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तो क्या इस कारण से होते हैं लोग डिप्रेशन का शिकार?

सद्गुरु जग्गी वासुदेव के अनुसार अगर आप खुद के लिए अवसाद या डिप्रेशन पैदा करने में सक्षम हैं तो आप अपने भीतर काफी सारी भावनाएं और विचार पैदा कर रहे हैं। लेकिन ऐसा गलत दिशा में कर रहे हैं। अगर आपके पास किसी चीज के लिए बहुत गहरी भावनाएं और तीव्र विचार ना हो तो आप कभी डिप्रेशन में नहीं पड़ सकते।

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Causes of Depression: डिप्रेशन यह एक ऐसा शब्द है, जो आज के दौर में बड़ी ही आसानी से कहीं भी सुनने को मिल ही जाता है। लोगों की कम होती सहनशक्ति का ही नतीजा है कि ज्यादातर लोग इस डिप्रेशन का शिकार हो जाते हैं। कुछ लोग इससे बाहर निकल आते हैं तो कुछ लोग इसमें अपनी जिंदगी खत्म कर लेते हैं। लेकिन क्या होता है डिप्रेशन और क्यों लोग इसका इतनी जल्दी हो जाते हैं शिकार? इस बारे में सद्गुरु जग्गी वासुदेव जी का कहना है कि लोगों की ज्यादातर बीमारियों का कारण वह खुद ही होते हैं। अगर आप खुद के लिए अवसाद या डिप्रेशन पैदा करने में सक्षम हैं तो आप अपने भीतर काफी सारी भावनाएं और विचार पैदा कर रहे हैं। लेकिन ऐसा गलत दिशा में कर रहे हैं। अगर आपके पास किसी चीज के लिए बहुत गहरी भावनाएं और तीव्र विचार ना हो तो आप कभी डिप्रेशन में नहीं पड़ सकते।

आगे सद्गुरु कहते हैं कि बात बस इतनी है कि आप ऐसे विचार और भावनाएं पैदा कर रहे हैं जो आपके खिलाफ काम कर रहे हैं। मतलब आपके पास खुद के लिए डिप्रेशन पैदा करने के लिए जरूरी शक्ति है। इंसान को होने वाली ज्यादातर बीमारी खुद की बनाई हुई होती हैं। कुछ लोग शारीरिक रुप से बीमार होते हैं इसलिए उनके पास कोई चारा नहीं होता है। लेकिन ज्यादातर लोग जिन्हें हम एक खास तरह की विचार प्रक्रिया और भावना के साथ प्रशिक्षित करें और उन पर बाहरी हालातों से भी थोड़ा दबाव डालें तो लगभग हर व्यक्ति अपना मानसिक संतुलन खो देगा। जिससे वह क्लीनिकल तौर पर बीमार हो जाएगा। ऐसे लोगों को पागलपन तक ले जाया जा सकता है। क्योंकि विवेक और पागलपन के बीच की सीमा रेखा बहुत बारीक होती है। अगर आप 3 महीने तक किसी पर अपना गुस्सा निकालें तो आप देखेंगे कि 3 महीने बाद आप क्लीनिकल तौर पर वहां पहुंच जाएंगे।

इसलिए आपको समझना चाहिए कि आप एक पल के लिए भी गुस्सा होंगे तो मतलब आप बीमार हैं। हो सकता है क्लीनिकल तौर पर यह बात सिद्ध ना हुई हो लेकिन ये समझ लेना चाहिए कि आप उस दिशा में जा रहे हैं। इसलिए आपको समझना चाहिए कि ज्यादातर बीमारियां खुद की बनाई हुई हैं। अगर आप अपने शरीर को यह समझा सके कि खुश रहना में ही फायदा है बीमार रहने में नहीं तो आप देखेंगे कि बीमारियां काफी हद तक कम हो जाएगी।

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