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COVID-19 से बचने के लिए राष्ट्रपति ने पार किया अरब सागर, नाम बदल होटल में लिया कमरा

जब इस संवाददाता ने काउंटर क्वेश्चन बन्द नहीं किए तो चिंकारा ने दारू भरकर दो गिलास सामने रख दियो। "पियो" वे बोले, "वाइन ऐन ट्रुथ... डेडली कॉम्बिनेशन..., पियो और सुनो। ...जस्ट सुनो।"

Coronavirus, COVID-19, Corona Casesसत्तू जी की फेक न्यूज… (प्रतीकात्मक तस्वीर)

नई दिल्ली। समस्या से निपटने का एक ही तरीका नहीं होता। मसलन, बारिश परेशान करे तो आप कई तरीके अपना सकते हैं। उदाहरण के लिए आप रेनकोट पहन सकते हैं, छाता तान सकते हैं, किसी इमारत के साए में बैठ सकते हैं। यह बात बुधवार को बमचिक गणराज्य (काल्पनिक नाम) के राष्ट्राध्यक्ष ज़िद्दी ज़मीन चिंकारा (काल्पनिक नाम) ने इस संवाददाता से एक विशेष बातचीत में कही। वे अपने मुल्क में फैले कोविड-19 से बचकर निजी तौर पर एक डोंगी पर अरब सागर पार कर भारत आए हैं और एक होटल में नाम बदलकर रह रहे हैं।

चिंकारा ने कहा कि बारिश हो या कुछ और। समस्याओं से निपटने के तरीके अनगिनत हैं। पर इन सबसे अलग होता है अंतिम आउट ऑफ द बॉक्स तरीका। बारिश को ही लें। जब बचने की कोई जगह न मिले तो आप बारिश के वज़ूद को ही नकार दें। सिंपल। आप खुद को और जनता को कन्विन्स कर दें कि बारिश हो ही नहीं रही। फिर देखिए कि जनता बरसते पानी में मस्त होकर चलफिर रही है। काम कर रही है। और गा रही है…सुहाना सफर और ये मौसम हंसीं…।
लेकिन, ज़मीन साहब, झूठ का सहारा क्यों?

इस सवाल पर कमीन देर तक हंसते रहे। फिर बोले,” जिसे आप झूठ कह रहे हैं, उसे मैं आत्मबल कहता हूं।आत्मबल, आत्मनिर्भरता, आत्मविश्वास हो तो कोई कुछ भी कर सकता है।” तो भी बारिश को सूखा कहने की ज़रूरत क्या है? इस संवाददाता ने दोबारा सवाल किया। ज़मीन दोबारा हंसे। बोले, आप विकसित, अमीर देश के नागरिक हैं। आप नहीं समझ पाएंगे कि गरीब देश आत्मबल की ही रोटी खाते हैं क्योंकि सचमुच की रोटी वहां कम होती हैं।…आपको समझाता हूं। मान लीजिए विदेशी मुद्रा, राजस्व और कमीशन के लालच में मैंने देश का अधिकांश गेहूं एक्सपोर्ट करा दिया है। अगर जनता यह बात जानेगी तो मुझे मुसोलिनी की तरह मारकर उलटा लटका देगी।

अब देखो मैं क्या करता हूं। मैं देश भर में टीवी, रडियो, डिजिटल और प्रिंट मीडिया में मक्के के फायदों का धुआंधार प्रचार कराता हूं। बाज़ार में थोड़ा बहुत गेहूं अब भी होगा लेकिन देश के बड़े-बड़े वैज्ञानिक और फिल्मी सितारे उसे इतना खतरनाक साबित कर चुके होंगे कि आटा छू भर जाएगा तो लोग सैनिटाइजर मल लेंगे। ” यह तो सत्य के साथ खिलवाड़ हुआ…” इस संवाददाता की बात चिंकारा ने बीच में ही ठहाका मारकर काट दी। बोले: सत्य के साथ प्रयोग करने का अधिकार क्या सिर्फ मोहन बाबू का था?नहीं। यह अधिकार नत्थू के पास भी था। 30 जनवरी 1948 की शाम वह कुछ और नहीं, बस नफरत के सच का प्रेम के सच के साथ प्रयोग कर रहा था। मोहन मरा। पूरा भारत रो उठा। नत्थू को फांसी हुई। आज 70-72 साल बाद नत्थू जी देशभक्तों की पाँति में खड़े हैं और मोहन बाबू चश्मा बनकर कूड़ा गाड़ियों में चिपके हुए हैं। सत्य बड़ा नटखट होता है।

जब इस संवाददाता ने काउंटर क्वेश्चन बन्द नहीं किए तो चिंकारा ने दारू भरकर दो गिलास सामने रख दियो। “पियो” वे बोले, “वाइन ऐन ट्रुथ… डेडली कॉम्बिनेशन…, पियो और सुनो। …जस्ट सुनो।” दारू से उनकी ज़बान और खुल गई और मेरी बन्द। मैं सुनता गया। वे बोलते गए..। … इंडियन जर्निलस्ट तू नहीं जानता कि मैंने अपने देश में सच्चाई के साथ कितने प्रयोग किए हैं। अरे, तूने वह कहानी पढ़ी है, जिसमें एक आदमी घर की हर चीज़ को नए नाम से पुकारने लगता है। कुछ नाम इस तरह थे…सोने का नाम जागना, पंखे का नाम कुर्सी, आग का नाम पानी, नहाने का नाम गन्दा होना, पहनने का नाम नंगा होना।

एक दिन उसने एक चिट्ठी में अपनी दिनचर्या इस तरह डिसक्राइब की..मैं सुबह 5 बज़े सोया फिर कुर्सी को ऑन कर नीचे पंखे पर बैठ गया। मैंने चूल्हे में पानी को जला दिया और उबलने के लिए एक गिलास आग पतीले पर चढ़ा दी। चाय बनाई और पीने के बाद मैं गन्दा होने के लिए बाथरूम में घुस गया।अंत में मैं नंगा होकर ऑफिस चला गया।…

…कहानी बेहूदी है। लेकिन मैंने इससे सार तत्व ग्रहण कर लिया: नाम बदले जा सकते हैं। और, यह बात तो मैं पहले ही जनता था कि बात मनवाई जा सकती है। अब सुनो, इसके बाद मैंने क्या किया। मेरे देश में गर्मी के मौसम भीषण होता है। 50 डिग्री तापमान। तिस पर लू। मैंने तुरन्त अध्यादेश जारी किया कि कल दोपहर 12 बजे से लू को पुरवइया कहा जाएगा। हमारे यहां का मीडिया गर्म पुरवइया के फायदे बताता रहता है। जनता भी मानने लगी है। कुछ लोग मेरे कदम की निंदा करते हैं लेकिन ऐसी निंदा को पहले ही देशद्रोह की श्रेणी में डाला जा चुका है। …

… मेरे देश में लोग अब गरमी से और भी ज़्यादा लोग मरते हैं। अखबार लिखते हैं पुरवइया से 10 मरे..मानो पुरवइया न हो बल्कि शायरी वाली क़ातिल हसीना। हॉट, वेरी वेरी हॉट। “आखिर आपने ऐसा क्यों किया?” चिंकारा बोले, दरअसल बचपन से ही मुझे चौंकाने का शौक रहा है। अगर कोई लड़का मुझे बगीचे में शांति से बैठा मिलता था तो उसके पीछे चुपके से जाकर ज़ोर से ‘हू’ करने में मुझे बड़ा सुख मिलता था। “चिंकारा जी, अंतिम सवाल: आपका आइडियल कौन है?”

जवाब: आपके मुल्क का पुराना सुल्तान तुग़लक़। मुद्रा के साथ उसके प्रयोग मुद्रा विकास के इतिहास का हिस्सा है। उसका दिल्ली से दौलताबाद जाना पूरे उपमहाद्वीप में एक मुहावरा बन चुका है। एक बार मैं भी ऐसा करके महान सुल्तान को श्रद्धांजलि देना चाहूंगा। इसके बाद रिटायरमेंट लेकर मैं किलिमंजारो पर झोपड़ी डाल कर रहूंगा। किलिमंजारो हमारे अफ्रीका की एवरेस्ट है। ठंडी-ठंडी, कूल-कूल।

(लेखक वरिष्ठ पत्रकार हैं।)

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