Guru Gochar 2026: भाग्य के कारक गुरु बृहस्पति इस समय कर्क राशि में विराजमान है। इसके साथ ही गुरु एक निश्चित अवधि के बाद नक्षत्र परिवर्तन भी करते है जिसका असर 12 राशियों के साथ-साथ वैश्विक स्तर में देखने को मिल सकता है। इस समय गुरु पुष्य नक्षत्र में विराजमान है और 19 अगस्त तक इसी में रहेगी। इस दौरान वह पुष्य नक्षत्र के चारों पदों में प्रवेश कर रहे हैं। ऐसे में गुरु के अपने ही नक्षत्र में प्रवेश करने से 12 राशियों के जीवन में किसी न किसी तरह से प्रभाव अवश्य देखने को मिलने वाला है। वैदिक ज्योतिष शास्त्र में गुरु बृहस्पति को भाग्य, सौभाग्य, संपदा, ज्ञान, मुक्ति और आध्यात्मिक उन्नति का कारक माना जाता है। आइए जानते हैं गुरु के पुष्य नक्षत्र के दूसरे पद में जाने से 12 राशियों पर असर देखने को मिल सकता है। ये विश्लेषण चंद्र राशि के आधार पर किया जा रहा है। आइए जानते हैं गुरु के पुष्य नक्षत्र के दूसरे पद में जाने से 12 राशियों पर क्या असर देखने को मिलने वाला है..
द्रिक पंचांग के अनुसार, 19 जुलाई 2026, रविवार को 09:43 पी एम बजे पुष्य नक्षत्र के दूसरे पद में प्रवेश कर जाएंगे। इस नक्षत्र में 3 अगस्त, सोमवार को 11:17 पी एम बजे तक रहेंगे। इसके बाद चतुर्थ पद में प्रवेश कर जाएंगे।
गुरु बृहस्पति का पुष्य नक्षत्र के दूसरे पद में जाना क्यों है महत्वपूर्ण?
ज्योतिष शास्त्र में पुष्य नक्षत्र को शुभ नक्षत्रों में से एक माना जाता है। इस नक्षत्र को स्थिरता, समृद्धि और वृद्धि का प्रतीक माना जाता है। इस नक्षत्र के स्वामी स्वयं गुरु बृहस्पति है। ऐसे में इस नक्षत्र में गुरु के आने से ज्ञान, धर्म, भाग्य और विस्तार हो सकता है। जब गुरु स्वयं अपने नक्षत्र गोचर करता है, जो ऊर्जा बढ़ने के साथ बलवान होते हैं।
गुरु बृहस्पति पुष्य नक्षत्र के चार पदों में समय के अनुसार संचरण करेंगे। इस समय वह प्रथम पद में विराजमान है और जुलाई के मध्य में दूसरे पद में प्रवेश कर जाएंगे। ऐसे में 12 राशियों के जीवन के कई बड़े बदलाव देखने को मिल सकते हैं। खासकर व्यावहारिकता, स्थिर बुद्धि और आर्थिक मजबूती में प्रभाव देखने को मिल सकता है। जब गुरु पुष्य नक्षत्र के दूसरे पद में प्रवेश करेगा, तो कुछ राशि के जातकों की आर्थिक स्थिरता हो सकती है। निवेश करने से आपको अच्छा खासा लाभ मिल सकता है। व्यापार का भी तेजी से विस्तार हो सकता है। शिक्षा, ज्ञान और आध्यात्मिकता के क्षेत्र में प्रगति देखने को मिलने वाली है। इसके अलावा लंबे समय से रुके काम पूरे हो सकते हैं। यह गोचर विशेष रूप से उन क्षेत्रों के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है जो विकास, शिक्षा, वित्त और नीति निर्माण से जुड़े हैं।
कुंडली में गुरु की स्थिति को मजबूत करने के लिए सुबह स्नान के जल में हल्दी मिलाना, पीले वस्त्र धारण करना, भगवान विष्णु और गुरु बृहस्पति के समक्ष दीप प्रज्वलित करना तथा “ॐ बृहस्पतये नमः” मंत्र का 108 बार जाप करना।
डिस्क्लेमर: यह राशिफल सामान्य ज्योतिषीय सिद्धांतों, ग्रहों के गोचर और पारंपरिक मान्यताओं पर आधारित है। व्यक्तिगत कुंडली में ग्रहों की विशिष्ट स्थिति और दशा के आधार पर वास्तविक परिणाम हर व्यक्ति के लिए भिन्न हो सकते हैं। इसे किसी भी प्रकार का अकाट्य दावा या अचूक निर्णय न माना जाए। जीवन के महत्वपूर्ण निर्णयों, वित्तीय निवेशों अथवा स्वास्थ्य संबंधी गंभीर समस्याओं के लिए कृपया संबंधित क्षेत्र के प्रमाणित और योग्य विशेषज्ञों से परामर्श अवश्य लें।
