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कालभैरव अष्‍टमी 10-11 को, इन पांच उपायों से प्रसन्न हो सकते हैं भैरव

भैरवजी को काशी का कोतवाल भी कहा जाता है। इसके पूजा करने से अनिष्ट का निवारण होता है।

इस दिन भगवान शिव जी ने कालभैरव के रूप में अवतार लिया था।

मार्गशीर्ष मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी को कालभैरव अष्टमी मनाई जाती है। इस साल 10 नवंबर और 11 नवंबर को कालभैरव अष्टमी है। इस दिन भगवान शिव जी ने कालभैरव के रूप में अवतार लिया था। कालभैरव भगवान शिव का अत्यंत ही रौद्र, भयाक्रांत, वीभत्स, विकराल प्रचंड स्वरूप है। भैरवजी को काशी का कोतवाल भी कहा जाता है। इसके पूजा करने से अनिष्ट का निवारण होता है। आज हम काल भैरव को प्रसन्न करने के सरल उपाय बताएंगे, जिससे काल भैरव प्रसन्न होकर आपकी मनोकामना पूरी करेंगे।

1. हर गुरुवार कुत्ते को गुड़ खिलाएं। इस दिन किसी कोढ़ी, भिखारी को मदिरा की बोतल दान करें। सवा किलो जलेबी बुधवार के दिन कालभैरव को चढ़ाएं और कुत्तों को खिलाएं।

2. रविवार या गुरुवार को एक रोटी लें। इस रोटी को अपनी तर्जनी और मध्यमा अंगुली से तेल में डुबोकर लाइन खीचें। इसके बाद इस रोटी को दो रंग के कुत्ते को खिलाएं। अगर कुत्ता रोटी खा लेता है तो समझ लेना आपको कालभैरव का आशीर्वाद मिल गया। यदि कुत्ता रोटी सूंघ कर आगे बढ़ जाता है इस क्रम को जारी रखें।

3. उड़द के पकौड़े शनिवार की रात को कड़वे तेल में बना लें। उन्हें रात भर ढंककर रखें और सुबह उठकर किसी कुत्ते को खिलाएं। इसके बाद घर लौट आएं। याद रहें कि पीछे मुड़कर ना देखें।

4. शुक्रवार या रविवार को कालभैरव मंदिर में गुलाब, गुगल और चंदन की 33 अगरबत्ती जलाएं और पांच नींबू पांच गुरुवार कालभैरव को चढ़ाएं।

5. शनिवार को कड़वे तेल में पकौड़े, पुए, पापड़ जैसे पकवान तलकर रविवार को गरीबों को बांट दें।

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First Published on November 8, 2017 8:10 am