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नॉर्वे में कोरोना वैक्सीन लगवाने के बाद अब तक 13 लोगों की मौत, फाइजर कंपनी पर उठे सवाल

नॉर्वे का कहना है कि कोविड -19 वैक्सीन बुजुर्गों और गंभीर रूप से बीमार लोगों के लिए जोखिम भरी हो सकती है।

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नॉर्वे का कहना है कि कोविड -19 वैक्सीन बुजुर्गों और गंभीर रूप से बीमार लोगों के लिए जोखिम भरी हो सकती है। देश में वैक्सीन की पहली खुराक लेने के बाद हुई 23 लोगों की मौत को लेकर ये दावा किया जा रहा है। नॉर्वे की मेडिसिन एजेंसी के मुताबिक, मरने वालों में से 13 बुजुर्ग लोगों पर वैक्सीन के साइड इफैक्ट का काभी गंभीर असर हुआ। जिसके चलते उनकी मौत हो गई।

नॉर्वे के इंस्टीट्यूट ऑफ पब्लिक हेल्थ ने कहा, “घातक बीमारी से ग्रसित लोगों के लिए वैक्सीन के साइड इफेक्ट्स के गंभीर परिणाम हो सकते हैं।” “जिनके बचने की बहुत कम उम्मीद है उनके लिए इस वैक्सीन से मामूली फायदा होता या फिर वैक्सीन अप्रासंगिक साबित होती है।”

बता दें कि नॉर्वे ने अब तक लगभग 33,000 लोगों को वैक्सीन की कम से कम एक खुराक दी है। देश में उन लोगों पर ध्यान दिया जा रहा है जिनको सबसे अधिक कोरोना से जोखिम है। अधिकतर लोगों को बायोएनटेक / फाइजर वैक्सीन दी गई है। साथ ही मॉडर्ना वैक्सीन भी दी जा रही है।

मालूम हो कि नॉर्वे में दो नर्सिंग कर्मियों की मौत की जांच की जा रही है जो फाइजर और बायोएनटेक वैक्सीन की खुराक लेने के बाद मर गए। नॉर्वे की मेडिसिन एजेंसी के मेडिकल डायरेक्टर स्टीनर मैडसेन ने एक बयान में कहा, ” हमें यह आकलन करना होगा कि क्या वैक्सीन मौत का कारण है या यह एक संयोग है कि ये लोग टीकाकरण के तुरंत बाद मर गए। ” नॉर्वे का नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ पब्लिक हेल्थ भी मौतों की जांच कर रहा है।

मैडसेन ने यह भी कहा कि चूंकि बुजुर्ग लोग कोरोनोवायरस वैक्सीन ले रहे हैं, इसलिए यह मुमकिन है कि मृत्यु महज एक संयोग हो। इससे पहले फाइजर कंपनी के सीईओ अल्बर्ट बोरला ने एक साक्षात्कार में कहा था कि कंपनी “निश्चित तौर पर नहीं कह सकती है” कि जो लोग वैक्सीन लेंगे वे दूसरों तक कोरोना ट्रांसमिट कर सकेंगे या नहीं।

फाइजर का दावा है कि उसकी कोविड-19 वैक्सीन 90 प्रतिशत से अधिक प्रभावी है। शुरुआती ट्रायल के परिणामों के आधार पर कुछ वॉलंटियर ने बताया था कि उन्हें साइड इफेक्ट का सामना करना पड़ा था।

 

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