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10 साल के लड़के ने साथ पढ़ने वाले बच्‍चे से किया रेप, बिना केस चलाए छोड़ा गया

ये पूरा वाकया उसका वक्त शुरू हुआ जब बर्लिन से स्कूल के 38 विद्यार्थी फील्ड ट्रिप पर स्क्लोस क्रोसलेंड्रोफ की यात्रा पर गए ​थे। विद्याथियों को यहां प्रकृति का आनंद उठाने के लिए लाया गया था। लेकिन आरोपियों ने साथ पढ़ने वाले 10 साल के अफगानी लड़के को धमकी दी कि वह उसके साथ रेप करेंगे।

जर्मनी में अधिकारियों ने अपने सहपाठी के साथ बलात्कार करने वाले 10 साल के अफगानी बच्चे पर मामला न चलाने का फैसला किया है। ये रेप उसने अपनी स्कूली ट्रिप के दौरान किया। जबकि उसके सीरियाई और अफगानी साथी ने इस काम में उसका साथ दिया। जर्मन अधिकारियों ने ये फैसला इसलिए किया क्योंकि आरोपियों की उम्र मुकदमा चलाने के लिए काफी नहीं थी। ये पूरा वाकया उसका वक्त शुरू हुआ जब बर्लिन से स्कूल के 38 विद्यार्थी फील्ड ट्रिप पर स्क्लोस क्रोसलेंड्रोफ की यात्रा पर गए ​थे। विद्याथियों को यहां पर प्रकृति का आनंद उठाने के लिए लाया गया था। लेकिन आरोपियों ने कथित तौर पर अपने साथ पढ़ने वाले 10 साल के अफगानी लड़के को धमकी दी थी कि वह उसके साथ रेप करेंगे।

जर्मन के अखबार बर्लिनर जेतंग के मुताबिक, कुल तीन लड़कों ने पीड़ित के साथ रेप किया। अफगान और सीरियाई मूल के 11 साल के लड़कों ने पीड़ित को पकड़कर रखा। जबकि अफगानी मूल के लड़के ने पीड़ित के साथ रेप किया। दो अन्य सहपाठियों ने भी ये वाकया देखा लेकिन उन्होंने शिक्षकों को इस बारे में सूचना नहीं दी। लेकिन डेढ़ हफ्ते बाद पीड़ित के एक मित्र ने ये सारी बातें एक सामाजिक कार्यकर्ता को बताईं।

रेप की खबर मिलने के बाद स्कूल प्रशासन ने माता-पिता और पुलिस को सूचना दी। मामले के आरोपियों को स्कूल से निलंबित कर दिया गया। लेकिन बाद में अधिकारियों ने मामला न चलाने का फैसला किया। उनका तर्क था कि आरोपी लड़कों की उम्र 14 साल से कम है और न्याय प्रणाली के अर्न्तगत मुकदमा चलाने के लिए उनकी उम्र काफी कम है। समाचार पत्र से बातचीत में बर्लिन स्कूल प्रशासन की प्रवक्ता ने कहा, “हमने सभी न्यायिक संभावनाओं को दरकिनार करते हुए फैसला किया है कि मुख्य आरोपी अब सामान्य स्कूल में नहीं पढ़ेगा, लेकिन उसे पढ़ने के लिए विशेष स्कूल में भेजा जाएगा।” जबकि मामले में सहआरोपी बनाए गए दो अन्य लड़के अब अन्य जिलों में स्कूली शिक्षा ग्रहण करेंगे।

इस मामले से जर्मनी में शरणार्थियों के विरोध की प्रति भावना तेज होने लगी है। ऐसी भावनाएं साल 2015 के शरणार्थी संकट के वक्त पैदा हुईं थीं, जब देश में करीब 10 लाख शरणार्थी घुस आए थे। इसके बाद चेमनित्ज शहर में एक 35 साल के जर्मन नागरिक को चाकू मार दी गई थी। इस मामले में कथित तौर पर अफगानी और सीरियाई नागरिकों को आरोपी बनाया गया था। इसके बाद पूरे देश में कई जगह शरणार्थी समर्थकों और विरोधियों के बीच में हिंसक झड़पें भी हुईं थीं।

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