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सेमिनार में भारत आए अफ़्रीकी इतिहासकार ने कहा- नाम ही बदलते रहोगे तो काम कब होगा

श्रोताओं से वार्तालाप के बाद डॉ पम्पपीओन ने पानी के दो घूंट भर कर कहा, "अगर नाम ही बदलते रहे तो काम न हो पाएगा। मैं इतिहास पर चर्चा नहीं कर पाऊंगा...

Coronavirus, COVID-19, Corona Casesसत्तू जी की फेक न्यूज… (प्रतीकात्मक तस्वीर)

नई दिल्ली। बहुत साल पहले की बात है। कितने साल? एक हज़ार ठीक है? चलो एक करोड़ साल कर देते हैं। कोरोना से बचने के लिए दूरी ज़रूरी है। हां तो, एक करोड़ साल पहले जम्बू द्वीप में भंटा सिंह नाम के राजा राज करते थे। क्कक.. क्या? नाम अच्छे नहीं लग रहे?ओके..ओके.. बदल देता हूं। इस काम का तो मैं मास्टर हूं। तो जम्बू द्वीप का नाम पाकिस्तान कर दूं? नहीं? क्या कहा रदीफ़..तुक मिलता है हिंदुस्तान से..स्तान-स्तान। चलिए देश का नाम लेमूरिया कर देता हूं। ये तो कहीं हइयेहे नहीं। और, राजा के नाम में क्या दिक़्क़त है। भंटा। काशी में तो मेला लगता है। भंटा-लोटा मेला। वरुणा के किनारे। अच्छा! मामला काले रंग का है?…ओहोहो, मैं तो भूल ही गया था: भंटा यानी बैंगन–थाली का बैंगन!!

ओके, राजा का नाम बगुला कर देता हूं। झक्क, सफ़ेद, शफ्फाक, शुभ्र, श्वेत, धवल बगुला–बक। बक-बक-बक। क्या? यह भी नहीं! बगुला शब्द भगत और भक्त की ओर इशारा करता है..और ये बक भी सजेस्टिव प्रतीत होता है। ठीक है। तो राजा का नाम रख देता हूं, घाउंचबैबला।  यह तमाम बातचीत डायस पर खड़े अफ्रीका से आए डॉ फीची पिंपियाना पम्पपीओन और हॉल में मौजूद भारतीय इतिहासकारोंके बीच हुई। डॉ पम्पपीओन ऐतिहासिक किंवदंतियों पर आयोजित एक सेमिनार में भाग लेने आए थे। उन्होंने भारत में ही उच्च शिक्षा पाई थी। बीएचयू से बीए के बाद उन्होंने जेएनयू से एमए और पीएचडी किया था। वे हिंदी के अलावा भारतीयों की नाम बदलने जैसी लतों से भली भांति परिचित हैं।

श्रोताओं से वार्तालाप के बाद डॉ पम्पपीओन ने पानी के दो घूंट भर कर कहा, “अगर नाम ही बदलते रहे तो काम न हो पाएगा। मैं इतिहास पर चर्चा नहीं कर पाऊंगा…” हां, तो अब सुनिए। एक करोड़ साल पहले हुए थे राजा घाउंचबैबला। उन्होंने कुछ साल के अंतराल में आधा लेमुरिया जीत लिया था। उनकी सेना की धाक थी। उसको जंग जीतने और उसके बाद प्रजा को ख़ौफ़ज़दा कर शांत रखने की खास ट्रेनिंग दी गई थी। जंग जीतने के बाद सेना जब विजित राज्य में प्रवेश करती तो ऐसी कत्लोगारत को अंजाम देती कि उसके बाद घाउंचबैबला का विरोध करने की हिम्मत किसी में न रहती। कुछ दिनों बाद हारने वाले राज्य के गुंडों को सेना अपनी छत्रछाया में ले लेती थी। ये लोग लिंचिंग आदि तरीकों से धाक जमाते और कुछ दिन बाद सत्ता में बड़े-बड़े पद पा जाते। इनके आगे कोई सर नहीं उठा पाता। उठाता तो उसे गद्दार माना जाता।

घाउंचबैबला की सेना मायने यमराज। लेकिन, हबीबिस्तान राज्य को जीतने के बाद यह सेना बेकार हो गई। इतनी बेकार कि जब उससे ऊमबूमफूम गणराज्य पर हमले के लिए कहा गया तो उसने साफ इंकार कर दिया। घाउंचबैबला ने तुरंत सेनापति को बुलाया। महीने भर तक फौजियों की सब तरह की जांच होती रही। मेडिकल जांच भर हुई। इनमे मेडिकल रिपोर्ट चौंकाने वाली थी। उसमें बताया गया था कि लगभग हर फौजी में सेरोटोनिन और डोपामिन नाम के हार्मोन की मात्रा बहुत बढ़ गई है।

अनपढ़ घाउंचबैबला कुछ समझ नहीं पाया। डॉक्टर ने उसे बताया कि जब कोई प्रेम में पड़ता है तब ये दोनों हार्मोन बड़ी मात्रा में पैदा होते हैं। ये हार्मोन मन में खुशी का भाव भर देते हैं। तब आदमी नफरत करने के लायक ही नहीं रहता। वह महबूब के साथ-साथ हर किसी से प्यार करने लगता है। वह पेड़-पौधों और कुत्ता बिल्ली तक से प्रेम करने लगता है। सुना नहीं…बड़े अच्छे लगते हैं ये धरती ये नदिया ये रैना और तुम…। डॉक्टर ने कहा कि हार्मोन रूपी प्रेमरस से डूबा आदमी दशरथ मांझी की तरह पहाड़ तोड़ सकता है पर किसी का सर नहीं।

घाउंचबैबला ने जांच करवाई तो पता चला कि उसके फौजी हबीबिस्तान जीतने के बाद वहां की सुंदरियों के प्रेम में पड़ गए हैं। डॉक्टर फिर बुलाए गए। घाउंचबैबला ने राय ली कि क्या हो सकता है। क्या शरीर से प्रेमरस निकालकर खत्म किया जा सकता है। डॉक्टरों ने कई मिनट विचार किया। मगर उन्हें हिप्पोक्रेटस की शपथ याद आ गई। वे बोले,”हमको प्रेमरस बढ़ाने की ट्रेनिंग दी गई है घटाने की नहीं। डिप्रेशन के मरीज़ों का सेरोटोनिन तो हम बढ़ाते ही रहते हैं।”

“फिर, क्या किया जाए..अभी तो जीतने के लिए आधा लेमुरिया पड़ा है?” घाउंचबैबला ने खीझ कर पूछा। “हम उन लाखों लड़कियों को मार देते हैं, जिन्होंने फौजियों को फांस रखा है!” एक नवरत्न ने राय दी। डॉक्टरों ने कहा, “बेशक मार सकते हैं पर इसके बाद फौजी हमेशा के लिए बेकार हो जाएंगे। सब के सब मजनू बन जाएंगे या रांझा या देवदास।” निराश घाउंचबैबला कुछ दिनों बाद गहरे डिप्रेशन में चल गया। राज्य में अराजकता बढ़ने लगी। तब प्रेम में डूबी सेना ने घाउंचबैबला को कैद कर राज्य पर कब्जा कर लिया।

(लेखक वरिष्ठ पत्रकार हैं।)

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