Rajyog In Kundli: वैदिक ज्योतिष में ग्रहों की विशेष स्थिति होने से कई विशेष योगों का निर्माण होता है। इन योगों के बनने से व्यक्ति के स्वभाव, भाग्य, आर्थिक स्थिति, सामाजिक प्रतिष्ठा, पारिवारिक जीवन से लेकर करियर, बिजनेस में भी असर देखने को मिल सकता है। अलग- अलग योग बनने से व्यक्ति के जीवन में अलग-अलग प्रकार के परिणाम देखने को मिल सकते हैं। ऐसे ही मंत्रेश्वर का ग्रंथ फलदीपिका में ऐसे 5 योगों के बारे में बताया गया है जिनके कुंडली में बनने से सुखों की प्राप्ति हो सकती है। शौर्य योग, अम्बुधि योग, छत्र योग, अस्त्र योग और कामज योग प्रमुख हैं। आइए ‘कुंडली रहस्य’ की श्रृंखला में जानते हैं इन योगों के कुंडली में बनने से व्यक्ति के जीवन में कैसा होता है प्रभाव और इनके द्वारा मिलने वाले शुभ फलों के बारे में…
शौर्य योग में जन्मा व्यक्ति
कीर्तिमद्यिरनुजैरभिष्टुो लालितो महितविक्रमयुक्तः।
शौर्यजो भवति राम इवासौ
राजकार्यनिरतोऽतियशस्वी॥१४७॥
अगर तृतीय भाव में शुभ ग्रह हो या फिर इस भाव को शुभ ग्रह देखता है और तृतीय भाव का स्वामी अस्त न हो और अपनी राशि या उच्च राशि में स्थित होकर उत्तम स्थान में हो, तो शौर्य योग का निर्माण होताहै। यदि जन्म कुंडली में ‘शौर्य योग’ बनता है, व्यक्ति काफी पराक्रमी होता है और उसका छोटे भाई यशस्वी, प्रिय तथा प्रशंसित होता है। वह महान पराक्रम, साहस और वीरता से युक्त होता है। इसके भाई लोग जातक की प्रशंसा भी करते हैं। साधारण शब्दों में कहे, तो तृतीय स्थान का भाई-बहन बहुत की पराक्रमी होती है। ये राज्य कार्य करते हैं और सरकारी कामों में अच्छे ओहदे में होते हैं। उसका व्यक्तित्व श्रीराम के समान मर्यादित, कर्तव्यनिष्ठ और आदर्श माना जाता है। ये समाज में अत्यधिक यश, सम्मान और प्रतिष्ठा प्राप्त करता है।
अम्बुधि योग में जन्मा व्यक्ति
गोसंपद्धनधान्योशोभिसदनं बन्धुप्रपूर्णं वर-
स्त्रीरत्नाम्बरभूषणानि महितस्थानं च सर्वोत्तमम् ।
प्राप्नोत्यम्बुधियोगज: स्थिरसुखो हस्त्यश्वयानादिगो राजेड्यो द्विजदेवकार्यनिरत: कूपप्रपाकृत्पथि१४८॥
यदि चतुर्थ स्थान में शुभ ग्रह हों या शुभ ग्रह चतुर्थ स्थान को देखते हों, चतुर्थेश अस्त न हो और अपनी स्वराशि या उच्च राशि में स्थित होकर उत्तम स्थान में हो तो अम्बुधि या जलधि योग होता है। अम्बुधि या जलधि समुद्र को कहते हैं। इस योग में उत्पन्न मनुष्य को गौ संपत्ति (गाय, बैल आदि) धन-धान्य, आदि पर्याप्त मात्रा में प्राप्त होते हैं। इसका मकान बहुत सुंदर होता है। बंधुओं की बहुतायत रहती है। अर्थात बंधुओ से सुख प्राप्त होता है। उत्तम स्त्री, रत्न, वस्त्र, भूषण आदि के साथ-साथ आदरणीय उत्तम स्थान प्राप्त होता है। दीर्घ काल तक वह सुख भोगता रहता है। उसे हाथी, घोड़े आदि का पूर्ण सुख प्राप्त हो और राजा भी उसका सम्मान करे। ऐसे मनुष्य देवताओं और ब्राह्मणों के भक्त अर्थात् धार्मिक कार्यों में प्रवृत्त रहते हैं और कुएं, बावड़ी, प्याऊ लगवाना आदि कार्य करते रहते हैं। संक्षेप में चतुर्थ युग स्थान से बन्धु, सुख, मकान, सवारी, जलकार्य, आदि जितनी बातों का विचार किया जाता है उन सबका सुख जातक को प्राप्त होता है।
छत्र योग में जन्मा व्यक्ति
सुसंसारसौभाग्यसंतानलक्ष्मी
निवासो यशस्वी सुभाषी मनीषी।
अमात्यो महीशस्य पूज्यो धनाढ्यः
स्फूरत्तीक्ष्णबुद्धिर्भवेच्छत्रयोगो॥१४९॥
फलदीपिका के अनुसार, यदि पंचम भाव में शुभ ग्रह हों या इसे देखते हों और पांचवें घर का मालिक अस्त न हो और अपनी राशि का या अपनी उच्च राशि में स्थित होकर उत्तम स्थान में बैठा हो तो ‘छत्र योग’ होता है। ऐसा जातक संसार के सब सौभाग्यों से युक्त, संतान सुख द्वारा युक्त, यशस्वी, बुद्धिमान, उत्तम भाषण करने वाला, तीक्ष्ण बुद्धि, जिसकी बहुत स्फूर्ति हो। राजा का मंत्री होता है। ऐसे व्यक्ति को राजा या सरकार से सम्मान प्राप्त होता है। संक्षेप में पंचम भाव और पंचम भावेश के सुन्दर जाने से पंचम भाव संबंधी सब सुख प्राप्त होते हैं। उसकी बुद्धि तीव्र, निर्णय क्षमता मजबूत और कार्य करने की क्षमता प्रभावशाली होती है।
अष्ट योग में जन्मा व्यक्ति
शत्रुन् बलिष्ठान् बलवन्निगृहस्त्र क्रूरप्रवृत्या सहितोऽभिमानी।
व्रणाड्किताड्गश्च विवादकारी स्यादस्त्रयोगे
दृढ़गात्रयुक्त:॥१५०॥
यदि छठे भाव का स्वामी अस्त न होकर स्वराशि या उच्च राशि में स्थित होकर उत्तम स्थान में बैठा हो और छठा भाव शुभ ग्रह गुरु या शुभग्रहों से वीक्षित हो तो ‘अष्ट योग’ होता है। साधारणतः छठा स्थान दुःस्थान या त्रिकष्ट स्थान समझा जाता है किंतु छठे का स्वामी छठे में हो तो इसे खराब नहीं कहेंगे क्योंकि वह स्वगृही हुआ। प्रायः ज्योतिषी इस कारण से कि छठे घर में पाप ग्रह का होना अच्छा है “षष्ठे पापाः विलग्नं प्रयुञ्जुः” उनके कथन का आधार यह होता है कि छठा शत्रु स्थान है। पाप ग्रह शत्रुओं का नाश करेगा इसलिये उत्तम है। यह भी प्रसिद्ध उक्ति है कि 3, 6, 11 इन स्थानों में मंगल, शनि, राहु हों तो उत्तम हैं। इसका भी आशय यही है कि पाप ग्रह छठे में रहकर शत्रु और रोग को नष्ट करेगा। अब मन्त्रेश्वर महाराज का मत लीजिए। वे इस सिद्धांत को पकड़ते हैं कि किसी भाव का सुख तभी प्राप्त होता है जब भावेश बलवान हो। इसमें तो किसी को आपत्ति हो ही नहीं सकती। किंतु दूस्थान का स्वामी किसी दुस्थान में बैठे तो भी अच्छा ही माना जाता है।
जो अष्ट योग में पैदा होता है वह बड़े बड़े बलवान शत्रुओं को अपनी जबरदस्त ताकत से दबा देता है। बहुत क्रूर प्रवृत्ति वाला अभिमानी होता है। ऐसे व्यक्ति के शरीर के अवयव दृढ़ (मजबूत) होते हैं। किंतु शरीर में घाव, चोट के चिह्न भी होते हैं। अष्ट योग में उत्पन्न व्यक्ति विवादकारी होता है। वह जीवन में संघर्षों का सामना करते हुए अपनी शक्ति और साहस से आगे बढ़ता है।
कैसे होते हैं सिंह लग्न के लोग, जानें उनका स्वभाव, व्यक्तित्व से लेकर करियर तक
कामज योग में जन्मा व्यक्ति
परदारपराड्मुखो भवेद्वरारात्मजबन्धुसंश्रित:
जनकादधिक: शुभैर्गणैर्महनीयां श्रियमेति कामज:
यदि सप्तम स्थान पर शुभ ग्रहों की दृष्टि हो और सप्तम स्थान में शुभ ग्रह बैठे हो और सप्तम स्थान का स्वामी स्वराशि या उच्च राशि का होकर उत्तम स्थान पर बैठा हो तो ‘कामज’ योग होता है। सप्तमेश अस्त नहीं होना चाहिए। जो व्यक्ति काम योग में उत्पन्न होते हैं वे लोग व्यभिचारी नहीं होते। ऐसे व्यक्ति को उत्तम स्त्री, संतान और नौकरों का सुख प्राप्त होता है। ऐसा आदमी अपने शुभ गुणों से बहुत लक्ष्मी प्राप्त करता है और अपने पिता से अधिक उच्च पदवी प्राप्त करता है। शुभ गुणों से युक्त होकर वह समाज में प्रतिष्ठा, धन-संपत्ति और सम्मानित स्थान प्राप्त करता है।
निष्कर्ष
जन्मकुंडली में बनने वाले योग व्यक्ति के जीवन की दिशा और संभावनाओं को दर्शाते हैं। शौर्य योग पराक्रम और प्रसिद्धि, अम्बुधि योग धन एवं ऐश्वर्य, छत्र योग सम्मान और उच्च पद, अस्त्र योग शक्ति और संघर्ष क्षमता तथा कामज योग सदाचार और पारिवारिक सुख प्रदान करने वाला माना गया है। हालांकि किसी भी योग का पूर्ण फल जानने के लिए ग्रहों की स्थिति, राशि, भाव, दृष्टि, दशा और संपूर्ण जन्मकुंडली का अध्ययन आवश्यक होता है। केवल एक योग के आधार पर जीवन का अंतिम निर्णय नहीं किया जा सकता है।
डिस्क्लेमर: इस लेख में दी गई ज्योतिषीय जानकारी पारंपरिक मान्यताओं और शास्त्रीय संदर्भों पर आधारित है। ज्योतिष एक विश्वास और अध्ययन की परंपरा है, इसे वैज्ञानिक रूप से प्रमाणित भविष्यवाणी की विधि नहीं माना जाता। राशिफल और ज्योतिषीय विश्लेषण को मार्गदर्शन या मनोरंजन के रूप में लें। किसी भी महत्वपूर्ण निर्णय (जैसे स्वास्थ्य, करियर, वित्त या अन्य जीवन संबंधी मामलों) के लिए अपने विवेक और विशेषज्ञ सलाह को प्राथमिकता दें।
