Rajyog In Kundli: वैदिक ज्योतिष शास्त्र में ग्रहों की स्थिति के हिसाब से विभिन्न तरह के योगों का निर्माण होता है। जिसमें से कुछ योगों के बारे में कई लोग जानते हैं। लेकिन कुछ ऐसे योग होते है जिनके बारे में हमें ज्यादा नहीं पता होता है लेकिन इन योगों के कुंडली में बनने से राजसी सुख की प्राप्ति हो सकती है। ऐसे ही त्रिदेव यानी ब्रह्मा, विष्णु और महेश के नाम पर तीन योग है। ज्योतिष शास्त्र मे वर्णित श्रीकंठ योग, श्रीनाथ योग और विरिञ्च योग अत्यंत दुर्लभ योगों में गिने जाते हैं।

फलदीपिका ग्रंथ के छठे अध्याय ‘योग’ के अनुसार इन योगों में जन्म लेने वाला व्यक्ति आध्यात्मिक, धार्मिक, विद्वान, तेजस्वी और समाज में मान-सम्मान पाता है। इन योगों का प्रभाव व्यक्ति के स्वभाव, आचरण, ज्ञान, धन, पारिवारिक सुख तथा आध्यात्मिक उन्नति पर स्पष्ट रूप से दिखाई देता है। आज ‘कुंडली रहस्य’ में जानें श्रीकंठ योग, श्रीनाथ योग और विरिञ्च योग का निर्माण कैसे होता है इन योगों में जन्म लेने वाले जातकों के जीवन में क्या असर देखने को मिलता है…

कुंडली में कैसे बनता है श्रीकंठ, श्रीनाथ और विरिञ्च योग?

श्लोक

लग्नाधीशभास्करामृतकराः केन्द्रत्रिकोणाश्रिताः
स्वोच्चस्वर्क्षसुहृद्गृहानुपगताः श्रीकण्ठयोगो भवेत् ।
तद्वद्भागवभाग्यनाथशशिजाः श्रीनाथयोगस्तथा
वागीशात्मपसूर्यजा यदि तदा वैरिञ्चियोगस्ततः ॥२८॥

श्रीकंठ योग- अगर लग्न का स्वामी, सूर्य और चन्द्रमा अपनी स्वराशि मित्र राशि या उच्च राशि में स्थित होकर केंद्र (1, 4, 7, 10) अथवा त्रिकोण (1, 5, 9) भावों में स्थित हों, तो श्रीकंठ योग बनता है।

श्रीनाथ योग- यदि बुध, शुक्र और भाग्य स्थान का स्वामी यह तीनों उच्च राशि, स्वराशि या मित्र राशि में स्थित होकर, लग्न से केन्द्र या त्रिकोण में हों तो श्रीनाथ योग होता है ।

विरिञ्चि योग- यदि पंचम का स्वामी, बृहस्पति और शनि ये तीनों उच्च राशि, स्वराशि या मित्र राशि में स्थित होकर लग्न से केंद्र या त्रिकोण में हों तो विरिञ्चि योग होता है।

टिप्पणी- शास्त्र अनुसार यदि इन योगों के ग्रह उच्च राशि में हों तो योग का पूर्ण और श्रेष्ठ फल मिलता है। यदि वे स्वराशि में हों तो फल थोड़ा कम होता है, और यदि मित्र राशि में हों तो भी शुभ फल मिलता है, लेकिन उसकी तीव्रता अपेक्षाकृत कम होती है। साथ ही, ग्रहों की वास्तविक शक्ति (षड्बल आदि), विशेष रूप से लग्नेश, सूर्य और चंद्रमा की मजबूती, इन योगों के प्रभाव को और अधिक बढ़ा देती है।

श्रीकंठ योग में पैदा हुए जातक

अगर किसी जातक की जन्म के समय श्रीकंठ योग बन रहा है, जो वह भगवान शिव का प्रिय होता है। उनका मन अध्यात्म की ओर काफी अधिक लगता है। ऐसे में वह पूजा-पाठ, ध्यान या फिर धार्मिक कार्यक्रमों में लगा रहता है। वह काफी ईमानदार होने के साथ-साथ सदाचारी और अनुशासित जीवन जीना पसंद करता है। ऐसे लोग दूसरों की मदद करने में पीछे नहीं हटते हैं। ऐसा व्यक्ति साधु, संत सहित अन्य विद्वानों का उपकार करता है। ये दूसरे धार्मिक सम्प्रदायों से भी किसी भी प्रकार की घृणा नहीं करते हैं। उनके लिए भी सम्मान का भाव रखते हैं। शिव जी की कृपा से व्यक्ति का व्यक्तित्व तेज, शांति और आध्यात्मिक रूप से आकर्षण वाला होता है। इसी के कारण समाज भी इनका सम्मान करता है।

रुद्राक्षाभरणो विभूतिधवलच्छायो महात्मा शिवं
ध्यायत्यात्मनि सन्ततं मुनियमः शैवव्रते दीक्षितः ।
साधूनामुपकारकः परमतेष्वेव नसूयो भवेत्
तेजस्वी शिवपूजया प्रमुदितः श्रीकण्ठयोगोद्भवः ॥२९॥

श्रीनाथ योग में पैदा हुए जातक

फलदीपिका के अनुसार,  जो व्यक्ति श्रीनाथ योग में उत्पन्न होगा, तो उसके ऊपर मां लक्ष्मी की विशेष कृपा बनी रहती हैं। ऐसे में वह काफी धनवान होता है। इनकी वाणी काफी प्रभावशाली होती है। ये अपने वचनों से दूसरों को प्रसन्न करने में निपुण होते हैं। ये भगवान विष्णु को मानते हैं और इनकी पूजा में रमे रहते हैं। इनके शरीर में  भगवान नारायण के चिह्न यानी शंख, चक्र आदि बने होते हैं।  ऐसे व्यक्ति अन्य सज्जनों के साथ सदैव भगवान विष्णु से संबधी नामावली, स्त्रोत, भजन आदि करते करते हैं। ये पूरे मन से ये कार्य करते हैं। जो लोग श्रीनाथ योग में उत्पन्न होते हैं वे स्वयं बड़े सुन्दर होते हैं और उनके दर्शन कर अन्य लोगों के नेत्रों को भी बहुत आनंद प्राप्त होता है। उन्हें सुंदर जीवनसाथी, योग्य संतान, सुखी परिवार और आर्थिक समृद्धि प्राप्त होती है। इनका व्यक्तित्व काफी आकर्षक होता है।  

लक्ष्मीवान् सरसोक्तिचाटुनिपुणो नारायणाङ्काङ्कितः
तन्नामाङ्कितहृद्यपद्यमनिशं संकीर्तयन् सज्जनैः ।
तद्भक्तापचितौ प्रसन्नवदनः सत्पुत्रदारान्वितः
सर्वेषां नयनप्रियोऽतिसुभगः श्रीनाथयोगोद्भवः ॥ ३० ॥

विरिञ्चि योग में जन्मे जातक

फलदीपिका के अनुसार, विरिञ्चि योग में उत्पन्न जातक बहुत बुद्धिमान होते हैं। ये काफी विद्वान और ज्ञानवान होते हैं। इन्हें वेद, शास्त्र और आध्यात्मिक विषयों का ज्ञान पाने में काफी अधिक रुचि होती है। इन्हें हमेशा सही मार्ग में चलना पसंद होता है। ये किसी भी प्रकार से अपने सिद्धांतों से समझौता नहीं करते हैं। ये सौम्य वचन वाले होते हैं।वाणी शांत होने के साथ प्रभावशाली होती है, जिससे हर कोई इसे प्रेरित होता है। उन्हें धन, संतान, जीवनसाथी के साथ परिवार का सुख प्राप्त होता है। ऐसे व्यक्ति के चेहरे से ज्ञान और तेज की चमक दिखाई देती हैं। ऐसे व्यक्ति दीर्घायु, आत्मसंयमी होने के साथ समाज में सम्मानित होते हैं। राजा के लोग यानी बड़े-बड़े अधिकारी या शासक भी उसका सम्मान करते हैं।

ब्रह्मज्ञानपरायणो बहुमतिर्वेदप्रधानो गुणी
हृष्टो वैदिकमार्गतो न चलति प्रख्यातशिष्यव्रजः ।
सौम्योक्तिर्बहुवित्तदारतनयः सद्ब्रह्मतेजोज्वलन्दी-
र्घायुर्विजितेन्द्रियो नतनृपो वैरिञ्चियोगोद्भवः ॥ ३१ ॥

निष्कर्ष- ये तीनों योग व्यक्ति को केवल भौतिक सुख ही नहीं, बल्कि धार्मिक, आध्यात्मिक और सामाजिक प्रतिष्ठा भी प्रदान करने वाले शुभ योग माने गए हैं।

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डिस्क्लेमर: इस लेख में दी गई ज्योतिषीय जानकारी पारंपरिक मान्यताओं और शास्त्रीय संदर्भों पर आधारित है। ज्योतिष एक विश्वास और अध्ययन की परंपरा है, इसे वैज्ञानिक रूप से प्रमाणित भविष्यवाणी की विधि नहीं माना जाता। राशिफल और ज्योतिषीय विश्लेषण को मार्गदर्शन या मनोरंजन के रूप में लें। किसी भी महत्वपूर्ण निर्णय (जैसे स्वास्थ्य, करियर, वित्त या अन्य जीवन संबंधी मामलों) के लिए अपने विवेक और विशेषज्ञ सलाह को प्राथमिकता दें।