ज्योतिष शास्त्र और वैदिक ज्योतिष के मुताबिक प्रत्येक राशि के व्यक्ति का स्वभाव अलग होता है, क्योंकि हर राशि का किसी न किसी ग्रह से संबंध होता है और इन्हीं ग्रहों का प्रभाव उसके व्यक्तित्व पर पड़ता है। ज्योतिष शास्त्र के मुताबिक बारह नक्षत्रों से मिलकर और बारह खंडों मेष, वृष, मिथुन, कर्क, सिंह, कन्या, तुला, वृश्चिक, धनु, मकर, कुंभ और मीन में विभाजित होकर 12 राशियां बनती हैं। हर राशि का अपना प्रतीक चिन्ह, खूबी, कमजोरियां, विशिष्ट लक्षण और दृष्टिकोण आदि होता है। वैदिक ज्योतिष और हिंदू मान्यताओं के मुताबिक प्रत्येक व्यक्ति के जीवन और उसके व्यक्तित्व पर उसकी राशि का सबसे महत्वपूर्ण प्रभाव है। वहीं प्रत्येक राशि में एक विशेष तत्व की प्रधानता पाई जाती है जिसके आधार पर राशियों को चार वर्गों में बांटा गया है। इनमें जल, अग्नि, पृथ्वी और वायु तत्व प्रधान चिह्न शामिल हैं। कर्क, वृश्चिक और मीन, जैसा कि इनके नाम से पता चलता है, इन राशियों को जल तत्व प्रधान माना जाता है। मेष, सिंह और धनु को अग्नि तत्व माना जाता है, मिथुन, तुला और कुंभ राशि को वायु प्रधान माना जाता है, जबकि वृषभ, कन्या और मकर राशि को पृथ्वी तत्व प्रधान माना जाता है। राशियों को भी लिंग के आधार पर विभाजित किया जाता है। मेष, मिथुन, सिंह, तुला, धनु, कुंभ राशि को पुरुष राशियां माना जाता है, जबकि वृष, कर्क, कन्या, वृश्चिक, मकर और मीन को स्त्री माना जाता है।