ताज़ा खबर
 

नवरात्रि 2018: स्कंदमाता की पूजा से मिलता है संतान सुख, इस आरती से करें उपासना

Navratri 2018: भगवान स्कंद कुमार कार्तिकेय की माता होने के कारण इन्हें स्कंदमाता के नाम से जाना जाता है। मां शेर पर सवार है जिनकी चार भुजाएं हैं दो भुजाओं में स्कंद हैं और दो हाथों में कमल के पुष्प हैं।

स्कंदमाता को सृष्टि की पहली प्रसूता स्त्री माना जाता है।

Navratri 2018: आज 14 अक्टूबर को पांचवां नवरात्र है और इस दिन स्कंदमाता की पूजा की जाती है। स्कंदमाता को सृष्टि की पहली प्रसूता स्त्री माना जाता है। कहा जाता है स्कंदमाता की पूजा से संतान और धन की प्राप्ति होती है। भगवान स्कंद कुमार कार्तिकेय की माता होने के कारण इन्हें स्कंदमाता के नाम से जाना जाता है। मां शेर पर सवार है जिनकी चार भुजाएं हैं दो भुजाओं में स्कंद हैं और दो हाथों में कमल के पुष्प हैं। स्कंदमाता को केले का भोग अति प्रिय है। स्कंदमाता को केसर की खीर का प्रसाद चढ़ाना चाहिए। स्कंदमाता की उपासना से भक्तों की सभी इच्छाएं पूरी हो जाती हैं। इसके अलावा जिनके संतान नहीं हैं उन्हें संतान की प्राप्ति होती है।

मां की आरती –

जय तेरी हो स्कंदमाता
पांचवा नाम तुम्हारा आता
सबके मन की जाननहारी
जगजननी सबकी महतारी .
तेरी ज्योत जलाता रहू मै .
हरदम तुम्हे ध्याता रहू मै .
कई नामो से तुझे पुकारा .
मुझे एक है तेरा सहारा .
कही पहाड़ो पर है डेरा .
कई शेहरो मै तेरा बसेरा .
हर मंदिर मै तेरे नजारे .
गुण गाये तेरे भगत प्यारे .
भगति अपनी मुझे दिला दो .
शक्ति मेरी बिगड़ी बना दो .
इन्दर आदी देवता मिल सारे .
करे पुकार तुम्हारे द्वारे .
दुष्टदत्यज बचढ़कर आये .
तुम ही खंडा हाथ उठाये .
दासो को सदा बचाने आई .
‘भक्त’ की आस पुजाने आई!!

ब्रेकिंग न्‍यूज, अपडेट, एनालिसिस, ब्‍लॉग के लिए फेसबुक पेज लाइक, ट्विटर हैंडल फॉलो करें और गूगल प्लस पर जुड़ें

First Published on October 13, 2018 1:07 pm