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अब तक का सबसे गर्म साल रहा 2015

संयुक्त राष्ट्र की जलवायु एजंसी ने सोमवार को कहा कि 2015 एक बड़े अंतर से अब तक का सबसे गर्म साल रहा। एजंसी ने इसके लिए अल नीनो के प्रभाव और ग्लोबल वॉर्मिंग को जिम्मेदार करार दिया है।

जेनेवा | January 25, 2016 11:33 PM
एजंसी ने इसके लिए अल नीनो के प्रभाव और ग्लोबल वॉर्मिंग को जिम्मेदार करार दिया है। (फाइल फोटो)

संयुक्त राष्ट्र की जलवायु एजंसी ने सोमवार को कहा कि 2015 एक बड़े अंतर से अब तक का सबसे गर्म साल रहा। एजंसी ने इसके लिए अल नीनो के प्रभाव और ग्लोबल वॉर्मिंग को जिम्मेदार करार दिया है। इसकी वजह से भारत सहित दुनिया भर में मौसम में बड़े पैमाने पर बदलाव देखे गए। विश्व मौसम विज्ञान संगठन (डब्लूएमओ) ने कहा है कि 16 सबसे गर्म सालों में से 15 इसी सदी में रहे हैं। 2015 तो 2014 में दर्ज किए गए रिकॉर्ड तापमान से भी बहुत ज्यादा गर्म रहा। दीर्घकालिक प्रवृत्ति को ध्यान में रखते हुए कहा जा सकता है कि 2011-2015 अब तक के सबसे गर्म सालों की पंचवर्षीय अवधि रही।

2015 में 1961-1990 के औसत से तापमान 0.76 डिग्री सेल्सियस ज्यादा रहा। 1961-1990 दीर्घकालिक जलवायु परिवर्तन को मापने के लिए ऐसी आधार अवधि है जिस पर अंतरराष्ट्रीय सहमति है। इस आधार अवधि के दौरान वैश्विक तापमान 14 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। 2015 में भूमि और महासागर की सतह दोनों पर रिकॉर्ड तापमान की वजह से भारत, पाकिस्तान, प्राग, ब्रिटेन, अमेरिका, आॅस्ट्रेलिया, दक्षिण अफ्रीका सहित दुनिया भर में लू, बाढ़ व भयंकर सूखा जैसी आपदाएं आईं।

डब्लूएमओ के महासचिव पेटेरी टालस ने कहा कि हम पहली बार औद्योगिक क्रांति से पहले के तापमान के स्तर से एक डिग्री ऊपर पहुंचे हैं। हमारे ग्रह के इतिहास में यह एक गंभीर क्षण है। करीब 136 साल से तापमान का लेखा-जोखा रखने के चलन की शुरुआत के बाद 2015 पहला ऐसा साल रहा जिसके 12 महीनों में से 10 महीनों में सबसे ज्यादा तापमान दर्ज किया गया। उन्होंने कहा कि कम से कम अगले पांच दशकों तक जलवायु परिवर्तन का नकारात्मक प्रभाव बढ़ता जाएगा। यह कार्बन उत्सर्जन में कटौती के साथ-साथ जीवनशैली को अनुकूल बनाने में निवेश की जरूरत बताता है।

उन्होंने कहा कि देशों की क्षमता मजबूत करना अहम है ताकि वे मानव व आर्थिक नुकसान को कम करने के लिए आपदा का पूर्वानुमान बेहतर तरीके से लगा सकें। जलवायु परिवर्तन से मौसम से जुड़ी आपदाओं का जोखिम बढ़ जाता है जो सतत विकास में बाधक है। अल नीनो और ग्लोबल वॉर्मिंग के कारण पिछले साल तापमान में रिकॉर्ड इजाफा दर्ज किया गया। अल नीनो एक असामान्य मौसम का स्वरूप है जो विषुवत रेखा के पास प्रशांत महासागर के गर्म होने से होता है। यह गर्म जल ठंडे जल को विस्थापित कर देता है। जलवायु के इस परवर्तन से विश्व के कई भागों में मौसम का स्वरूप प्रभावित होता है।

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