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फिर चुनावी चर्चा में बजरंग बली, जानिए इनके बारे में कुछ पौराणिक बातें

हमारे पुराणों और शास्त्रों के अनुसार भगवान हनुमान ब्रह्मचारी थे लेकिन शास्त्रों में उनके पुत्र के होने का वर्णन मिलता है। माना जाता है कि जब लंका में भगवान हनुमान की पूछ में आग लगाई गई थी तब वह अपनी पूंछ की आग को बुझाने के लिए समुद्र में कूद गए थे।

भगवान हनुमान।

चुनावी माहौल में एक बार फिर बजरंग बली को लेकर चर्चा चल रही है। उत्तरप्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने मेरठ की एक रैली को संबोधित करते हुए कहा कि ‘अगर कांग्रेस, सपा और बसपा को ‘अली’ पर विश्वास है तो हमें भी बजरंगबली पर विश्वास है’। ये ऐसा पहले मौका नहीं है जब योगी ने इस तरह की ब्यानबाजी की हो। इससे पहले भी वो कई मौको पर बजरंगबली हनुमान को लेकर बयान दे चुके हैं। योगी आदित्यनाथ भगवान हनुमान की जाति तक बता चुके हैं।

आपको बता दें कि हिंदू धर्म में बजरंग बली को सबसे शक्तिशाली भगवानों में से एक माना जाता है। बड़ी संख्या में लोग इनकी पूजा करते हैं। रामायण में ऐसे तो बहुत से पात्र थे जिनकी अद्भुत शक्तियों से हर कोई परिचित है। लेकिन उनमें से भगवान राम के अलावा हनुमान जी ही ऐसे थे जिन्हें भगवान की उपाधि प्राप्त हुई। इसीलिए राम के साथ हनुमान के भी मंदिर देखने को मिलते हैं। यहां जानिए भगवान हनुमान से जुड़ी कुछ रोचक और पौराणिक कथाएं:

हनुमान जी ने शरीर पर क्यों लगाया था सिंदूर:

हनुमान जी के सिंदूर लगाने के पीछे एक दिलचस्प पौराणिक गाथा है। उस कथा के अनुसार भगवान हनुमान ने एक बार माता सीता को सिंदूर लगाते हुए देखा इस पर उन्होंने इस सिंदूर को लगाने की वजह पूछी। तब माता सीता ने बताया की यह उनका भगवान श्रीराम के लिए प्रेम और सम्मान का प्रतीक है। माता सीता की इस बात को सुनकर भगवान हनुमान ने तुरंत ही अपने पूरे शरीर पर सिंदूर लगा लिया। जिससे वह भगवान राम के प्रति अपना प्रेम और सम्मान दिखा सकें। कहा जाता है कि उस दिन भगवान राम ने हनुमान जी के इस रूप से प्रसन्न होकर उन्हें आशीर्वाद दिया कि जो भक्त उन्हें सिंदूर अर्पित करेगा उनकी सभी मनोकामनाएं पूरी होंगी।

भगवान हनुमान के पुत्र की गाथा:

हमारे पुराणों और शास्त्रों के अनुसार भगवान हनुमान ब्रह्मचारी थे लेकिन शास्त्रों में उनके पुत्र के होने का वर्णन मिलता है। माना जाता है कि जब लंका में भगवान हनुमान की पूछ में आग लगाई गई थी तब वह अपनी पूंछ की आग को बुझाने के लिए समुद्र में कूद गए थे। जिस दौरान उनके शरीर से पसीना टपक कर एक मछली के मुख में चला गया था। जिससे उस मछली के पेट से मकरध्वज नामक एक पुत्र का जन्म हुआ।

भगवान हनुमान के पांच भाई:

माना जाता है कि माता अंजनी और वानरराज केशरी के हनुमान के अलावा ओर भी पुत्र थे। ब्रह्मांडपुराण के अनुसार भगवान हनुमान के कुल पांच भाई थे जिनमें हनुमानजी सबसे बड़े भाई थे। भगवान हनुमान के भाइयों के नाम मतिमान, श्रुतिमान, केतुमान, गतिमान और धृतिमान थे।

देवी सीता से मिला अमर रहने का वरदान:

माना जाता है हनुमान जी को अमर रहने का वरदान मिला था। वाल्मीकि रामायण के अनुसार, उन्हें यह वरदान देवी सीता ने दिया था। सीता की खोज में निकले भगवान हनुमान ने लंका पहुंचकर जैसे ही देवी सीता को भगवान राम का संदेश सुनाया उससे माता बहुत प्रसन्न हो गईं। खुश होकर माता सीता ने हनुमानजी को अपनी अंगूठी दी और साथ ही अमर होने का वरदान भी दे दिया।

ऐसे मिला शक्तिशाली होने का वरदान:

कहा जाता है कि हनुमान जी स्वभाव के बेहद चंचल थे। वाल्मीकि रामायण के अनुसार, भगवान हनुमान को बालपन में जब भूख लगी तो माता अंजनी ने उन्हें लाल रंग का फल खाने के लिए कहा। स्वभाव के नटखट हनुमान सूर्य भगवान को फल समझकर खाने के लिए दौड़े। इस बात से घबराए हुए देवराज इंद्र ने हनुमानजी पर वज्र से वार कर दिया। जिससे हनुमान तुंरत बेहोश होकर धरती पर गिर गए। क्योंकि भगवान हनुमान पवन पुत्र थे इसलिए इस बात से क्रोधित होकर वायुदेव ने सारे संसार की वायु रोक दी। जिससे संसार के सभी लोग परेशानी में आ गए। तब ब्रह्म देव के द्वारा भगवान हनुमान होश में आए और फिर पवन देव को समझाया। उसके बाद सभी देवताओं ने हनुमानजी को अपनी-अपनी शक्तियों का वरदान दिया। जिससे हनुमान जी बेहद ही शक्तिशाली और बलवान बन गए।

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First Published on April 10, 2019 4:09 pm

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