ताज़ा खबर
 

Humour: लो, ईदगाह आ गई। बाप रे बाप!! इत्ते लोग। डेढ़-दो लाख की जमात!!

रेड ज़ोन और बिजली कटौती के बीच सुबह जब नींद टूटे तो आंख न खोलें और दो मिनट कल्पना करें कि आप किसी हिल स्टेशन में हैं...

पप्पू और गप्पू की बकैती (प्रतीकात्मक तस्वीर)

गप्पू: ईद मुबारक़, पप्पू जी
पप्पू: एक दिन पहले ही? चलिए, कोई बात नहीं, आपको भी ईद मुबारक। लेकिन ये भालू की तरह बाहें फैलाए शाहरुख की अदा क्यों पेल रहे हो?… ओह! ईद मिलोगे? न न न ना। याद रखो, दो ग़ज़ की दूरी या दो ग़ज़ की गहराई। चुनाव है आपका। ठीक है, ईद के मौके पर नमाज़ के बाद दूसरी बड़ी चीज झप्पी ही होती है। यह भी मालूम है कि तुमको गला मिलने की लत है। तो भी भावनाओं पर काबू रखो। फ़िलहाल। कंट्रोल नहीं होता तो एक ट्रिक है काल्पनिक झप्पी। जिसको चाहो दबोच लो।
गप्पू: बस बस बस!! मुझको वो समझे हो क्या, वो?
पप्पू: आदरणीय, आपकी मुसीबत आपका अपना शंकालु मन है। हर दोस्त कमीना नहीं होता। आखिर काल्पनिक झप्पी में क्या दिक़्क़त है? आप तो षड्दर्शन, चतुर्वेद और कर्मकांड के ज्ञाता है। मानस पूजा। अगर मानस पूजा हो सकती है तो मानस ईद क्यों नहीं।
गप्पू: करैक्टर के पाजामे मैं रहो, पाजामे में। गप्पू मैं हूं या तुम? लोकल हांकने का अधिकार किसका है? मेरा या तेरा? …लोकल शब्द से परेशान न हो। हमारे गांव में लोकल का मतलब होता है घटिया क्वालिटी का प्रोडक्ट। दूसरा अर्थ होता है लफ़्फ़ाज़ी, गपोड़ेबाज़ी। ऐसे आदमी को वोकल भी कहा जा सकता है। हां-हां, ठीक पकड़े हैं। बिहार में भोकल ही कहते हैं। न भई, न। भोकल और भोकाल अलग लफ्ज़ हैं। भोकल मायने जलवा। लेकिन, यह कहा जा सकता है कि भोकाल के लिए लोकल और भोकल होना जरूरी है।
पप्पू: तुम्हारा पद नहीं छीन रहा। अपने ही पाजामे में रहूंगा। बस कभी कभी अपना दे दिया करो। पप्पू में गप्पू और गप्पू में पप्पू। दुनिया कंफ्यूजियाए रहेगी और अप्पन लोग अक्खे इंडिया को टोपी पहनाते रहेंगे। तो, आपका पजामा पहन कर मैं शुरू हो रहा हूं, गप्पू जी।
हां तो मैं बक रहा था कि भारतीय हिंदुओं की मानसिक पूजा की तर्ज़ पर भारतीय मुसलमान मानसिक ईद कैसे मना सकते हैं। तो सुनें
रेड ज़ोन और बिजली कटौती के बीच सुबह जब नींद टूटे तो आंख न खोलें और दो मिनट कल्पना करें कि आप किसी हिल स्टेशन में है। ठंडी जगह है सो अपनी रज़ाई हौले हौले हटाएं। कल्पना शिद्दत से करेंगे तो ठंड का अहसास होने लगेगा। ईदगाह जाने की तैयारी करें। तैयार होकर (अगर सेवई न बन पाई हों तो) गुड़ का एक टुकड़ा पानी में घोलें और आंख बंद कर शीर खुरमा की कल्पना करते हुए उसे पी जाएं। अब बन्द कमरे में जाजम बिछा कर 5-10 मिनट कदमताल करें, यह सोचते हुए कि आप बड़ी ईदगाह की तरफ जा रहे हैं। ईदगाह को जाने वाला रास्ता बेहद खूबसूरत है। हरीभरी पहाड़ी वादी..नदी और पहाड़ से गिरता झरना। कोयल बोल रही है। हिरन चर रहे हैं। लीची, आम, शहतूत और खिन्नी-फालसे के दरख़्त अपनी ख़ुशबू उड़ेल रहे हैं। पर आपको अभी ईदगाह पहुंचना है और आप भागते जा रहे हैं। घोड़े की तरह। कड़बग-कड़बग।
लो, ईदगाह आ गई। बाप रे बाप!! इत्ते लोग। डेढ़-दो लाख की जमात!! क्या मंज़र है। मीलों बिछी मखमली घास की चादर। ऊपर संवलाए बादलों का चंदोवा। आप नियत बांध रहे हैं..इमाम साहब ने नमाज़ शुरू कर दी है..आप दो रकात, 6 तकबीर और बाकी चीजें पूरी करते हुए नमाज़ सम्पन्न करते हैं।
अब आंखे खोल लीजिए और उमस भरे बन्द कमरे में सहमे पड़े जाजम को लपेट लीजिए।
लो हो गई शानदार ईद। चाहें तो आप इसी तरह दस्तरख्वान भी सजा लें। ये रहे टुंडे के कबाब, ट्रफल, कैवियार, फ़ीके की लस्सी, समरकन्द के खरबूज़े, टर्किश डिलाइट..
गप्पू: बस बहुत हुआ, पप्पू। अब तू मेरे पाजामे से बाहर आ जा। बहुत भोकल हो लिए। वैसे यह बता तूने कभी पूजा की है। ये मानस वाली पूजा?
पप्पू: क्या बात करते हो! रोज़ाना बिना नागा। बग़ैर पूजा मैं बिस्तर छोड़ता ही नहीं।
जैसे ही नींद खुलती है मैं आंख मीच कर कानपुर से लखनऊ, काठगोदाम, पिथौरागढ़, मुंशीआरी की पहाड़ियों पर दौड़ता मालपा से गुजरता सीधे कैलाश पर्वत पहुंचता हूं। भोले का नमन कर मानसरोवर में डुबकी लगाता हूं। शंकर जी की अनुमति लेकर एक ब्रह्मकमल तोड़ता हूं और फिर दौड़ पड़ता हूं। थोड़ी देर में मैं बाबा केदारनाथ के आगे होता हूं। उनको ब्रह्मकमल अर्पित करने के बाद खुद को मैं वापस बेड पर महसूस करता हूं।
गप्पू: ये सारी पूजा बिना स्नान के कर डालते हो? छी..
पप्पू: क्यों, मानसरोवर में नहाता तो हूं।
गप्पू: और, जाड़े में जब मानसरोवर जम जाता है, तब?
पप्पू: जलता हुआ उपला साथ ले जाता हूं, न!!
गप्पू: भई, मान गए तुम्हें। अभी तक सोचता था कि मेरी टक्कर में दूसरा कोई नहीं।
पप्पू: आइंदा के लिए मेरा एक ब्रह्मवाक्य रट लो। कि बुद्धिमत्ता और मूर्खता पर किसी की बपौती नहीं होती। एक चीज़ और। तुग़लक़ शरीर और काल से बंधा अस्तित्व नहीं। तुग़लक़ देशकाल से परे एक आत्मा है। हैप्पी ईद।

– लेखक वरिष्ठ पत्रकार हैं। ये उनकी कपोल-कल्पित बातचीत है।

Next Stories
1 Humour: ये तरबूज़ बाबर ही हिंदुस्तान लाया था…ले, चाकू पकड़ और उतार दे खंज़र इसके पेट में…
2 Humour: जब तक पतित पावन जयश्री राम हैं तब तक पतित होने में क्या दिक़्क़त!
3 Humour: मैं लंच लेकर चला था, भीड़ लिंच करने के मूड में थी…राम-राम! जय श्री राम!
ये पढ़ा क्या?
X