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नवजात बच्चे को पीलिया का ग्रह-कुंडली से क्‍या है कनेक्‍शन, जानें ज्योतिष की बातें

ज्योतिष शास्त्र की मानें तो बच्चे वंशानुगत पाप ग्रहों की चपेट में आने से भी बीमार पड़ते हैं। इसके साथ ही उन्हें पीलिया भी हो जाता है।

प्रतीकात्मक तस्वीर।

नवजात बच्चे अक्सर पीलिया के शिकार हो जाते हैं। इससे उन्हें शारीरिक और मानसिक रूप में काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। बार-बार हो रही पीलिया की वजह से बच्चे का विकास ठीक ढंग से नहीं हो पाता है। हांलाकि डॉक्टरों के पास पीलिया का इलाज मौजूद है और वे उसे ठीक भी कर देते हैं। लेकिन ज्योतिष शास्त्र नवजात बच्चे को होने वाली पीलिया पर एक अलग ही राय रखता है। इसके मुताबिक लग्न भाव की वजह से बच्चे को बार-बार पीलिया का सामना करना पड़ता है। ज्योतिष शास्त्र में इसके निदान के बारे में विस्तार से बताया गया है। आइए जानते हैं।

ज्योतिष शास्त्र के मुताबिक, यदि बच्चे के जन्म के समय उसकी कुंडली में लग्न भाव बन रहा हो तो उसे पीलिया होने का खतरा बढ़ जाता है। दरअसल लग्न के दूसरे, तीसरे और एकादश भाव पर शनि और दूसरे क्रूर ग्रहों की बुरी नजर पड़ने से बच्चा बीमार होता है। और वह धीरे-धीरे पीलिया की चपेट में आ जाता है। इसलिए बच्चे के जन्म के समय उसकी कुंडली में ग्रहों का शांत होना जरूरी है। ऐसे में यदि बच्चे के जन्म के समय उसकी कंडली में क्रूर ग्रहों का साया हो तो सावधान हो जाने की जरूरत है।

ज्योतिष शास्त्र की मानें तो बच्चे वंशानुगत पाप ग्रहों की चपेट में आने से भी बीमार पड़ते हैं। इसके साथ ही उन्हें पीलिया भी हो जाता है। वंशानुगत पाप ग्रह इस बात को दर्शाते हैं कि बच्चे के पूर्वजों द्वारा किए गए पाप कर्मों का फल उसे मिल रहा है। बच्चे की कुंडली में यह राहु ग्रह के दोष की वजह से होता है। ऐसे में माता-पिता को नवजात बच्चे को पीलिया होने पर सतर्क हो जाना चाहिए। और ज्योतिष शास्त्र में बच्चे को वंशानुगत पाप ग्रहों से बचाने वाले उपायों का पालन करना चाहिए।

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First Published on May 8, 2018 11:41 am

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