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10 लाख मुसलमानों को यहां रखा गया है नजरबंद, विवादित शिविरों को चीन ने दिया कानूनी दर्जा

चीन ने दावा किया था कि कथित आंतरिक शिविर जहां उइगरों को हिरासत में लिया जा रहा है, वास्तव में वह प्रोफेशनल ट्रेनिंग सेंटर्स और एजुकेशनल सेंटर्स हैं।

झिंजियांग 1 करोड़ से ज्यादा उइगरों का घर है, उनमें से अधिकतर मुसलमानों को चीनी कम्युनिस्ट पार्टी द्वारा संदिग्ध रूप से संभावित अलगाववादी गतिविधि के केंद्र के रूप में देखा गया है। (सांकेतिक फोटो)

चीन ने झिंजियांग के उत्तर-पश्चिमी क्षेत्र में गुप्त शिविर को चीन ने कानूनी दर्जा दे दिया है। यहां 10 लाख मुसलमानों को नजरबंद करके रखा गया है। उइगर को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर हो रही देश की आलोचना के बाद चीन की यह नवीनतम प्रतिक्रिया है। पिछले महीने मानवाधिकार मामलों के ब्यूरो में पब्लिसिटी के लिए चीन के निदेशक ली झाओजुन ने दावा किया था कि कथित आंतरिक शिविर जहां उइगरों को हिरासत में लिया जा रहा है, वास्तव में वह प्रोफेशनल ट्रेनिंग सेंटर्स और एजुकेशनल सेंटर्स हैं। इन आरोपों के बाद इन केंद्रों का कोई कानूनी आधार नहीं था, चीनी अधिकारियों ने उन्हें अनुमति देने के लिए कानून को दोबारा संशोधन किया है। संशोधन कहता है कि सरकारी एजेंसियों को अनिश्चित काल तक “अतिवाद से प्रभावित लोगों” को प्रभावी ढंग से रोकने के लिए “शिक्षा और प्रशिक्षण केंद्र” स्थापित करने की अनुमति है।

झिंजियांग 1 करोड़ से ज्यादा उइगरों का घर है, उनमें से अधिकतर मुसलमानों को चीनी कम्युनिस्ट पार्टी द्वारा संदिग्ध रूप से संभावित अलगाववादी गतिविधि के केंद्र के रूप में देखा गया है, लेकिन 2017 की शुरुआत से सरकार की पकड़ काफी मजबूत हो गई है, जिसमें चेकपॉइंट्स, पुलिस गश्त और बख्तरबंद वाहनों की संख्या बढ़ी है। झिंजियांग के पार्टी सचिव के रूप में चेन क्वांगो की नियुक्ति के साथ महत्वपूर्ण बदलाव आया है, एक सत्तावादी व्यक्ति जिन्होंने तिब्बत में अपनी पिछली पोस्ट के दौरान एक समान नीतियों को लागू किया था।

अगस्त में संयुक्त राष्ट्र ने चीन का सामना एक रिपोर्ट से कराया था। अमेरिकी वकील और नस्लीय भेदभाव के उन्मूलन पर संयुक्त राष्ट्र समिति के सदस्य गे मैकडॉगल ने आरोप लगाया कि चीन ने झिंजियांग को “बड़े पैमाने पर आंतरिक शिविर गुप्तता में घिरा हुआ है यह एक तरह का अधिकार क्षेत्र है। द न्यूयॉर्क टाइम्स द्वारा रिपोर्ट के अनुसार, जहां मुस्लिम थे वहां उनके साथ पूरी तरह से उनके जातीय-धार्मिक पहचान के आधार पर देश के दुश्मनों के रूप में व्यवहार किया जाता है। चीन के अपने स्वयं के कानून को दोबारा संशोधित करने का निर्णय इस बढ़ती आलोचना के बीच आया  है, लेकिन ऐसा करने से आलोचना कम नहीं हो जाएगी।

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