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Champions Trophy 2017: भारत-पाकिस्तान फाइनल पर संकट, शिवसेना ने पिच खोदने लंदन भेजी टीम, कई राष्ट्रवादी पत्रकार भी गए साथ

नो सीरियस न्‍यूज: इस खबर का सच से कोई लेना-देना नहीं है। इसे बस मजे लेने के लिए पढ़ें।

Author June 17, 2017 17:23 pm
India vs Pakistan Champions Trophy 2017 Final : भारत-पाक का फाइनल मेैच 18 जून को खेला जाएगा।

रविवार (18 जून,2017) को भारत- पाकिस्तान के बीच ब्रह्मांड का सबसे बड़ा मुकाबला होने वाला है। क्र‍िकेट फैंस इस मुकाबले को रामायण के राम-रावण और कौरव-पांडवों के युद्ध से भी बड़ा माना रहे हैं। लेकिन इस बड़े मुकाबले पर भारी संकट द‍िख रहा है। संकट पैदा किया है भारत की राजनीतिक पार्टी शिवसेना ने। शिवसेना ने मैच से पहले पिच खोदने की प्लानिंग कर ली है। पार्टी का कहना है क‍ि जब तक पाक‍िस्‍तान के आतंकवाद का केंद्र सरकार की ओर से मुंहतोड़ जवाब नहीं द‍िया जाता, तब तक भारत-पाक‍िस्‍तान के बीच क्रि‍केेेट मुकाबला ब्रह्मांड में कहीं नहीं होने देंगे।

शि‍वसेना ने शिवसैनिकों का एक दस्‍ता लंदन रवाना कर द‍िया है। वे वहां जाकर प‍िच खोदने की कोश‍िश करेंगे। उल्‍लेखनीय है क‍ि राष्‍ट्रवादी माने जाने वाले कई पत्रकार भी श‍िवसेना की इस मुहिम मेें साथ देने के ल‍िए इस दस्‍ते में शाम‍िल होकर लंदन गए हैं।

सूत्र बताते हैं क‍ि श‍िवसेना प्रमुख उद्धव ठाकरे के करीबी सलाहकारों ने उन्‍हें सलाह दी क‍ि अंतरराष्‍ट्रीय स्‍तर पर चर्चा पाने का इससे बेहतर मौका नहीं म‍िल सकता। मुंबई में तो प‍िच खोद कर श‍िवसेना भारत में पहले ही कुख्‍यात‍ि अर्ज‍ित कर चुकी है। उसी अनुभव के आधार पर इस बार अंतरराष्‍ट्रीय स्‍तर पर कोश‍िश करने की रणनीति बताई गई। लेकि‍न इस राजनीतिक मुहिम में पत्रकारों की भागीदारी कैसे हो गई, इसे लेकर ठोस कुछ पता नहीं चल पा रहा है। इस बारे मेें अलग-अलग कयास लगाए जा रहे हैं।

कई जानकारों का कहना है क‍ि पत्रकारों ने इसी बहाने लंदन जाकर मैच का लुत्‍फ उठाने का मौका भुनाने के मकसद से श‍िवसेना की मुहिम में शाम‍िल होने का फैसला क‍िया है। उन्‍हें लगता है क‍ि वहां जाकर उनके मैच देखने की जानकारी भारत मेें क‍िसी को नहीं लगेगी। इस तरह अपना क्रि‍केेेट प्रेम बरकरार रखते हुए भी वे राष्‍ट्रवादी बने रह सकेंगे।कुछ जानकारों की राय में चैनल ने प‍िच की खुदाई (अगर हो सकी तो) का सीधा प्रसारण कर राष्‍ट्रवादी होने का सबूत देने के लि‍ए अपने पत्रकार भेजे हैं। ऐसे जानकार कहते हैं क‍ि पत्रकार चैनल के खर्च पर गए हैं और श‍िवसेना से उनका कोई लेना-देना नहीं है।
(यह खबर आपको हंसने-हंसाने के लिए कोरी कल्‍पना के आधार पर लिखी गई है। इस खबर में कोई सच्चाई नहीं है।)

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