Why is it necessary to build a temple in the house, know what place should be at home, place of worship - घर में मंदिर बनाना क्यों है जरूरी, जानिए घर में किस जगह पर होना चाहिए पूजा स्थान - Jansatta
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घर में मंदिर बनाना क्यों हैं जरूरी, जानिए घर में किस जगह पर होना चाहिए पूजा स्थान

मंदिर घर के ईशान कोण या पूर्व दिशा में होना चाहिए। अगर मंदिर किसी फ्लैट में हैं तो सिर्फ सूर्य के प्रकाश का ध्यान रखें।

सुबह और शाम एक ही समय पर पूजा करें।

सुबह की शुरुआत घर में अगर पूजा-पाठ से हो तो पूरा दिन अच्छा निकलता है। ज्योतिष मानते हैं कि घर में मंदिर होने से तमाम तरह के दुख खत्म हो जाते हैं। अगर घर में मंदिर नहीं है तो आपको एक मंदिर स्थापित करना चाहिए। इससे घर में शांति और भगवान की कृपा बनी रहेगी। आज हम आपको बताएंगे की कैसे घर का मंदिर आपका भाग्य चमका सकता है।

घर में दो तरह की ऊर्जा होती है , सकारात्मक ऊर्जा और नकारात्मक ऊर्जा। सकारात्मक ऊर्जा के लिए घर में मंदिर होना आवश्यक है। इससे घर की तमाम समस्याएं दूर हो जाती है। स्वास्थ्य और मन की समस्याओं का निवारण जल्दी हो जाता है। घर में आर्थिक समृद्धि बनी रहती है। घर के लोगों में कलह नहीं होती है। मंदिर का लाभ तभी होती है। जब इसकी स्थापना में नियमों का पालन हो। देवी- देविताओं की स्थापना पर ध्यान दें और मंदिर जागृत करें।

घर में मंदिर स्थापना करने से पहले की सावधानियां-

1. पूजा घर या मंदिर घर के ईशान कोण या पूर्व दिशा में होना चाहिए। अगर मंदिर किसी फ्लैट में हैं तो सिर्फ सूर्य के प्रकाश का ध्यान रखें।
2. मंदिर का रंग हल्का पीला या सफेद रखें, गहरे रंग से बचें।
3. मंदिर में मूर्ति 12 अंगुल से ज्यादा ना रखें। मंदिर में शंख, गोमती चक्र और एक पात्र में जल जरूर रखें।
4. मंदिर की रोजाना सफाई करें।
5. पूजा स्थान पर पूर्वजों के चित्र ना रखें।
6. शनिदेव का चित्र या मूर्ति भी ना रखें।
7 . पूजा स्थान पर अगरबत्तियां ना जलाएं
8. पूजा स्थान का दरवाजा बंद ना रखें।
9. रसोई में कभी मंदिर ना बनाएं।
10. मंदिर घर हमेशा पूर्व या उत्तर दिशा में बनाएं।

घर के मंदिर का जागृत कैसे करें-

1. सुबह और शाम एक ही समय पर पूजा करें।
2. शाम की पूजा में दीपक जरूर जलाएं।
3. दीपक पूजा स्थान के बीच में रखें।
4. पूजा से पहले भजन या मंत्र का जाप करें।
5. मंदिर हमेशा साफ-सुथरा रखें।
6. गायत्री मंत्र का जाप करें।
7. पूजा के बाद अर्पित किया हुआ जल प्रसाद के रूप में ग्रहण करें।

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First Published on October 25, 2017 3:03 pm