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साल 2017 के दो संवत्सरों का मूल्यांकन, नेताओं और अमीरों को प्रभु की याद ज्यादा सताएगी

Rashifal 2017: साल 2017 का आग़ाज़ संवत 2073 यानि 'साधारण' नामक संवत्सर में होगा, जिसके स्वामी सूर्यदेव होंगे।

साल के दो संवत्सरों का मूल्यांकन सदगुरु स्वामी आनंद जौहरी कर रहे हैं।

साल 2017 का आग़ाज़ संवत 2073 यानि ‘साधारण’ नामक संवत्सर में होगा, जिसके स्वामी सूर्यदेव होंगे। पर 28 मार्च 2017 को ‘विरोधीकृत’ नामक नये संवत्सर का आग़ाज़ होगा। 28 मार्च, 2017 से पहले साधारण नामक संवत्सर के राजा शुक्र होने से जहाँ शुक्र से सम्बंधित व्यापार में इजाफा होगा, वहीं बुध के मंत्री होने से नौकरशाही का मनमाना अप्रत्यक्ष नियंत्रण बढ़ेगा। पूरे साधारण संवत्सर में शासन के अजीबोग़रीब और बदलते निर्णयों से जनता हलकान रहेगी। शत्रुओं और विरोधियों के दमन की नवीन योजनायें बनेंगी। विरोधियों को तंग करने की प्रवृत्ति बढ़ेगी। बौद्धिक क्षमता और वाणी से सम्बंधित क्षेत्रों का विकास होगा। मुट्ठी भर लोग मौज करेंगे, बेहाल और बदहाल जनता अपनी छोटी सी चादर से कभी सर तो कभी पैर ढंकने की असफल कोशिश करेगी।

शनिदेव के सस्येश पुर्वधान्येश का पद संभालने से राष्ट्रीय व अंतर्राष्ट्रीय तनाव, झड़प और आतंकवाद की घटनाओं में इजाफा होता है। जनता के पास धन होते हुए भी भी धनविहीन जैसे अहसास का योग है। सरकार की इच्छा होते हुए भी उसकी योजनाएं प्रजा का भला करने में नाकाम सिद्ध होंगी। विचित्र फ़ैसले आमजन का तेल निकालेंगे। कोई सामाजिक विवाद और आन्दोलन सर उठायेगा। अनाज सड़ेंगे| कोई बीमारी, महामारी या अजीब सी समस्या हैरान करेगी। देव गुरु वृहस्पति के पश्चिम धान्येश होने से बड़ा अनिष्ट होकर भी टलता रहेगा। शुभ आयोजन और मंगल कार्यों की अधिकता होगी। अनाज की पैदावार अच्छी होगी। राजकुमार बुध के मेघेश होने से मंगल उत्सव और अध्यात्मिक आयोजनों में वृद्धि होगी। साहित्यकारों और ज्योतिषियों का महत्त्व बढेगा। मंगल के फलेश होने से जनहानि, लाल रंग के फलों की पैदावार में कमी, रोग से शोक होने की संभावना है।

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न्यायधीश शनि के धनेश होने से पैसा बाज़ार से गायब हो जायेगा। अभिजात्य और समृद्ध वर्ग अनेकानेक उलझन और विकारों से विचलित नज़र आएगा। पैसों की कमी से किसान दुखी रहेगा। व्यापारियों का धन की कमी से सर चकरायेगा। बड़े लोग मुसीबत में नज़र आयेंगे। बुध के दुर्गेश होने से राज्य और राष्ट्र एक दूसरे को नीचा दिखाने की साजिश करेंगे। राजा का मन उदास होगा। 28 मार्च 2017 से संवत 2074 का आग़ाज़ होगा, जिसे विरोधकृत नाम से पहचाना जाएगा। इसके राजा बुधदेव और मंत्री बृहस्पति देव होंगे। राजा बुध होने से अपने-अपने धर्म के प्रति आस्था गहरी होगी। उत्तम या अधिक वर्षा और मांगलिक कार्यों का योग बनेगा। तकनीक से लाभ उठाने के प्रयास में वृद्धि होगी।

मंत्री बृहस्पति होने से धान्य की तो बहुलता होगी, पर रहनुमाओं की आपसी खींचतान से समाज में अलग-तरह की बेचैनी तारी रहेगी। राजा की छवि निखरने का प्रयास वास्तविक नहीं, कृत्रिम नज़र आयेगा। राजा और उनके मन्त्रियों में परस्पर गुप्त मतभेद जन्म लेंगे। कई मामलों में शासन, प्रशासन के बयानों में अंतर दिखाई देगा। मंत्रिमण्डल में सस्येश पूर्वधान्येश यानि धान्यपति के पद पर सूर्य के विराजने से अपहरण, चोरी और धोखाधड़ी की घटनायें बढ़ेंगी। अपराध बढ़ेगा। देश के पूर्वी भाग में ज़्यादा अपराध नज़र आएगा। ऑनलाइन फ़्रॉड से इस साल लोग त्रस्त रहेंगे। राष्ट्रों में आपसी खींचतान और सैन्य झड़प का पूरा अंदेशा है। एक दूसरे का सैनिक अभ्यास विरोधियों को उकसायेगा भी और बेचैन भी करेगा। अधिक वर्षा से फ़सल को क्षति पहुँचेगी। धान्य सस्ता होकर मुनाफ़ाख़ोरी से महंगा होगा। पौधों और वृक्षों की संख्या बढ़ेगी।

पश्चिम धनेश के पद पर शनि देव के विराजने से दीवानी मुक़दमे अधिक दर्ज होंगे। सम्पत्ति विवाद चहुंओर से सर उठायेंगे। बिल्डरों और कारोबारियों पर मुक़दमें बढ़ेंगे। कुछ भाग जायेंगे, कुछ जेल जायेंगे। धन-धान्य के अभाव का स्पष्ट अनुभव होगा। दुग्ध की कमी होगी। फलस्वरूप दूध और गोरस से बने खाद्य पदार्थों की क़ीमतों में वृद्धि का योग है। विचित्र तरह के विकार फैलेंगे। लोगों के मन की उदासी और क्रूरता चिंता का विषय होगी। क्लेश और अलगाव बढ़ेगा।

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मेघेश पद पर देव गुरु वृहस्पति के विराजने से उत्तम वर्षा होगी। धान्य ख़ूब पैदा होकर रख रखाव के अभाव में सड़ेंगे। और उसकी पूर्ति आयात के माध्यम से होगी। रसीले पदार्थों की पैदावार बहुत होगी, पर कुछ पैदावार असामयिक बारिश की भेंट चढ़ेंगे तो कुछ कीड़ों का प्रसाद बनेंगे। फिर भी काफ़ी फल आम जन को उपलब्ध होंगे। यज्ञ, हवन और धार्मिक अनुष्ठानों में वृद्धि होगी। राजाओं, नेताओं और बड़े लोगों को इस बरस प्रभु की याद ज़्यादा सतायेगी। सुधारवादी नीतियां के दूरगामी लाभ आगे शायद आएं पर इस साल तो जनमानस का कचूमर निकल जाएगा।

मंगल के रसेश होने से शासन, प्रशासन प्रजा के प्रति क्रूर नज़र आयेगा। मुट्ठी भर लोगों के कारण आम जन को पीड़ा झेलनी होगी। रसीले पदार्थ महंगे होंगे। अच्छे उत्पादन के बावजूद बेमौसम या अनियमित बरसात अथवा कीड़ों से रसीली वस्तुओं को क्षति पहुंचेगी। सूर्य के निरसेश होने से आभूषण महंगा होने के बाद भी व्यापारी लाभ का भागी नहीं बनेगा। जनता की रुचि जवाहरात में कुछ कम होगी। लोगों के स्वभाव में धैर्य कम होगा, बेचैनी और झुंझलाहट बढ़ेगी।

बुध के फलेश होने से सीमित धन या संसाधन से अधिक लाभ की प्रवृत्ति या तकनीक का विस्तार होगा। व्यक्तिगत व पारिवारिक सम्बन्धों में मधुरता बढ़ेगी। पुष्पों का उत्पादन और निर्यात में वृद्धि की स्थिति बनेगी। धनेश पद पर सूर्य की उपस्थिति से ख़स्ता बाज़ार में भी नये धनी मोटा माल कमायेंगे। पशुओं के कारोबारी लाभ में होंगे। दुर्गेश पद पर वृहस्पति के विराजने से नीति के रूप में नवीन योजनाओं की अधिकता होगी। शहर से लेकर तक ग्राम तक के लोगों के लिए नवीन योजनाओं का सूत्रपात होगा। इनका लाभ इस बरस प्रत्यक्ष से ज़्यादा दस्तावेज़ों में बढ़-चढ़ कर नज़र आयेगा।

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First Published on December 29, 2016 7:38 pm