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चेतावनी: अब स्वाइन फ्लू का नया विषाणु

‘चीनी रोग नियंत्रण एवं बचाव केंद्र’ के वैज्ञानिकों समेत अन्य के मुताबिक ये जी 4 विषाणु मानव कोशिकाओं में रिसेप्टर अणुओं (प्रोटीन अणु) से बंध जाते हैं और श्वसन तंत्र की बाहरी सतह में अपनी संख्या बढ़ाते हैं।

Author बीजिंग | Updated: July 1, 2020 6:44 AM
Swine flu, Corona virus, pandemicकोरोना वायरस पर अभी काबू नहीं मिल सका है। इस बीच स्वाइन फ्लू का नया विषाणु चीन में पनपने लगा है।

चीन में सुअरों के बीच पाई जा रही फ्लू विषाणु की नई प्रजाति शूकर उद्योग से जुड़े कर्मचारियों को तेजी से प्रभावित कर रही है। इसमें वैश्विक महामारी फैलाने वाले विषाणु जैसी सारी अनिवार्य विशेषताएं हैं। एक अध्ययन में यह बात सामने आई है। यह अध्ययन 2011 से 2018 के बीच चीन में सुअरों की निगरानी पर आधारित है और इसमें पाया गया कि इंफ्लुएंजा विषाणु का यह प्रकार, जिसमें जी 4 जीनोटाइप आनुवंशिक सामग्री है, 2016 से सुअरों में प्रमुखता से नजर आ रहा है। यह अध्ययन ‘पीएनएएस’ पत्रिका में प्रकाशित हुआ है।

‘चीनी रोग नियंत्रण एवं बचाव केंद्र’ के वैज्ञानिकों समेत अन्य के मुताबिक ये जी 4 विषाणु मानव कोशिकाओं में रिसेप्टर अणुओं (प्रोटीन अणु) से बंध जाते हैं और श्वसन तंत्र की बाहरी सतह में अपनी संख्या बढ़ाते हैं। अनुसंधानकर्ताओं ने दिखाया कि नया पहचाना गया यह विषाणु एअरोसोल ट्रांसमिशन के माध्यम से फेरेट (नेवले की जाति का एक जानवर) को संक्रमित कर सकता है जिससे उनमें छींक, खांसी, सांस लेने में तकलीफ जैसे गंभीर लक्षण नजर आने के साथ ही उनके शरीर का 7.3 से 9.8 फीसद द्रवमान के बराबर वजन कम हो सकता है।

अध्ययन में यह भी पाया गया कि इंसान को अन्य ‘मानव इंफ्लुएंजा टीकों’ से मिलने वाली रोग प्रतिरोधक क्षमता जी 4 विषाणु से नहीं बचा सकती। यह इस बात का संकेत है कि विषाणु के प्रति शरीर में पहले से कोई प्रतिरक्षा मौजूद नहीं है। शूकर उद्योग में काम करने वाले कर्मचारियों के खून के नमूनों का आकलन दिखाता है कि करीब 10.4 फीसद लोग जी 4 फ्लू विषाणु से संक्रमित थे।

अध्ययन के मुताबिक 2016 और 2019 में सामने आए जी 4 विषाणु संक्रमण के दो मरीजों के पड़ोसी सूअर पालते थे। इससे संकेत मिलता है कि यह विषाणु सुअरों से मनुष्य में फैल सकता है और इससे गंभीर संक्रमण और यहां तक कि मौत भी हो सकती है।

यह जी 4 विषाणु मानव कोशिकाओं में रिसेप्टर अणुओं (प्रोटीन अणु) से बंध जाते हैं और श्वसन तंत्र की बाहरी सतह में अपनी संख्या बढ़ाते हैं। फेरेट (नेवले की जाति का एक जानवर) के संक्रमित होने पर इससे छींक, खांसी, सांस लेने में तकलीफ जैसे गंभीर लक्षण नजर आने के साथ ही उसके शरीर का 7.3 से 9.8 फीसद द्रवमान के बराबर वजन कम हो सकता है। यह विषाणु सुअरों से मनुष्य में फैल सकता है।

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