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सूर्य को जल चढ़ाने से मिलते हैं ये लाभ, जानिए कैसे चढ़ाएं जल

सूर्य को जल चढ़ाते समय जल की धारा के बीच से उगते को सूर्य को देखने से आंखों की रोशनी बढ़ती है।

ग्रहों में सूर्य देव को प्रसन्न करने के लिए रविवार का व्रत किया जाता है।

सूर्य को प्रत्यक्ष देवता के रूप में जाना जाता है। सूर्य को जल चढ़ाने से इंसान के व्यक्तित्व प्रभावित होता है। ज्योतिष शास्त्र के मुताबिक सूर्य को सभी ग्रहों का स्वामी माना जाता है। इसलिए कहा जाता है जिनकी कुंडली में सूर्य ग्रह प्रसन्न रहता है उसकी कुंडली में बाकी ग्रह भी ठीक रहते हैं। सूर्य को जल चढ़ाने विज्ञान के मुताबिक भी लाभदायक माना गया है। सूर्य को सकारात्मक ऊर्जा का प्रतीक माना जाता है। सूर्य को आत्मा का कारक माना गया है। इसलिए प्रात:काल सूर्य देव के दर्शन से मन को बेहतर कार्य करने की प्रेरणा मिलती है। साथ ही शरीर में स्फूर्ति भी मिलती है।

प्रात:काल स्नान कर के ही सूर्य को जल चढ़ाना चाहिए। जल्दी उठकर सूर्य को जल चढ़ाने से ताजी हवा मिलती है साथ ही सूर्य की पहली किरणें पड़ती है, जो स्वास्थ्य के लिए काफी लाभकारी होता है। सूर्य को तांबे के लोटे से जल अर्पित करना चाहिए। जल चढ़ाते समय जल की धारा के बीच से उगते को सूर्य को देखने से आंखों की रोशनी बढ़ती है।

सूर्य की किरणों से शरीर को विटामिन डी मिलता है। सुबह की किरणें बहुत लाभकारी होती है। इसके बाद जैसे-जैसे सूर्य की गर्मी बढ़ती जाती है, वह हमारे स्वास्थ्य के लिए हानिकारक होती जाती है। इसीलिए सुबह-सुबह ही सूर्य को जल चढ़ाया जाता है।

इस तरह चढ़ाएं सूर्य को जल- सूर्य को जल चढ़ाते समय तांबे का लोटे इस्तेमाल करना चाहिए। लोटे में चावल, रोली, फूल-पत्तियां डाल सकते हैं। सूर्य को जल अर्पित करते समय गायत्री मंत्र का जाप करना चाहिए।

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First Published on December 18, 2017 4:11 pm