ताज़ा खबर
 

कोराना पर कैबिनेट की बड़ी बैठक, JS के सुझाव पर भड़के PS

बैठक देश में कोविड-19 के मद्देनजर शिक्षा के भावी स्वरूप पर चर्चा की चर्चा के लिए बुलाई गई थी।

Coronavirus, COVID-19, Corona Cases, Unemployment, JNI, Jamia, Urban Naxal, Cabinet Meeting, कोरोना वायरस, कोविड-19, बेरोजगारी, जेएनयू, जामिया, प्रवासी मजदूर, मजदूरों की समस्या, शिक्षा व्यवस्थासत्तू जी की फेक न्यूज (प्रतीकात्मक तस्वीर)

नई दिल्ली। एक दिन अकबर ने अपने नौरत्नों से पूछा कि अगले जन्म में वे क्या बनना चाहते हैं। टोडरमल ने कुबेर बनने की ख्वाहिश जताई, अब्दुर्रहीम खानखाना ने रामचरितमानस जैसा ग्रन्थ रचने की इच्छा जताई और अबुल फ़ज़ल सपना था का सम्पूर्ण भारत का इतिहास लिखने का। आदि से। एक को छोड़ सभी नौरत्नो ने अपनी रुचियों के अनुसार अपना मन सम्राट के आगे खोल कर रख दिया। बीरबल कुछ न बोले। आखिरकार सम्राट खुद बीरबल की ओर मुखातिब हुए तो बीरबल सकुचाते हुए बोले: हुज़ूर, अगले जन्म में मैं अनपढ़ बनना चाहता हूं।

यह घिसापिटा चुटकुला गुरुवार की दोपहर केंद्रीय मंत्रिमंडल और आला अफसरों की बैठक में एक संयुक्त सचिव ने सुनाया तो प्रिन्सिपल सेक्रेटरी ने डपटा, “वॉट इज़ दिस नॉनसेंस अबाउट।”  यह बैठक देश में कोविड-19 के मद्देनजर शिक्षा के भावी स्वरूप पर चर्चा की चर्चा के लिए बुलाई गई थी। बड़े अफसर ने फिर आंखें तरेरीं, “कोरोना ने वाट लगा रखी है, महीनों हो गए हैं…कण्ठ से भारत माता की जय की आवाज़ नहीं फूटी..और तुम यह सड़ा चुटकुला.. ”

” आय अपोलजाइज़ इफ़ आय हैव ऑफन्डेड एनीवन” छोटे अफसर ने विनम्रता से कहा, “सर मैं तो सिर्फ यह कहना चाहता था कि विश्वविद्यालय जा कर डिग्री हासिल करना ही जीवन में सबसे बड़ी चीज़ नहीं है। अकबर के पास कोई डिग्री नहीं थी। वह राजा था। अकबर दी ग्रेट। बीरबल के पास महर्षि विशुद्धानन्द सरस्वती के गुरुकुल से परास्नातक की उपाधि थी और वे कॉमेडी करते थे।” “तो, क्या आप यह सुझाव देना चाहते हैं कि विश्वविद्यालय खत्म कर दिए जाएं..?”

“बिलकुल यही बात कह रहा है तुम्हारा छोटू” एक सीनियर मंत्री ने हस्तक्षेप किया, “समझने में बड़ी देर लगाते हो, प्रमुख सचिव जी!!..डिग्रीधारी हो न!, तभी!!” सीनियर मंत्री की बात की तस्दीक एक खल्वाट मंत्री ने की। वे प्रधानमंत्री की अनुपस्थिति में बैठक की अध्यक्षता कर रहे थे। बोले, “विश्वविद्यालयों को खत्म करने का सुझाव बहुत ही अच्छा है। इस पर मैं तब से विचार करता आया हूँ जब मैं बीए पार्ट वन में फेल हो गया था। मुझे इसके फायदे मालूम हैं। मैं बताता हूं..समबडी टेक डाउन

” पहला, उच्च शिक्षा के लिए आवंटित 38 हज़ार करोड़ से ज़्यादा की राशि को हम जहां उचित समझेंगे खर्च कर सकेंगे। आप तो जानते ही हैं कि हमारे पास कहीं से पैसा नहीं आ रहा है।… ” दूसरा फायदा यह कि हमारे पास बड़े-बड़े शहरों में प्राइम लोकेशन्स पर बेशुमार ज़मीन उपलब्ध होगी, जिसको सरकार प्राइवेट सेक्टर को बेच सकेगी। इससे खरबों रुपए आएंगे। कुछ नहीं करेंगे तो अपनी ज़मीन है, पुदीना ही बो देंगे। पुदीना यानी मिंट। ठंडा,-ठंडा, कूल-कूल। क्यों स्वास्थ्य मंत्री जी?

” नम्बर तीन। और, दिस इस मोस्ट इम्पोर्टेन्ट। यूनिवर्सिटियाँ नहीं होंगी तो हम विकास के एजेंडे को बुलेट ट्रेन की गति से आगे बढ़ा सकेंगे। समाज में भ्रांति,अशांति, क्रांति और सम्पूर्ण क्रांति जैसी व्याधियां विश्वविद्यालय ही लाते हैं। गलत तो नहीं कह रहा मैं पासवान जी? केवल, पासवान जी ही क्यों नीतीश जी और लालू जी एक ही विश्वविद्यालय की जुड़वा पैदाइश हैं।..पासवान जी, चुहल कर रहा था, जैसे कुछ लोग आपको मौसम वैज्ञानिक कहते हैं। नो ऑफेंस इंटेंडेड।..

सत्तू जी की फेक न्यूज…

” विश्वविद्यालय विहीनता का असली फ़ायदा तो मैं अब बताने जा रहा हूं। सोचो, कित्ता मज़ा आएगा, जब न जेएनयू होगा न जाधवपुर। अलीगढ़ की किरकिरी निकल जाएगी।…समझे आप लोग? यूनिवर्सिटी खत्म होने पर अर्बन नक्सल भी खत्म हो जाएंगे। ये सब सारंडा के जंगल में अपने चेलों के साथ लालकिताब का पुनर्पाठ करेंगे और अपन चैन की बंशी बजाएंगे।
” विश्वविद्यालय खत्म होने का चौथा फायदा यह होगा कि पढेलिखे बेरोज़गार खत्म हो जाएंगे। न न न। बेरोज़गार तो रहेंगे पर उनकी औक़ात न्यूनतम मजदूरी की रह जाएगी।..”

अब तक हिमालय की मानिंद ठंडे होकर सुन रहे मानव संसाधन विकास मंत्री अचानक खड़े हो गए। बोले, “बड़े भाई, आप इन डूटा, लूटा, कूटा, फूटा को भूल रहे हैं। ये नाक में दम कर देंगे।” “ग़लत सोच रहे हैं, आप” अध्यक्ष ने समझाया, ”इन्हें हमारी ताक़त का एहसास हो चुका है। फिर, उड़ने की संभावना कहां है। कोरोना ने मौत का खौफ भर रखा है। रैली, सभा, जुलूस पर रोक है। और अगर न माने तो देखेंगे। ” आज बस इतना ही। कल उच्च शिक्षा की स्थानापन्न व्यवस्था और स्कूल शिक्षा पर बात होगी। अब भोजन करते हैं। क्यों संयुक्त सचिव महोदय? आपका जोक दो कौड़ी का था लेकिन उसके अंदर छिपा विचार सुपर्ब। आउट ऑफ द बॉक्स। हमें ऐसे ही प्रशासक चाहिए। हां, तुम कुछ कहना चाहते हो। कहो। निर्भय होकर कहो। बोलो..”

“सर, मुझे बोलने नहीं दिया गया। मैं, दरअसल, पढ़ाई की व्यर्थता साबित करना चाहता था” ” बोलो न, डरते क्यों हो? मैं तुमसे बहुत खुश हूं।” ” सर, आप सिकन्दरा जाकर अकबर का मकबरा देखिएगा, कभी। अनपढ़ आदमी का विशाल, शानदार मकबरा। और उधर, रंगून में …दो ग़ज़ ज़मीन मिल न सकी कूए यार में…गाते हुए कच्ची, गुमनाम कब्र में समा गया था आखिरी मुग़ल बादशाह बहादुशाह ज़फ़र। ज़फ़र अरबी, फ़ारसी, तुर्की, उर्दू और हिंदी का पण्डित था। उसको क़ाबिल उस्तादों ने इतिहास, गणित, भूगोल और तर्कशास्त्र की शिक्षा दी थी। वह बेहतरीन तलवारबाज़ और तीरंदाज़ भी था। शायर तो वह था ही।” (स्कूली शिक्षा पर बैठक कल होगी)

(लेखक वरिष्ठ पत्रकार हैं।)

Hindi News के लिए हमारे साथ फेसबुक, ट्विटर, लिंक्डइन, टेलीग्राम पर जुड़ें और डाउनलोड करें Hindi News AppOnline game में रुचि है तो यहां क्‍लिक कर सकते हैं।

Next Stories
1 गांजा-भांग की भी दुकानें खुलें, वरना दस हज़ार नशेबाज़ काशी विश्वनाथ के आगे देंगे धरना
2 “हमरा का ई पुड़िया न चाही”, मैंने एक लंबी सांस खींची..गोस्वामी जी फिर गुनगुनाए…
3 …उस गरीब ने जान की बाज़ी लगाकर सौ रुपए बचा लिए थे