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मां नाराज होंगी तो जीवन में क्‍या रहेगी उलझन, जानिए ज्‍योतिष और मां का कनेक्‍शन

ज्योतिष शास्त्र में चंद्रमा को मां का कारक माना जाता है। कुछ अंशों में शुक्र का संबंध भी वात्सल्य से होता है।

कर्क राशि और चतुर्थ भाव का संबंध भी मां से होता है।

दुनिया में भगवान के दर्शन नहीं होते इसीलिए कहा जाता है भगवान ने मां बनाई है। ताकि मां के रुप में भगवान हमेशा आपके साथ में रह सके और आप हमेशा ईश्वर के दर्शन कर सकें। आइए जानते हैं ज्योतिष की नजर में मां का अर्थ –

मानव जीवन का सृजन करने के लिए ईश्वर ने नारी को बनाया। जब नारी अपनी शक्ति का प्रयोग करके जीवन का सृजन करती है तो उसे मां कहा जाता है। इस सृष्टि में सबसे ज्यादा पवित्र और करुणामयी सत्ता मां ही है। इसलिए भक्त भी ईश्वर को मां के रुप में पुकारते हैं। ऐसा करने से उन्हें ईश्वर की निकटता का जल्द अनुभव होता है। मां रुपी ईश्वर का लगातार प्यार मिलता रहता है। इसलिए देवियों को मां कहा जाता है।

ग्रहों से संबंध – ज्योतिष शास्त्र में चंद्रमा को मां का कारक माना जाता है। कुछ अंशों में शुक्र का संबंध भी वात्सल्य से होता है। कर्क राशि और चतुर्थ भाव का संबंध भी मां से होता है। चतुर्थ भाव के स्वामी ग्रह और चंद्रमा को मिलाकर मां की स्थिति देख सकते हैं। चंद्रमा से काफी हद तक मां की स्थिति जान सकते हैं।

मां का सम्मान नहीं करने पर – व्यक्ति को मानसिक तनाव का सामना करना पड़ता है। किसी ना किसी कारण से जीवन में उलझन बनी रहती है। व्यक्ति को मानसिक रोग या अवसाद हो जाते हैं। यात्राओं में व्यक्ति को समस्या होती है। व्यक्ति को जीवन में स्थिरता नहीं मिलती है।

मां को कष्टों से बचाने के उपाय – सोमवार के दिन सफेद वस्त्रों में शिव जी की पूजा करें। जहां तक हो सकते इस दिन अधिक से अधिक नम: शिवाय का जाप करें। सोमवार को निर्धनों में सफेद मिठाई या खीर बांटें। मोती सोच समझकर ही पहनें।

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First Published on January 10, 2018 2:44 pm

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