ताज़ा खबर
 

कैबिनेट की बैठक में शिक्षा मंत्री का सुझाव, यूनिवर्सिटी की जगह गुरुकुल में पढ़ेंगे छात्र, गाय भी पालेंगे

मानव संसाधन विकास मंत्री पूरा होमवर्क करके आए थे। इसीलिए, अध्यक्ष के कहते ही वे पूरी रवानी में बहने लगे। मंत्री ने कहा कि आश्रमों में अधिकतम 50 छात्र होंगे एवं आचार्य का परिवार। हर आश्रम को दो सौ बीघे कृषि भूमि और 50 गाय दी जाएंगी।

Coronavirus, COVID-19, Corona Casesसत्तू जी की फेक न्यूज… (प्रतीकात्मक तस्वीर)

नई दिल्ली। विश्वविद्यालय खत्म होने के बाद सम्भव है कि उच्च शिक्षा के लिए आचार्यों का चयन किया जाए। आचार्य वनों में स्थित आश्रम में रहेंगे।  इस आशय का सुझाव केंद्रीय मंत्रिमंडल और आला अफसरों की बैठक के दूसरे दिन शुक्रवार को मानव संसाधन विकास मंत्री ने दिया। बैठक की अध्यक्षता दूसरे दिन भी खल्वाट मंत्री ने की। प्रधानमंत्री फ़ौज़ी कमांडरों और एनएसए के साथ गहन मंत्रणा में व्यस्त थे।

मानव संसाधन विकास मंत्री पूरा होमवर्क करके आए थे। इसीलिए, अध्यक्ष के कहते ही वे पूरी रवानी में बहने लगे। मंत्री ने कहा कि आश्रमों में अधिकतम 50 छात्र होंगे एवं आचार्य का परिवार। हर आश्रम को दो सौ बीघे कृषि भूमि और 50 गाय दी जाएंगी। खेती और गायें आश्रम को स्वावलंबी बनाए रखेंगे। इसी को तो sustainable development कहते हैं।
मानव संसाधन विकास मंत्री ने कहा कि एक बार स्थापित होने के बाद सरकार को चवन्नी खर्च नहीं करनी पड़ेगी। छात्र खेत पर काम करेंगे। बदले में रोटी पाएंगे। गोमाता की सेवा करेंगे, बदले में दूध पिएंगे। गोबर -गोमूत्र खाद के काम आएगा। सब कुछ ऑर्गेनिक। हल भी एक फल वाला।

इतना काम करेंगे तो छात्र पढ़ेंगे कब? संस्कृति मंत्री ने मानव संसाधन विकास मंत्री को टोकते हुए कहा, “जहां तक मैं जानता हूं तो सतयुग, त्रेता और द्वापर में छात्र नगर जाकर भिक्षाटन करते थे।” मानव संसाधन विकास मंत्री ने संस्कृति मंत्री की बात सही मानी और अपनी मजबूरी बताई। उन्होंने कहा कि शहरों में असली भिखारियों की संख्या लाखों में होती है। क्या वे लड़कों को टिकने देंगे?

संस्कृति मंत्री का शमन हुआ ही था कि विज्ञान और टेक्नोलॉजी मंत्री ने नई शंकाएं उठा दीं। क्या फिजिक्स, केमिस्ट्री, ज़ुओलजी, बॉटनी तथा विज्ञान की अन्य नवीनतम शाखाएं क्या छप्पर तले पढ़ाएंगे? इनके लिए बेशकीमती लैब चाहिए! क्या नील गगन के तले होगा? मानव संसाधन विकास मंत्री से कुछ बोलते न बना। लम्बी-लम्बी सांसें भरकर बोले, “आपके छिद्रान्वेषण ने गुरुकुल के लुक की ऐसी-तैसी हो गई..अब वो पास्टोरल लुक आ ही नहीं पाएगा।” “परेशान क्यों होते हो? मैं हूं न!

Coronavirus, COVID-19, Corona Cases, Unemployment, JNI, Jamia, Urban Naxal, Cabinet Meeting, कोरोना वायरस, कोविड-19, बेरोजगारी, जेएनयू, जामिया, प्रवासी मजदूर, मजदूरों की समस्या, शिक्षा व्यवस्था सत्तू जी की फेक न्यूज…

” खल्वाट मंत्री ने कहा, “थोड़ा खर्च और बढ़ा लेते हैं और साइंस की पढ़ाई के लिए अंडरग्राउंड बनवा लेते हैं–एकदम अमरीका की एमआइटी जैसा। ठीक? नीचे ह्यूस्टन, बोस्टन, मैनहट्टन और ऊपर छप्पर,, मटकी और लालटेन।”
एक समस्या हल हो ही रही थी कि एक बैकबेंचर ने नई उछाल दी, “और छात्राओं का क्या होगा? क्या वनक्षेत्र की रोमांटिक सराउंडिंग्स में सह आय मीन सहशिक्षा उचित होगी?”

“बिल्कुल नहीं” खल्वाट मंत्री ने साफ शब्दों में कहा कि स्त्री को देशहित में घर में रहना होगा, वह बच्चों की प्राथमिक टीचर होगी। “डिटेल्स प्राथमिक शिक्षा पर चर्चा के दौरान मैं खुद दूंगा।” ”लेकिन, सर ” एक सचिवस्तरीय अधिकारी ने सवाल उठाया, “डॉक्टरी और इंजिनीयरिंग की पढ़ाई?” खल्वाट मंत्री बोले, “आयुर्वेद, तिब्बी और होम्योपैथी की पढ़ाई छप्पर तले हो जाएगी। कोई सर्जरी का काम तो है नहीं। रही बात एलोपैथी की तो इसकी पढ़ाई हम छात्रों को बांग्ला देश, चीन, रूस आदि देशों में भेज कर कर लेगे। और, इंजीनियरिंग की तो परवा न करें। देश में इतने इफ़रात हैं कि इस पढ़ाई की फिलहाल चिन्ता नहीं। 20 साल की रोक लगा देंगे तो भी कमी न पड़ेगी।

प्राथमिक शिक्षा पर खल्वाट मंत्री को ही बोलना था। उन्होंने स्थिति सोचनीय बताई। कोरोना, हम सब मानते हैं कि यह मर्ज फिहलाल कहीं जाने वाला नहीं। ऐसे मे बच्चों को क्लासरूम तक लाना बहुत कठिन काम है। ऐसे माता-पिता नगण्य होंगे जो कोरोना काल में बच्चों को स्कूल जाने दें। एक कमरे में अधिकतम 15 बच्चों को पढ़ाने के सुझाव भी दिया गया है। कैसे हो पाएगा? एक क्लास में अमूमन 4 सेक्शन होते हैं और हर सेक्शन में 45-50 बच्चे!! क्या तीन पालियों में पढ़ाई होगी!!!

“इसीलिए मेरा प्रस्ताव है कि प्राथमिक शिक्षा ख़त्म कर देनी चाइए। बदले में उपलब्ध विकल्प दो हैं। पहला कि बच्चों को पढ़ाने का काम महिलाओं को दिया जाए। वे घर में रहकर बच्चों को शिवाजी की तरह शेर बनाएं।

(लेखक वरिष्ठ पत्रकार हैं।)

Hindi News के लिए हमारे साथ फेसबुक, ट्विटर, लिंक्डइन, टेलीग्राम पर जुड़ें और डाउनलोड करें Hindi News AppOnline game में रुचि है तो यहां क्‍लिक कर सकते हैं।

Next Stories
1 कोराना पर कैबिनेट की बड़ी बैठक, JS के सुझाव पर भड़के PS
2 गांजा-भांग की भी दुकानें खुलें, वरना दस हज़ार नशेबाज़ काशी विश्वनाथ के आगे देंगे धरना
3 “हमरा का ई पुड़िया न चाही”, मैंने एक लंबी सांस खींची..गोस्वामी जी फिर गुनगुनाए…