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चाणक्य नीति: किसी भी चीज की अति बन सकती है आपके दुख का कारण

किसी एक व्यक्ति को त्यागने से यदि कुल की रक्षा होती है तो उस एक को छोड़ देना चाहिए। पूरे गांव की भलाई के लिए कुल को तथा देश की भलााई के लिए गांव को और अपने आत्म सम्मान की रक्षा के लिए सारी पृथ्वी को छोड़ देना चाहिए।

चाणक्य की नीतियां।

आचार्य चाणक्य जिन्हें कौटिल्य के नाम से भी जाना जाता है। ये एक महान दार्शनिक, अर्थशास्त्री और राजनेता थे। चाणक्य ने कई ऐसा नीतियां बताई हैं जो मनुष्य के जीवन के हर मोड़ पर कारगर साबित होती हैं। इन्होंने अपनी नीतियों के आधार पर ही नंद वंश का नाश करके चंद्रगुप्त मौर्य को राजा बनाया। इनके द्वारा रचित अर्थशास्त्र राजनीति, अर्थनीति, कृषि, समाजनीति आदि का महान ग्रंन्थ है। यहां जानिए चाणक्य की उन नीतियों के बारे में जिन्हें जानना आपके जीवन के लिए लाभकारी साबित हो सकता है…

– अति सुंदर होने के कारण सीता का हरण हुआ, अत्यंत अहंकार के कारण रावण मारा गया, अत्याधिक दान के कारण राजा बलि बांधा गया। अत: सभी के लिए अति ठीक नहीं है। ‘अति सर्वथा वर्जयते’ अति को सदैव छोड़ देना चाहिए।

– कन्या का विवाह अच्छे कुल में करना चाहिए। पुत्र को विद्या के साथ जोड़ना चाहिए। दुश्मन को विपत्ति में डालना चाहिए और मित्र को अच्छे कार्यों में लगाना चाहिए।

– दुर्जन और सांप सामने आने पर सांप का वरण करना उचित है, न की दुर्जन का, क्योंकि सर्प तो एक ही बार डसता है, परन्तु दुर्जन व्यक्ति कदम-कदम पर बार-बार डसता है।

– मूर्ख व्यक्ति से बचना चाहिए। लह प्रत्यक्ष में दौ पैरों वाला पशु है। जिस प्रकार बिना आंख वाले अर्थात अंधे व्यक्ति को कांटे भेदते हैं, उसी प्रकार मूर्ख व्यक्ति अपने कटु व अज्ञान से भरे वचनों से भेदता है।

– कोयल की शोभा उसके स्वर में होती है, स्त्री की शोभा उसका पतिव्रत धर्म है, कुरूप व्यक्ति की शोभा उसकी विद्वता में है और तपस्वियों की शोभा क्षमा में है।

– किसी एक व्यक्ति को त्यागने से यदि कुल की रक्षा होती है तो उस एक को छोड़ देना चाहिए। पूरे गांव की भलाई के लिए कुल को तथा देश की भलााई के लिए गांव को और अपने आत्म सम्मान की रक्षा के लिए सारी पृथ्वी को छोड़ देना चाहिए।

– एक ही सुगन्धित फूल वाले वृक्ष से जिस प्रकार सारा वन सुगन्धित हो जाता है, उसी प्रकार एक सुपुत्र से सारा कुल सुशोभित हो जाता है।

– जिस प्रकार चंद्रमा से रात्रि की शोभा होती है, उसी प्रकार एक सुपुत्र, अर्थात साधु प्रकृति वाले पुत्र से कुल आनन्दित होता है।

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