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चाणक्य नीति: इन लोगों का कभी नहीं करना चाहिए अपमान क्योंकि ये होते हैं आपके पिता समान

हिंदू धर्म में जन्म के बाद बच्चे का यज्ञोपवीत संस्कार या जनेऊ धारण संस्कार किया जाता है। इस संस्कार को जो व्यक्ति करवाता है वो पिता समान माना जाता है। इसलिए चाणक्य कहते हैं कि इस व्यक्ति का कभी भी अनादर नहीं करना चाहिए क्योंकि यह संस्कार व्यक्ति के नए जीवन का प्रतिनिधित्व करता है।

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Chankya niti: आचार्य चाणक्य एक सफल राजनीतिज्ञ, कूटनीति और नीतियों के ज्ञाता थे। जिन्होंने अपनी नीतियों से नंद वंश का नाश किया और चंद्रगुप्त मौर्य को सत्ता दिलवाई। चाणक्य द्वारा बताई गई नीतियां मनुष्य जीवन को सफल बनाने में कारगर साबित होती हैं। इन नीतियों में जीवन की किसी भी समस्या का हल मिल सकता है साथ ही इस बात की जानकारी भी मिलती है कि मनुष्य को किस परिस्थिति में कैसा व्यवहार करना चाहिए। यहां आप जानेंगे कि ऐसे कौन से 5 व्यक्ति होते हैं जिनका हमें हमेशा सम्मान करना चाहिए और इन्हें पिता समान मानना चाहिए…

– सबसे पहले तो हमारे अपने पिता जिनकी वजह से हम इस दुनिया में आएं हैं। वो हमारे जनक और हमारे कर्ताधर्ता होते हैं। उनका हमेशा सम्मान करना चाहिए। उनका अपमान करने से पितृ दोष लगता है।

– हिंदू धर्म में जन्म के बाद बच्चे का यज्ञोपवीत संस्कार या जनेऊ धारण संस्कार किया जाता है। इस संस्कार को जो व्यक्ति करवाता है वो पिता समान माना जाता है। इसलिए चाणक्य कहते हैं कि इस व्यक्ति का कभी भी अनादर नहीं करना चाहिए क्योंकि यह संस्कार व्यक्ति के नए जीवन का प्रतिनिधित्व करता है।

– चाणक्य अनुसार शिक्षा देने वाले गुरु हमारे पिता के समान होते हैं। क्योंकि यह हमें जीवन का मार्ग दर्शन दिखाते हैं। जिससे हमें इस बात का पता चल पाता है कि हमें जीवन में किस दिशा में बढ़ना है। इसलिए पिता तुल्य गुरु का अपमान कर पाप का भागीदार नहीं बनना चाहिए।

– आनंद की प्राप्ति के बिना जीवन अधूरा होता है। व्यक्ति चाहे किसी भी चीज को प्राप्त कर ले लेकिन अगर आनंद नहीं है तो जीवन व्यर्थ लगता है। इसलिए जीवन में वास्तविक सुख के लिए रिश्तों का काफी महत्व होता है। फिर चाहे वे रिश्ते पारिवारिक हों या मित्रता के। जो रिश्ता हमें आनंद की अनुभूति कराता है, वह भी पितृ तुल्य होता है।

– जीवन में किसी न किसी चीज को लेकर कभी न कभी भय उत्पन्न हो ही जाता है। इस भय से बचानेवाला व्यक्ति हमारे लिए बहुत मायने रखता है। ऐसा व्यक्ति भी पिता के समान ही होता है। इसलिए हमें ऐसे व्यक्ति को जीवन भर सम्मान देना चाहिए जो हमारे भय को निकालने में हमारी सहायता करे।

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