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केदारनाथ यात्रा शुरु, जानिए शिव के इस ज्योतिर्लिंग का क्या है महत्व

पांडवों ने अपने दृढ संकल्प और भक्ति से भगवान शिव को प्रसन्न कर लिया। जिस कारण उन्हें भोलेनाथ द्वारा केदारनाथ की इस भूमि पर सारे पापों से मुक्ति मिल गई।

केदारनाथ धाम।

चार धाम यात्रा मंगलवार से शुरु हो चुकी है। और अब गुरुवार सुबह केदारनाथ मंदिर के भी कपाट खोल दिये गये हैं। गंगोत्री और यमनोत्री के कपाट पहले ही मंगलवार को खोले जा चुके हैं और अब बद्रीनाथ के कपाट 10 मई को खोल दिये जायेंगे। हिंदुओं में चार धाम यात्रा का खास महत्व माना जाता है। हर साल भारी संख्या में लोग इन धामों के दर्शन करने के लिए आते हैं। भगवान शिव के 12 ज्योतिर्लिंग में से एक केदारनाथ मंदिर का खास महत्व माना गया है। उत्तराखंड के रूद्रप्रयाग जिले में आने वाला यह धाम तीन तरफ से पहाड़ो से घिरा हुआ है।

केदारनाथ मंदिर तीन भागों में बंटा हुआ है। पहला है इसका गर्भगृह जिसे लगभग 80वीं शताब्दी के आस-पास का माना जाता है। दूसरा है दर्शन मंडप जहां पर लोग एक बड़े प्रागण में खड़े होकर पूजा-अर्चना करते हैं। तीसरा है सभा मंडप यहां तीर्थयात्री इकट्ठा होते हैं। इस मंदिर का इतिहास महाभारत काल के समय से माना जाता है। हालांकि इस मंदिर की स्थापना किसने की इसे लेकर कोई स्पष्टता नहीं है लेकिन कुछ पौराणिक कथाओं में इस मंदिर की स्थापना का वर्णन मिलता है।

ऐसा मान्यता है कि जब पांडवों ने महाभारत युद्ध में अपने भाइयों की हत्या कर दी थी तब उन्हें काफी दुख पहुंचा। भ्रातृहत्या के पाप से मुक्ति पाने के लिए पांडवों ने शिव भगवान की अराधना की। लेकिन पांडवों से नाराज भगवान शिव उन्हें दर्शन नहीं देना चाहते थे जिस कारण वह केदार में जाकर बस गये। लेकिन पांडवों ने अपने दृढ संकल्प और भक्ति से भगवान शिव को प्रसन्न कर लिया। जिस कारण उन्हें भोलेनाथ द्वारा केदारनाथ की इस भूमि पर सारे पापों से मुक्ति मिल गई। कहा जाता है तभी से वहां इस मंदिर की स्थापना हो गई।

एक पौराणिक कथा यह भी है कि यहां महा तपस्वी नर और नारायण ऋषियों द्वारा तपस्या की गई थी। जिन ऋषियों को भगवान विष्णु का अवतार कहा गया है। उन्होंने अपनी तपस्या से भगवान शिव को प्रसन्न कर लिया और उन्हें वरदान स्वरूप यहां ज्योतिर्लिंग के रूप में सदा निवास करने का लर दे दिया।

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First Published on May 9, 2019 1:22 pm

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