Devutthana Ekadashi 2018: 24 नवंबर को देवउठनी एकादशी मनाई जा रही है। कार्तिक मास की शुक्ल पक्ष की इस एकादशी को देवउठनी एकादशी या हरि प्रबोधिनी एकादशी भी कहा जाता है। माना जाता है आषाढ़ माह की देवशयनी एकादशी के बाद भगवान विष्णु चार माह के लिए क्षीर सागर में सोने चले जाते हैं और वह देवउठनी एकादशी के दिन जाग्रत हो जाते हैं। देवउठनी एकादशी के बाद ही हिंदू धर्म में शुभ कार्यों की शुरूआत होती है। इस दिन शलिग्राम से तुलसी विवाह भी किया जाता है। इस एकादशी को सबसे शुभ और मंगलकारी माना जाता है। कहा जाता है इस दिन व्रत करने से 100 अश्वमेघ यज्ञ का फल मिलता है। इन कार्यों की मनाही –
1. भगवान विष्णु को यह दिन बहुत प्रिय होता है। कहा जाता है इस दिन जो लोग व्रत नहीं कर सकते हैं उन्हें प्याज, लहसुन, अंडा, मांस आदि तामसिक भोजन से दूर रहना चाहिए। कहा जाता है इस दिन ऐसा करने वाले को नरक में स्थान मिलता है।
2. इस दिन चावल खाने की मनाही होती है। कहा जाता है इस दिन जो व्यक्ति चावल खाता है वह व्यक्ति जानवर जो रेंगकर चलता है उसकी योनी में जन्म पाता है। लेकिन द्वादशी को चावल खाने से वह इस योनि से मुक्ति पाता है।
3. इस दिन ब्रह्मचार्य का पालन करना चाहिए। इस दिन शारीरिक संबंध बनाने से बचना चाहिए।
4. कहा जाता है इस दिन किसी के साथ झगड़ा नहीं करना चाहिए। अपने मन को शांत रखना चाहिए। इस दिन घर में शांति रखने से मां लक्ष्मी प्रसन्न होती है और आर्थिक तंगी दूर होती है।
5. एकादशी को दिन में सोना नहीं चाहिए। सुबह जल्दी उठकर भगवान विष्णु की आराधना करनी चाहिए। इस दिन शराब पीने से परहेज करना चाहिए।
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