Effect on Budh In 12th House: ज्योतिष शास्त्र में बुध को नवग्रह में महत्वपूर्ण स्थान दिया गया है। बुध को ग्रहों का राजकुमार माना जाता है। जन्मकुंडली में मौजूद बुध हर भाव में अलग-अलग असर डालता है। मन्त्रेश्वर द्वारा रचित ‘फलदीपिका’ में बुध के भावों के बारे में विस्तार से बताया गया है। इसे भारतीय ज्योतिष का एक प्रमुख ग्रंथ माना जाता है। आइए जानते हैं बुध के 12 भावों में जाने पर मानव जीवन में क्या-क्या असर देखने को मिल सकते हैं…
वैदिक ज्योतिष शास्त्र में बुध को तर्क-वितर्क, मान-सम्मान, शिक्षा, एकाग्रता, व्यापार, संचार कौशल, बुद्धि, वाणी, गणित आदि का कारक माना जाता है। ऐसे में बुध की स्थिति में बदलाव का असर इन क्षेत्रों में काफी अधिक देखने को मिल सकता है। ‘फलदीपिका’ ग्रंथ के आठवें अध्याय में इस बारे में विस्तार से बताया गया है।
12 भाव में बुध का फल
लग्न भाव में बुध
जब किसी जातक की गोचर कुंडली के लग्न भाव में बुध है, तो वह व्यक्ति शास्त्रों में विद्वान, मधुर होने के साथ-साथ चतुर वाणी बोलने वाला हो सकता है। इसके साथ ही वह व्यक्ति दीर्घायु होता है।
दूसरे भाव में बुध
अगर दूसरे भाव में बुध है, तो वह व्यक्ति काफी बुद्धिमान होता है। अपनी इसी बुद्धिमानी के कारण काफी पैसा कमा पाने में सफल हो जाता है। इनकी वाणी काफी निर्मल होती है। ऐसे में ये हर किसी के चाहते होते हैं। इन्हें भोजन में मीठी चीजें ज्यादा पसंद होती है।
तीसरे भाव में बुध
अगर किसी जातक की कुंडली में तीसरे भाव में बुध है, तो इसका मतलब है कि वह व्यक्ति काफी साहसी, शूरवीर है। लेकिन इनकी आयु काफी कम होती है। इन्हें छोटे से छोटे काम में अधिक मेहनत करनी पड़ती है। लेकिन फिर भी ये अत्यंत लाचार और आर्थिक स्थिति से कमजोर होते हैं। इनके छोटे भाई-बहन भी होते हैं।
चौथे भाव में बुध
चौथे भाव में बुध के होने से वह व्यक्ति काफी विद्वान, चाटु वाक्य कहने वाला है यानी किसी बात से दूसरों को आसानी से प्रसन्न कर लेते हैं। ऐसे में इन्हें मित्र का साथ मिलता है। ये काफी धनवान होते हैं। इसके साथ ही क्षेत्र, धान्य की प्राप्ति होती है और ये काफी सुखी होते हैं।
पंचम भाव में बुध
बुध के पंचम भाव में होने से सुख और प्रताप की वृद्धि होती है। काफी विद्वान, मंत्र शास्त्र के ज्ञाता माने जाते हैं।
छठे भाव में बुध
अगर किसी जातक की कुंडली के छठे भाव में बुध है, तो व्यक्ति काफी आलसी, निष्ठुर बोलने वाला होता है। इसी किसी से मतलब नहीं है कि उनकी बात से किसी को किसी कष्ट होता है। हालांकि ये अपने शत्रुओं का नाश करते हैं। लेकिन विवाद करने से इन्हें बहुत ही जल्दी गुस्सा आ जाता है।
सप्तम भाव में बुध
अगर आपकी गोचर कुंडली के सप्तम भाव में बुध है, तो वह काफी बुद्धिमान और सुंदर होता है। ये सकल महिमा को प्राप्त होता है। इसके साथ ही इनकी पत्नी धनवान होती यानी जिस कुल में विवाह होता है, तो वहीं से काफी धन मिलता है।
अष्टम भाव में बुध
अगर किसी जातक की गोचर कुंडली के अष्टम भाव में बुध है, तो उसे मनुष्य दण्ड नेता कहा जाता है। यानी ऐसे व्यक्ति को राज्य से ऐसे अधिकार मिलते हैं, जिससे वह औरों को दण्ड देते हैं। ऐसे व्यक्ति काफी प्रसिद्ध, दीर्घायु होते हैं। इसके साथ ही अपने कुल का पालन करने वाला श्रेष्ठ व्यक्ति होता है।
नवम भाव में बुध
अगर किसी जातक की गोचर कुंडली के नवम भाव में बुध है, तो वह मनुष्य विद्वान, धार्मिक और आचारवान होता है। ये व्यक्ति अच्छा बोलने वाला होता है। इसके साथ ही वह व्यक्ति प्रवीण यानी कुशल, निपुण, चतुर या दक्ष होता है।
दशम भाव में बुध
दशम भाव में बुध के होने से वह व्यक्ति विद्वान, बलवान, बुद्धिमान,सुखी, सत्कर्म करने वाला होता है। ये हमेशा सत्य की राह में चलता है। ऐसे में वह हर क्षेत्र में सफलता पा लेता है।
ग्यारहवें भाव में बुध
फलदीपिका ग्रंथ के अनुसार, ग्यारहवें भाव में बुध के होने से वह व्यक्ति दीर्घायु होता है। इसके साथ ही वह अपनी बात में कायम रहता है। समय के साथ अपने वचन से पीछे नहीं हटता है। ऐसे जातकों को नौकरी में भी सुख की प्राप्ति होती है।
द्वादश भाव में बुध
द्वादश भाव में बुध का निकृष्ट फल है। ऐसा व्यक्ति दीन, आलसी, क्रूर, विद्याहीन होता है। इसके साथ ही कई बार इसे अपमान का भी सामना करना पड़ता है।
डिस्क्लेमर (Disclaimer)- इस लेख में दी गई जानकारी वैदिक ज्योतिष के पारंपरिक ग्रंथों, मान्यताओं और ज्योतिषीय सिद्धांतों पर आधारित है। जन्मकुंडली में सूर्य के फल केवल उसकी भाव स्थिति से निर्धारित नहीं होते, बल्कि राशि, दृष्टि, युति, ग्रहबल, दशा, अंतर्दशा तथा संपूर्ण कुंडली के समग्र विश्लेषण पर निर्भर करते हैं। यह सामग्री केवल सामान्य जानकारी और शैक्षणिक उद्देश्य से प्रस्तुत की गई है। इसे किसी प्रकार की निश्चित भविष्यवाणी, चिकित्सा, कानूनी, वित्तीय या व्यक्तिगत सलाह के रूप में न लें। किसी भी महत्वपूर्ण निर्णय से पहले योग्य विशेषज्ञ से परामर्श करना उचित है। ज्योतिष एक विश्वास और व्याख्या आधारित विद्या है, इसलिए इसके परिणाम व्यक्ति विशेष की परिस्थितियों और कुंडली के अनुसार भिन्न हो सकते हैं। इस लेख का उद्देश्य पाठकों को ज्योतिषीय अवधारणाओं से परिचित कराना है, न कि किसी प्रकार की गारंटी या दावा करना।
