ताज़ा खबर
 

Humour: मैं लंच लेकर चला था, भीड़ लिंच करने के मूड में थी…राम-राम! जय श्री राम!

पप्पू: पता नहीं गप्पू। मैं भोजन-पानी के साथ सड़क के किनारे खड़ा था। भइया लोगों का एक जत्था थोड़ा पास आया तो मैंने हाथ उठा कर जैसे ही कहा...

पप्पू और गप्पू की बकैती (प्रतीकात्मक तस्वीर)

पप्पू: कहां से सवारी आ रही है गप्पू महाराज..और हां, ये हांफ क्यों रहे हो?
गप्पू: हाइवे पर पदयात्रा करने गया था। तुमने ही तो सलाह दी थी…कि माइग्रेंट्स के साथ टहलो तो तोंद घट जाएगी
पप्पू: ठीक किया लेकिन हांफ क्यों रहे हो? भीड़ ने दौड़ा लिया क्या?
गप्पू: तुम्हे कैसे पता? … और ये तुम हंस क्यों रहे हो?
पप्पू: पता इसलिए कि मैं तुमसे एक दिन पहले हाइवे पर गया था।
गप्पू: हा-हा-हा!!! पिटे कि नहीं? हुआ क्या था?
पप्पू: पता नहीं गप्पू। मैं भोजन-पानी के साथ सड़क के किनारे खड़ा था। भइया लोगों का एक जत्था थोड़ा पास आया तो मैंने हाथ उठा कर जैसे ही कहा, भइया ज़रा रुको तो भीड़ किलकारी मार के मेरी तरफ दौड़ पड़ी। भीड़ नारा लगा रही थी, यही है-यही है, डपोरडंग-डपोरडंग…
गप्पू: ओ होहोहो…हा हा हा..मज़ा आ गया पप्पू..यू मेड माय डे..ढपोरशंख। डपोरडंग नहीं ढपोरशंख।
पप्पू: आर यू श्यूअर?
गप्पू: मुझे हिंदी आती है और दूसरे यह कि मैं ढपोरशंख को पहचानता हूं। रोज़ सुबह देखता हूं।
पप्पू: कहां?
गप्पू: आईने में।
पप्पू: कोई दूसरा क्यों नहीं पहचान पाता?
गप्पू: रक़म गलाता हूं, बच्चू। मेकअप करता हूं। और, एक बार मेकअप हो जाने पर दूसरे तो दूसरे मैं खुद भी भूल जाता हूं कि कौन हूं। स्वैग नहीं देखते मेरा?
पप्पू: स्वैग नहीं स्वांग..खैर छोड़ो। अब अपनी आपबीती बताओ, तुम्हारे साथ सड़क पर क्या हुआ?
गप्पू: बस क्या बताऊं, पप्पू। संक्षेप में कहूं तो बस इतना कि मैं लंच लेकर खड़ा था और भीड़ लिंच करने के मूड में थी।
पप्पू: वाह, अंग्रेज़ी में कितनी अच्छी हेडिंग बनती..
Lynch or Lunch
एनीवे, संक्षेप के पीछे मत छिपो। डीटेल्स, प्लीज़।
गप्पू: वही जैसा तुम्हारे साथ। मैंने भी कहा था..
मित्रों कुछ क्षण थम कर थोड़ा स्वल्पाहार ग्रहण कीजिए..
बस, भीड़ सनक गई। नारे लगाने लगी…देश के गद्दारों को…देश के गद्दारों को..
पप्पू: नारे का दूसरा हिस्सा? कौन बोल रहा था?
गप्पू:दूसरा हिस्सा मैं बोल रहा था, मन ही मन..मत मारो गोली xxx को।
पप्पू: फिर क्या हुआ?
गप्पू: फिर झुमका गिरा..
पप्पू: गप्पू, डीटेल्स प्लीज़। इट्ज़ गेटिंग इंटरेस्टिंग।
गप्पू: ज़िद मत कर दोस्त। आगे की कहानी बड़ी दर्दनाक है।
पप्पू: सुना डाल मेरे मिट्टी के शेर। मन हल्का हो जाएगा। वो क्या कहते हैं कैथार्सिस हो जाएगी..
गप्पू: तेरी तरह मैं भी भागा। आंखें मीच के। कुछ सुझाई नहीं दे रहा था। तभी कान में एक गीत सुनाई दिया। गीत क्या लगा कि गीता का श्लोक सुन रहा होऊं… गाड़ीवाला आया घर से कचरा निकाल..
पप्पू: फिर क्या हुआ
गप्पू: मैंने आंख खोली। बगल से कचरागाड़ी निकल रही थी। गाड़ी में एक चश्मे की तस्वीर थी। बापू के प्रति मेरा हृदय श्रद्धानत हो गया। भावातिरेक में आंसू बहने लगे। मगर यह समय श्रद्धांजलि का नहीं, जान बचाने का था। मैंने भीड़ को थोड़ा चकमा दिया और गाड़ी के अंदर कूद गया।
पप्पू: हरे डिब्बे में गिरे थे या नीले वाले में?
गप्पू: पता नहीं, पप्पू पर मुझे ऐसा लग रहा था कि मानो कन्नौज की सुगंधित गलियों में घूम रहा होऊं।
पप्पू: चलो सब ठीक रहा। जान है तो जहान है। वैसे, बाय द वे, भीड़ ने तुम्हे पहचाना कैसे।
गप्पू: पता नहीं दोस्त। शायद कपड़ों से ही पहचाना होगा। मॉडर्न फंडा तो यही चल रहा है
पप्पू: ऐसा नहीं है, गप्पू। फंडे बदलते भी रहते हैं।
गप्पू: जैसे? कोई उदाहरण?
पप्पू: जैसे चंद रोज़ पहले का बेतूल का उदाहरण। एक वकील साहब दवाई लेने निकले थे, लॉकडाउन में। पुलिस को यह हिमाकत अच्छी न लगी। देने लगी दण्ड-प्रसाद। वकील साहब ने समझाया कि अगर आपकी नजर में कुछ ग़लत किया है तो सेक्शन 188 लगा दो, पीटते क्यों हो।
इस पर पुलिस और भड़क गई क्योंकि वकील साहब उसको कानून की धाराएं सीखा रहे थे। सो, दण्ड प्रसाद का दूसरा दौर चला। वकील साहब अधमरे हो गए। तब उनके मुंह से फूटा कि मैं वकील हूं। पुलिस वाले सनाका खा गए। जब नाम पता लगा तो उन्हें गश आ गया। नाम था दीपक बुंदेले। खबर है कि पुलिसवाले वकील साहब के आगे पीछे सॉरी-सॉरी करते घूम रहे हैं। बुंदेले से कह रहे हैं कि ग़लती से मिस्टेक हो गया। हमने आपको वो समझ लिया था। वो क्या? वे कान में जवाब फुसफुसा देते हैं।
पर क्यों
वकील ने पूछा
पुलिस बोली
सर, वो आपने दाढ़ी रखी हुई है न!!
गप्पू: रामरामराम

– लेखक वरिष्ठ पत्रकार हैं। ये उनकी कपोल-कल्पित बातचीत है।

Hindi News से जुड़े अपडेट और व्‍यूज लगातार हासिल करने के लिए हमारे साथ फेसबुक पेज और ट्विटर हैंडल के साथ लिंक्डइन पर जुड़ें और डाउनलोड करें Hindi News App। जनसत्‍ता टेलीग्राम पर भी है, जुड़ने के ल‍िए क्‍ल‍िक करें।

Next Stories
1 Humour: मजदूरों की यात्रा राष्ट्रहित के खिलाफ, सवाल मुझे पसंद नहीं
2 कपिल शर्मा शो के ‘गुत्थी’ बोले- मैं मार्केट जा रहा हूं अपना मास्क और सैनिटाइजर रिटर्न करने, वजह जान हंस पड़ेंगे आप
3 ‘डॉ. कफील को र‍िहा कर दें, संब‍ित पात्रा की तरह कसम नहीं खाएगा’