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पवित्र ग्रंथ रामायण के अनुसार मुसीबत के समय इन 4 चीजों की हो जाती है पहचान

रामायण के एक दोहे से यह जानकारी मिलती है कि किसी भी व्यक्ति के धैर्यवान होने का पता संकट के समय ही लगता है। जैसे जब भगवान राम को लंका तक पहुंचने के लिए समुद्र पार करना था। जिसे लेकर वानर सेना चिंता में आ गई। लेकिन भगवान राम ने धैर्य पूर्वक कठिन सागर को पार करने का रास्ता निकाल लिया।

रामायण के अनुसार मुसीबत के समय धैर्य, धर्म, मित्र और नारी की पहचान हो जाती है।

रामायण का ज्ञान: हमारे ग्रंथों और शास्त्रों में कई ऐसी बाते बताई गईं हैं जो मनुष्य के लिए आज के समय में काफी लाभकारी साबित हो सकती हैं। इनके माध्यम से जीवन की हर समस्या का समाधान मिल सकता है। यह ग्रंथ हमे धर्म का ही पाठ नहीं पढ़ाते बल्कि जीवन से जुड़ी बहुत सी ऐसा बातों की जानकरी देते हैं जिनका इस्तेमाल करके हम अपने जीवन को सफल बना सकते हैं। कहते हैं कि मुसीबत के समय इस बात का पता चल जाता है कि कौन आपके सुख का साथी है और कौन सुख के साथ-साथ दुख का भी। पवित्र ग्रंथ रामायण में इस बारे में कहा गया है कि मुसीबत के समय इन चार चीजों की अच्छे से पहचान हो जाती है…

धीरज धर्म मित्र अरु नारी। आपद काल परिखिअहिं चारी॥ 

बृद्ध रोगबस जड़ धनहीना। अंध बधिर क्रोधी अति दीना॥

– रामायण का यह दोहा इस बात की जानकारी देता है कि किसी भी व्यक्ति के धैर्यवान होने का पता संकट के समय ही लगता है। जैसे जब भगवान राम को लंका तक पहुंचने के लिए समुद्र पार करना था। जिसे लेकर वानर सेना चिंता में आ गई। लेकिन भगवान राम ने धैर्य पूर्वक कठिन सागर को पार करने का रास्ता निकाल लिया।

– परेशानियों के समय ही इस बात की भी परख की जाती है कि क्या व्यक्ति अपने धर्म का मार्ग छोड़ेगा या नहीं। क्योंकि धर्म के मार्ग पर चलने वाले व्यक्ति का ही जीवन सार्थक होता है। अत: जीवन में चाहे कितनी ही मुसीबतें क्यों ना आ जाए इंसान को अपने धर्म का मार्ग कभी नहीं छोड़ना चाहिए। जैसे भगवान राम ने अपने जीवनकाल में हमेशा धर्म का सम्मान किया और लोगों को धर्म की राह पर चलने का ज्ञान दिया।

– सच्चे मित्र की पहचान मुसीबत के समय ही होती है। रामायण में भगवान राम ने कहा है हमें मित्रों के छोटे से दुख को भी पहाड़ के समान और अपने दुखों को धूल के समान समझना चाहिए। भगवान राम ने वानर राज सुग्रीव को अपना मित्र बनाया और सुग्रीव ने उन्हें रावण से युद्ध करने में सहायता की।

– दुख के समय अच्छी पत्नी की भी परख हो जाती है। जो पत्नी विपरित परिस्थिति में हर कदम पर साथ चले और अपने पति का मनोबल नहीं टूटने दे तो ऐसी पत्नी पूजनीय है। जैसे माता सीता ने भगवान राम के साथ 14 वर्षों तक वनवास भोगा। उनके हर सुख दुख में उनके साथ खड़ी रहीं।

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First Published on June 10, 2019 11:01 am

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