ईरान और इज़रायल के बीच पिछले 13 दिनों से युद्ध जारी है। गुरुवार को ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियान ने युद्ध रोकने के लिए तीन शर्तें रखी हैं। उनका कहना है कि अगर इन शर्तों को मान लिया जाए तो युद्ध को रोका जा सकता है।
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर जारी बयान में ईरानी राष्ट्रपति ने कहा कि सबसे पहले दुनिया को ईरान के निर्विवाद अधिकारों को पूरी तरह स्वीकार करना होगा। दूसरी शर्त के तौर पर उन्होंने कहा कि इस युद्ध की वजह से ईरान को जो नुकसान हुआ है, उसका मुआवजा देना होगा। तीसरी और सबसे अहम शर्त यह है कि भविष्य में किसी भी तरह की आक्रामकता के खिलाफ ईरान को अंतरराष्ट्रीय समुदाय से सुरक्षा की गारंटी मिलनी चाहिए।
डोनाल्ड ट्रंप क्या इन शर्तों को मानेंगे?
इजरायल और अमेरिका द्वारा 28 फरवरी को किए गये हमले से शुरू युद्ध के दौरान पहली बार ईरान ने युद्ध रोकने के लिए अपनी शर्तें रखी हैं। हालांकि कुछ दिन पहले अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप साफ कह चुके हैं कि बातचीत के लिए अब बहुत देर हो चुकी है और ईरान के साथ कोई समझौता नहीं किया जाएगा। उन्होंने यह भी कहा कि ईरान को हर हाल में सरेंडर करना होगा, तभी युद्ध रोका जा सकता है। ट्रंप ने यह दावा भी किया कि ईरान की नौसेना और वायुसेना को भारी नुकसान पहुंचाया गया है और उनकी सैन्य क्षमता काफी कमजोर हो चुकी है। इसी वजह से ट्रंप कह रहे हैं कि आने वाले दिनों में यह जंग रोकी जा सकती है।
भारत को बड़ी राहत
इस युद्ध की वजह से पूरी दुनिया में तेल का संकट भी गहरा गया है, लेकिन भारत को कुछ राहत मिली है। विदेश मंत्री एस. जयशंकर की ईरान के विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची से फोन पर अहम बातचीत हुई है। इस टेलीफोनिक बातचीत में ईरान ने भारतीय तेल टैंकरों को Strait of Hormuz से सुरक्षित गुजरने की अनुमति देने का भरोसा दिया है।
जानकार इसे एक महत्वपूर्ण कदम मान रहे हैं, क्योंकि इसी समुद्री मार्ग से दुनिया के बड़े हिस्से का कच्चा तेल और प्राकृतिक गैस गुजरती है। रिपोर्ट के मुताबिक विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने ईरान के अलावा रूस के विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव और फ्रांस के विदेश मंत्री जीन नोएल से भी बातचीत की है। इन चर्चाओं का मुख्य उद्देश्य वैश्विक व्यापारिक मार्गों को खुला रखना और तेल-गैस की सप्लाई को लगातार बनाए रखना था। पूरी खबर के लिए यहां क्लिक करें
