझौते को प्रभावी करने की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। यह समझौता संरा महासचिव बान की मून के कार्यकाल की एक अहम उपलब्धि है। अरब जगत में विवाद, शरणार्थी संकट और आतंकवाद का खतरा विश्व निकाय के समक्ष चुनौती बना रहा जिसकी कमान अब एंटोनियो गुटेरेस संभालने जा रहे हैं। बान का कार्यकाल 31 दिसंबर को खत्म हो रहा है। यह वर्ष इतिहास में अह्म स्थान रखेगा क्योंकि इसी साल, अपने कार्यकाल के अंतिम वर्ष में बान ने राष्ट्रों से पेरिस समझौते का अनुमोदन करने का आह्वान किया जिसके चलते लंबे समय से लंबित पेरिस जलवायु समझौता लागू हो पाया। इस समझौते का उद्देश्य जलवायु परिवर्तन से निबटना और वैश्विक तापमान को दो डिग्री सेल्सियस से कम रखने की दिशा में प्रयास करना है।

भारत ने इस समझौते का अनुमोदन दो अक्तूबर को, महात्मा गांधी की जयंती पर किया। भारत के इस कदम ने समझौते के प्रभावी होने की राह खोल दी जो चार नवंबर को प्रभावी हुआ। अभूतपूर्व चुनावी चक्र के बाद पुर्तगाल के प्रधानमंत्री और वर्ष 2005 से 2015 के बीच संरा में शरणार्थी मामलों के उच्चायुक्त रहे गुटेरेस को शीर्ष पद के लिए चुना गया। गुटेरेस की नियुक्ति संरा महासभा ने की जिसके साथ ही एक ऐतिहासिक प्रक्रिया का अंत हो गया। नए संरा महासचिव का चयन परंपरागत तौर पर कुछ चुनिंदा विश्व शक्तियों द्वारा बंद दरवाजे के पीछे किया जाता था लेकिन इतिहास में पहली बार इसमें जन चर्चाओं को शामिल किया गया जिसमें हर प्रतिद्वंद्वी शीर्ष पद के लिए एक दूसरे से स्पर्धा कर रहा था।

सदस्य देश और नागरिक समाज संगठनों ने शीर्ष पद के लिए किसी महिला को चुने जाने की वकालत की क्योंकि विश्व निकाय के 71 वर्ष के इतिहास में इस पद पर कोई महिला नहीं रही है। भारत उन चुनिंदा देशो में से था जहां चुनाव से कई महीने पहले गुटेरेस दौरे पर आए थे और नई दिल्ली में विदेश मंत्री सुषमा स्वराज से मिले थे। संरा में भारत के दूत सैय्यद अकबरुद्दीन ने कहा, ‘हम सुरक्षा परिषद में नहीं थे फिर भी उन्होंने संरा से संबंधित मामलों में हमारी भूमिका को समझा और उसकी सराहना की। नवनियुक्त सचिव इस बदलाव से कहीं पहले से भारत के महत्व से परिचित थे।’ जयशंकर ने गुटेरेस को बधाई दी और उन्हें भारत की ओर से सतत विकास, शांति और सुरक्षा जैसे क्षेत्रों में समर्थन का भरोसा दिलाया, उन क्षेत्रों में जहां नवनियुक्त संरा महासचिव अपनी प्राथमिकता के रूप में ध्यान केंद्रित करेंगे। गुटेरेस एक जनवरी से उस विश्व निकाय के शीर्ष अधिकारी का पदभार संभालेंगे जो सीरिया संकट से प्रभावी रूप से नहीं निबट पाने के लिए कड़ी आलोचना का सामना कर रहा है। इस साल संरा में भारत और पाकिस्तान के बीच जुबानी जंग भी हुई। पाकिस्तान ने कश्मीर मुद्दे को संरा के मंच पर जोरशोर से उठाने की कोशिश की लेकिन इसमें उसे किसी भी देश का साथ नहीं मिला। बान ने कश्मीर में हाल के महीनों में नियंत्रण रेखा पर बदतर होते हालात के प्रति चिंता जताई।

संरा महासभा के सालाना सत्र में पाकिस्तान के प्रधानमंत्री नवाज शरीफ ने हिज्बुल मुजाहिदीन के मारे गए आतंकी बुरहान वानी को ‘युवा नेता’ बताया। उनके बीस मिनट के भाषण का ज्यादातर हिस्सा कश्मीर और घाटी के हालात पर आधारित था। इसके जवाब में भारत ने पाकिस्तान को ‘आतंक का गढ़’ बताया। भारत ने कहा कि वह पाकिस्तान को ‘आतंकी देश’ के रूप में देखता है जो अरबों डॉलर का इस्तेमाल, जिसमें से ज्यादातर पैसा अंतरराष्ट्रीय मदद से आता है, आतंकियों को प्रशिक्षण, पैसा और समर्थन देकर पड़ोसी देशों के खिलाफ छद्म आतंकी खड़े करने के लिए करता हैै। जैश ए मोहम्मद प्रमुख मसूद अजहर और मुंबई आतंकी हमले के मास्टरमाइंड जकी उर रहमान लखवी का संदर्भ देते हुए भारत ने कहा कि आतंकी संगठन और उनके नेता, जिनमें से कई को संरा ने आतंकी घोषित किया है, उन्हें सरकार का समर्थन हासिल है और वे पाकिस्तान की सड़कों पर खुले घूम रहे हैं। गुटेरेस के सामने सीरिया संकट भी मुंहबाए खड़ा है जिसकी शुरूआत वर्ष 2011 में हुई थी। सीरिया में 1.35 करोड़ लोगों को मानवीय सहायता की जरूरत है, 63 लाख लोग आंतरिक रूप से विस्थापित हुए हैं और 40 लाख से ज्यादा लोगों को शरणार्थी के तौर पर देश से बाहर ले जाया गया है।

बान ने अपने अंतिम संवाददाता सम्मेलन में कहा था कि सीरिया का नरसंहार पूरी दुनिया की अंतरात्मा को कचोटता रहेगा। गुटेरेस ने लंबे समय से चले आ रहे विवादों का समाधान निकालने और विश्व निकाय में सुधार के लिए व्यक्तिगत रूप से शामिल होने का संकल्प लिया है। संरा के विभिन्न चुनावों में इस साल भारत ने उल्लेखनीय जीत हासिल की। संरा के शांतिरक्षा अभियानों में सैनिक योगदान देने वाला दूसरा सबसे बड़ा देश भारत यौन उत्पीड़न और प्रताड़ना पीड़ितों की मदद के लिए बने ट्रस्ट फंड में 1,00,000 डॉलर का योगदान देने वाला पहला देश भी बन गया। महत्वपूर्ण संरा चुनावों में जीत का सिलसिला कायम करते हुए युवा भारतीय वकील अनिरुद्ध राजपूत ने संरा महासभा में विश्व निकाय की विधि विशेषज्ञों की सर्वोच्च संस्था की सदस्यता हासिल कर ली। शीर्ष भारतीय राजनयिक राजदूत ए गोपीनाथन की संरा प्रणाली की संयुक्त निरीक्षण इकाई में पुन: नियुक्ति हुई। वह एशिया-प्रशांत समूह से इकलौते उम्मीदवार थे। संरा में इस साल दूसरी बार अंतरराष्ट्रीय योग दिवस मनाया गया और विश्व निकाय के मुख्यालय में पहली बार दीपावली भी मनाई गई।

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